RBI के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई PAC तो पीएम को कर सकती है तलब

उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय से पब्लिक अकाउंट समिति ने नोटबंदी के फैसले पर कई अहम सवाल पूछे हैं. इन सवालों के जवाब पर संतुष्ट नहीं होने पर समिति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी तलब कर सकती है.

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रिजर्व बैंक से जवाब नहीं मिला तो पीएम मोदी को बुलाएगी पीएसी रिजर्व बैंक से जवाब नहीं मिला तो पीएम मोदी को बुलाएगी पीएसी

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय से पब्लिक अकाउंट समिति ने नोटबंदी के फैसले पर कई अहम सवाल पूछे हैं. इन सवालों के जवाब पर संतुष्ट नहीं होने पर समिति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी तलब कर सकती है.

पब्लिक अकाउंट समिति ने पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय से पर सवाल पूछे थे. समिति ने रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को इन सवालों का जवाब देने के लिए 20 जनवरी तक का समय दिया है.

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पीएसी ने 20 जनवरी को इन सवालों के जवाब के साथ गवर्नर उर्जित पटेल, वित्त सचिव अशोक लवासा और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास को तलब किया है. पीएसी के चेयरमैन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता केवी थॉमस ने कहा कि यदि रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से सभी सवालों के जवाब नहीं मिले तो अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए समिति प्रधानमंत्री को तलब कर सकती है.

थॉमस ने कहा कि प्रधानमंत्री को समिति के सामने बुलाने का फैसला सभी सदस्यों को सर्वसम्मति से किया जाएगा. गौरतलब है कि पब्लिक अकाउंट समिति के अध्यक्ष के नाते नोटबंदी के मुद्दे पर थॉमस ने प्रधानमंत्री से नवंबर में मुलाकात की थी. इस मुलाकात में प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि 8 नवंबर को लिए गए फैसले के बाद 50 दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे.

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समिति के अध्यक्ष के मुताबिक प्रधानमंत्री अपने 50 दिन में स्थिति को सामान्य करने के वादे पर खरे नहीं उतरे हैं जिससे पूरे फैसले पर सवाल उठ रहा है. थॉमस का मानना है कि केन्द्र सरकार ने अधूरी तैयारी के साथ नोटबंदी का फैसला लिया था जिससे अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम देखने को मिल रहा है. थॉमस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अब वह अपने गलत फैसले को सही ठहराने की कवायद में लगी हुई है.

नोटबंदी के मुद्दे पर यदि समिति प्रधानमंत्री को सफाई देने के लिए बुलाती है तो ये 5 सवाल पूछे जा सकते हैं-

1. इस फैसले में कौन-कौन शामिल था?

2. नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंकों में कितना पैसा जमा हो चुका?

3. क्या आम आदमी को अपने बैंक से अपना पैसा निकालने से रोकने के लिए कोई कानून है?

4. नोटबंदी के फैसले के बाद कितना पैसा वापस अर्थव्यवस्था में संचार किया जा चुका है?

5. और आम आदमी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर फैसले का क्या असर पड़ा.

नोटबंदी के फैसले पर गंभीर टिप्पणी करते हुए समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि जिस देश में कॉल ड्राप एक गंभीर समस्या है वहां सरकार कैसे पूरे देश को कैशलेस व्यवस्था पर ले जा सकती है. गौरतलब है कि पब्लिक अकाउंट समिति देश में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की समीक्षा करता है और जरूरी मामलों में टिप्पणी कर सकता है.

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