गुजरात सरकार ने RBI को चेताया था, होने वाली है कैश की किल्लत

नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत को लेकर एक बार फिर देश में अफरा-तफरी मच गई है. एक तरफ सरकार और आरबीआई हालात सुधारने में जुटे हुए हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

विकास जोशी

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 10:18 PM IST

नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत को लेकर एक बार फिर देश में अफरा-तफरी मच गई है. एक तरफ सरकार और आरबीआई हालात सुधारने में जुटे हुए हैं. दूसरी तरफ आम आदमी खाली एटीएमों के चक्कर काट रहा है. हालांकि कैश की किल्लत की यह स्थ‍िति नहीं बनती, अगर भारतीय रिजर्व बैंक ने गुजरात सरकार की चेतावनी को मान लिया होता.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुजरात सरकार ने कैश की किल्लत शुरू होने से पहले ही ऐसे हालात पैदा होने के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक को जानकारी दे दी थी. गुजरात ने आरबीआई को अलर्ट किया था. इसमें उसने केंद्रीय बैंक को ऐसे हालात से निपटने के लिए कैश सप्लाई बढ़ाने पर जोर दिया था. दरअसल गुजरात में कई बैंकों ने कैश की कमी की श‍िकायत की थी.

इस कैश संकट के बीच केंद्र सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भरोसा दिलाया कि देश में नोटों की कोई कमी नहीं है. सरकार के पास अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये का भंडार है और पिछले 10-15 दिनों से 500 रुपये के नोटों की छपाई की रफ्तार भी बढ़ा दी है. वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने दावा किया कि करेंसी संकट को 3 दिन में दूर कर दिया जाएगा.

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कैश संकट पर वित्तमंत्री के बाद आरबीआई का भी बयान आया है. आरबीआई ने कहा है कि देश में कैश का कोई संकट नहीं है. बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश मौजूद है. सिर्फ कुछ एटीएम में ही लॉजिस्टिक समस्या के कारण ये संकट पैदा हो गया है.

आरबीआई ने कहा कि एटीएम के अलावा बैंक ब्रांच में भी भरपूर मात्रा में कैश मौजूद है. आरबीआई ने सभी बैंकों को आदेश दिया है कि वह एटीएम में कैश की व्यवस्था करें. RBI ने कहा कि मार्च-अप्रैल के दौरान इस प्रकार की समस्या आती है. पिछले साल भी ऐसा हुआ था. ये समस्या सिर्फ एक-दो दिनों के लिए ही है.

बता दें कि देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश न उपलब्ध होने से फिर नोटबंदी जैसी परेशानी का माहौल बनने लगा. लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए आखिरकार रिजर्व बैंक और सरकार को आगे आना पड़ा. यह परेशानी सबसे ज्यादा उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में सामने आ रही है.

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