नोटबंदी का असर: बिगड़ी RBI की बैलेंसशीट, आधी हुई सरकार की कमाई

केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल ने 30 जून 2017 को समाप्त वित्त वर्ष के लिये अधिशेष राशि 306.59 अरब रुपये 30,659 करोड़ रुपये भारत सरकार को स्थानांतरित करने का फैसला किया है. हालांकि शीर्ष बैंक ने कम लाभांश दिये जाने के बारे में कुछ नहीं बताया.

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रिजर्व बैंक 30,659 कोड़ रुपये का लाभांश सरकार को देगा रिजर्व बैंक 30,659 कोड़ रुपये का लाभांश सरकार को देगा

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

रिजर्व बैंक ने सरकार को जून 2017 को समाप्त वित्त वर्ष में 30,659 करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है. यह पिछले साल के मुकाबले करीब आधा है. विश्लेषकों के अनुसार नोटंबदी के कारण नये नोटों की छपाई समेत अन्य कारणों से लाभांश में कमी आयी है. पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक ने सरकार को लाभांश के रूप में 65,876 करोड़ रुपये दिया था.

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केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल ने 30 जून 2017 को समाप्त वित्त वर्ष के लिये अधिशेष राशि 306.59 अरब रुपये 30,659 करोड़ रुपये भारत सरकार को स्थानांतरित करने का फैसला किया है. हालांकि शीर्ष बैंक ने कम लाभांश दिये जाने के बारे में कुछ नहीं बताया.

बजटीय अनुमान के अनुसार सरकार ने रिजर्व बैंक से 2017-18 में 58,000 करोड़ रुपये के लाभांश मिलने का अनुमान रखा था. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक, सरकारी बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से 74,901.25 करोड़ रुपये के लाभांश का अनुमान रखा था. इसके पीछे के कारणों को बताते हुए रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी ने कहा कि पिछले कुछ साल से रिटर्न कम हो रहा है जिसका कारण विकसित देशों में नकारात्मक ब्याज दरें हैं.

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बैंकों में नकदी बढ़ने के कारण रिर्ज बैंक रिवर्स रेपो पर धन उधार लेता रहा है और ब्याज दे रहा है. इससे उसके राजस्व पर असर पड़ा. विश्लेषकों के अनुसार रिजर्व बैंक की आय में कमी का एक कारण नई मुद्रा की छपाई की लागत है. साथ ही नोटबंदी के बाद चलन से हटाये गये नोट वापस आना है.

पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने ली चुटकी

रिजर्व बैंक के ऐलान के बाद की वह जून 2017 को खत्म वर्ष के लिए केन्द्र सरकार को महज 30,659 करोड़ का लाभांश देगी, पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट के जरिए कहा कि इस रकम से रिजर्व बैंक को 50,000 करोड़ रुपये की रकम और कम कर देनी चाहिए. चिदंबरम के मुताबिक यह नोटबंदी की लागत है जिसका भार रिजर्व बैंक को उठाना पड़ा और अब केन्द्र सरकार के घाटे में गिना जाना चाहिए.  साथ ही चिदंबरम ने केन्द्रीय बैंक से यह भी पूछा कि क्या वह पूरानी करेंसी को नष्ट करने की लागत और नई करेंसी की प्रिंटिंग कॉस्ट का आंकड़ा भी देश को बताने के लिए तैयार है?  

 

 

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