अमेरिका का एक एआई (AI) स्टार्टअप अपने कर्मचारियों को ऑफिस के पास बसाने के लिए हर साल करीब ₹14 करोड़ ($17 लाख) रुपये दे रहा है. न्यूयार्क के इस स्टार्टअप 'रिला' की यह दरियादिली पहली नजर में जितनी शानदार लगती है, इसके पीछे की हकीकत उतनी ही चौंकाने वाली है. दरअसल, इस हाउसिंग बेनिफिट का लाभ उठाने वाले कर्मचारियों को कंपनी के एक बेहद कड़े और थका देने वाले वर्क कल्चर से गुजरना पड़ता है, जहां उन्हें हर दिन 12 घंटे और हफ्ते में 6 दिन काम करना होता है.
ब्रुकलिन के विलीअम्सबर्ग में स्थित सेल्स कोचिंग से जुड़ा यह स्टार्टअप अपने ऑफिस से साइकिल द्वारा महज 10 मिनट की दूरी पर रहने वाले कर्मचारियों को हर साल करीब ₹15 लाख ($18,000) का मकान भत्ता देता है. कंपनी के सीईओ सेबेस्टियन जिमेनेज का तर्क है कि वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि कर्मचारियों का आने-जाने का समय और थकान पूरी तरह खत्म हो सके. उनका मानना है कि इस बचे हुए वक्त का इस्तेमाल कर्मचारी आराम करने, कसरत करने और बिना किसी मानसिक तनाव के अपने काम पर पूरा फोकस करने में कर सकते हैं."
कर्मचारियों को ऑफिस के पास रहने के लिए भुगतान क्यों करती है?
कंपनी अपने विलीअम्सबर्ग मुख्यालय के करीब रहने वाले स्टाफ को सालाना 18,000 डॉलर का आवास भत्ता देती है.कंपनी के लगभग 120 कर्मचारियों में से करीब 80% लोग इस वैकल्पिक सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, जिससे इस प्रोग्राम की कुल वार्षिक लागत लगभग 17 लाख डॉलर (1.7 मिलियन डॉलर) तक पहुंच जाती है.
यह भत्ता विलीअम्सबर्ग जैसे न्यूयॉर्क शहर के सबसे महंगे इलाकों में से एक में रहने के भारी खर्च को कम करने में मदद करता है, जहां एक स्टूडियो अपार्टमेंट का किराया अक्सर लगभग 4,000 डॉलर (लगभग ₹3.3 लाख) प्रति महीना होता है.
जिमेनेज का कहना है कि जब ऑफिस आने-जाने का झंझट और समय बचेगा, तो कर्मचारी बचे हुए वक्त में आराम कर सकेंगे, कसरत कर पाएंगे और अपने परिवार को समय दे सकेंगे. यही नहीं, ऑफिस के माहौल को ऐसा बनाने के लिए जहां काम में पूरा मन लगे और दिमाग तेजी से चले, कंपनी ने हार्वर्ड के एक खास एक्सपर्ट की मदद ली है, ताकि ऑफिस में हवा के आने-जाने का सिस्टम सबसे शानदार हो.
कर्मचारियों पर लाखों डॉलर का निवेश
आवास भत्ता तो बस शुरुआत है, कंपनी अपने हर कर्मचारी पर बाकी सुविधाओं (जैसे खाना, जिम आदि) को मिलाकर हर साल करीब ₹31 लाख ($37,000) खर्च करती है. पूरी कंपनी का यह सालाना खर्च लगभग ₹36 करोड़ बैठता है. कंपनी के मालिक जिमेनेज का मानना है कि यह फिजूलखर्ची नहीं बल्कि एक फायदेमंद सौदा है. उनका दावा है कि कंपनी का हर एक इंजीनियर काम करके सालभर में कंपनी को ₹33 करोड़ से ₹41 करोड़ ($4 मिलियन से $5 मिलियन) तक की कमाई करके देता है. इसलिए, कर्मचारियों पर इतना खर्च करना बिजनेस के लिहाज से बिल्कुल सही है. कंपनी ने लंबे समय की प्लानिंग के तहत अपने ऑफिस की बिल्डिंग को भी 10 साल के लिए लीज पर लिया है.
हफ्ते में 72 घंटे काम
सुविधाएं भले ही सपनों जैसी हों, लेकिन इसके बदले काम भी जी-तोड़ करना पड़ता है. यहां कर्मचारियों को रोज 12 घंटे और हफ्ते में 6 दिन ऑफिस में डटना पड़ता है, यानी हर हफ्ते पूरे 72 घंटे का कड़ा वर्क शेड्यूल. जिमेनेज खुद अपनी कंपनी के माहौल को हद से ज्यादा सख्त बताते हैं. उनका कहना है कि वे जानबूझकर ऐसे लोगों को नौकरी पर रखते हैं जिन्हें भारी दबाव में काम करने की आदत हो जैसे पूर्व एथलीट्स, खुद अपनी कंपनी चला चुके लोग या बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी प्रोफेश्नल्स. यह कंपनी हर किसी के लिए नहीं है, बल्कि यह सिर्फ उन लोगों को चुनती है जो खुद ऐसा बेहद चुनौतीपूर्ण और कड़ा माहौल चाहते हैं.
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