रिजर्व बैंक की जुबानी जानें- कब, क्यों और किसने लिया नोटबंदी का फैसला

रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय से पब्लिक अकाउंट समिति ने नोटबंदी के फैसले पर कई अहम सवाल पूछे थे. इन सवालों का जवाब देने के लिए उन्हें 20 जनवरी 2017 तक का समय दिया है. संसद की यह समिति जानना रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय से जानना चाहती थी कि आखिर नोटबंदी का फैसला कब, कैसे और किसके द्वारा लिया गया.

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राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 8:08 AM IST

रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय से पब्लिक अकाउंट समिति ने नोटबंदी के फैसले पर कई अहम सवाल पूछे थे. इन सवालों का जवाब देने के लिए उन्हें 20 जनवरी 2017 तक का समय दिया है. संसद की यह समिति जानना रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय से जानना चाहती थी कि आखिर नोटबंदी का फैसला कब, कैसे और किसके द्वारा लिया गया.

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इन सवालों के जवाब के लिए रिजर्व बैंक ने संसदीय समिति के लिए एक नोट तैयार किया था. इस नोट में नोटबंदी के फैसले को लेने की पूरी परिस्थिति का खुलासा किया गया था. आज के एक साल पूरे हो चुके हैं. लिहाजा जानिए कि रिजर्व बैंक के फैसले के पीछे दिए गए तर्क क्या थे जिससे आंकलन किया जा सके कि वह अपने तर्क पर कितना खरा उतरा.

जानिए पर संसदीय समिति के सवालों रिजर्व बैंक का जवाब:

1. का फैसला दोनों केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक का ज्वाइंट फैसला था जिससे अर्थव्यवस्था में प्रचलित 500और 1000 रुपये की करेंसी को बंद किया गया.

2. का फैसला करने के पीछे सबसे अहम वजह देश में नकली करेंसी के संचार को पूरी तरह से बंद करने का था.

3. रिजर्व बैंक चाहता था कि 500 और 1000 रुपये की करेंसी की जगह पर 5000 और 10,000 रुपये की नई करेंसी का संचार किया जाए. इस आशय रिजर्व बैंक ने केन्द्र सरकार को अक्टूबर 2014 में सलाह दी थी.

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4. 2000 रुपये की नई करेंसी के संचार को देश में महंगाई देखते हुए चुना गया. लिहाजा इस नई करेंसी से पुरानी करेंसी को बंद करना अर्थव्यवस्था में करेंसी संचार के हित में था.

5. रिजर्व बैंक ने कहा है कि 2000 रुपये की नई करेंसी आम आदमी का ध्यान आकर्षित करती लिहाजा नोटबंदी के साथ-साथ इस नई करेंसी के संचार का फैसला लिया गया.

6. रिजर्व बैंक ने बताया है कि 2000 रुपये की नई करेंसी की सीरीज छापने के लिए प्रिंटिंग प्रेस को जून 2016 में निर्देश दे दिया गया था.

7. रिजर्व बैंक ने बताया कि जून 2016 से नई करेंसी की प्रिंटिंग शुरू होने के बाद पर्याप्त मात्रा में स्टॉक तैयार हो गया था लिहाजा, 7 नवंबर, 2016 को केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक को चिट्ठी लिखी जिसके बाद 8 नवंबर, 2016 को रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड ने बैठक की और उसी दिन के लिए गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया.

8. के ऐलान से पहले रिजर्व बैंक को इस बात का अंदाजा था कि पुरानी करेंसी को पूरी तरह से बदलना संभव नहीं है. साथ ही बैंक के संज्ञान में था कि दिए गए समय में नई करेंसी के वैल्यू और वॉल्यूम को पुरानी करेंसी के बराबर करने के काम को नहीं किया जा सकता है.

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9. रिजर्व बैंक को भरोसा था कि डिजिटल पेमेंट का विकल्प करेंसी बदलने की प्रक्रिया में सहायक होगा. इससे अर्थव्यवस्था में नई करेंसी की मांग का दबाव कम रहेगा.

10. की पूरी प्रक्रिया का रिजर्व बैंक की बैलेंसशीट पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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