लॉकडाउन के दौरान पेटीएम पर दुकानदारों ने चार गुना अधिक पेमेंट लिया 

कोरोना की वजह से लोग करेंसी के इस्तेमाल से भी बच रहे हैं. करेंसी का इस्तेमाल कम से कम किया जा रहा है. इस वजह से लॉकडाउन के दौरान डिजिटल पेमेंट बढ़ा है. डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पेटीएम (Paytm) पर लॉकडाउन के दौरान दुकानदारों के भुगतान स्वीकार करने के मामले में चार गुना बढ़त दर्ज की गई है.

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पेटीएम से भुगतान में हुई बढ़त पेटीएम से भुगतान में हुई बढ़त

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 21 मई 2020,
  • अपडेटेड 10:40 PM IST
  • कोरोना संकट के बीच करेंसी के इस्तेमाल से बच रहे लोग
  • पेटीएम जैसे डिजिटल माध्यम का ज्यादा हो रहा इस्तेमाल
  • पेटीएम के बिजनेस खातों से दुकानदारों लिए 4 गुना पेमेंट

डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पेटीएम (Paytm) पर लॉकडाउन के दौरान दुकानदारों के भुगतान स्वीकार करने के मामले में चार गुना बढ़त दर्ज की गई है. यह वृद्धि कंपनी को अपनी नई एकाउंट सर्विस में देखने को मिली है.
गौरतलब है कि कोरोना की वजह से लोग करेंसी के इस्तेमाल से भी बच रहे हैं. करेंसी का इस्तेमाल कम से कम किया जा रहा है. इस वजह से लॉकडाउन के दौरान डिजिटल पेमेंट बढ़ा है. देश में 25 मार्च से ही लॉकडाउन चल रहा है और अब 18 से 31 मई तक लॉकडाउन का चौथा चरण लागू है. 
इस खाते में हुई बढ़त 
 पेटीएम के उपाध्यक्ष सजल भटनागर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'आठ जनवरी से 14 मार्च और 15 मार्च से 15 मई के बीच दुकानदारों के उसकी ‘बिजनेस खाता’ सेवा पर भुगतान स्वीकार करने के मामले में चार गुना बढ़त हुई है.’ 

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क्या है बिजनेस खाता 
पेटीएम ने आठ जनवरी को दुकानदारों के लिए मुफ्त ‘पेटीएम बिजनेस खाता’ सेवा शुरू की थी. इसके तहत दुकानदारों को सामान, उसकी कीमत और ग्राहक का फोन नंबर डालकर भुगतान स्वीकार करने की सुविधा मिलती है. इसके तहत दुकानदार ग्राहक को पेटीएम वॉलेट, पेटीएम यूपीआई, कार्ड या नेटबैंकिंग के माध्यम से तय तारीख पर भुगतान करने की याद भी दिला सकता है.


10 लाख दुकानदार जुड़े 
यह सेवा ग्राहक को इस संबंध में दुकानदार की ओर से अपने आप एसएमएस करके भुगतान की याद दिलाती है. भटनागर ने कहा कि पेटीएम बिजनेस खाता किराना दुकानदारों के लिए एक अनिवार्य सेवा बन चुकी है. यह उनके नकद पैसे वसूलने और उधारी याद रखने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाती है. उन्होंने कहा कि पांच महीने की अवधि में इस सेवा के माध्यम से कुल 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान स्वीकार किया गया. करीब 10 लाख दुकानदार कंपनी की इस सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं. 

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