दिल्ली-NCR की 'जहरीली हवा' ने बदला रियल एस्टेट का ट्रेंड, अब पहाड़ों पर घर तलाश रहे लोग

दिल्ली-एनसीआर की दमघोंटू हवा ने अब लोगों को दूसरे शहरों में अपने लिए सेकेंड होम तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है. साल-दर -साल हालात और भी बिगड़ते जा रहे हैं और प्रदूषण की इस समस्या का कोई हल नजर नहीं आ रहा है.

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प्रदूषण की वजह से दिल्ली छोड़ना चाहते हैं लोग (Photo-Pixabay) प्रदूषण की वजह से दिल्ली छोड़ना चाहते हैं लोग (Photo-Pixabay)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

दिल्ली-एनसीआर के लोग साफ हवा के लिए तरस रहे हैं, करीब दो महीने होने को हैं और प्रदूषण से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और हवा हर बीतते दिन के साथ और भी दमघोंटू होती जा रही है. आज स्थिति यह है कि दिल्ली में रहना अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक 'हेल्थ इमरजेंसी' बन चुका है, जो लोग यहां रहने को मजबूर हैं, वे तो किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहे हैं, लेकिन संपन्न वर्ग अब इस 'गैस चैंबर' से निकलने का रास्ता तलाश रहा है.

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साफ हवा की तलाश में लोग शहर को छोड़कर पहाड़ों या खुले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर निवासी प्रदूषण के कारण शहर छोड़ने पर विचार कर रहे हैं, इनमें से कई लोग पहले ही सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट हो चुके हैं.

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अमीरों का नया ठिकाना पहाड़ 

दिल्ली-एनसीआर के कई परिवार अब मास्क, एयर प्यूरीफायर और सप्लीमेंट्स पर अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं. शिकागो विश्वविद्यालय के Air Quality Life Index (AQLI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों की औसत आयु 10 से 12 साल कम हो सकती है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदूषण के सीजन में हिमाचल प्रदेश के कसौली, शिमला  और उत्तराखंड के ऋषिकेश, देहरादून में 'सेकंड होम' के लिए पूछताछ में 15% से 20% तक का उछाल देखा गया है. जिन लोगों के पास पैसा है,उनके लिए अब 'लग्जरी' का मतलब आलीशान बंगला नहीं, बल्कि 'साफ ऑक्सीजन' है.

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यही कारण है कि लोग अब गुरुग्राम और नोएडा के भीड़भाड़ वाले इलाकों के बजाय फरीदाबाद के आउटर हिस्सों,सोहना या फिर सीधे उत्तराखंड और हिमाचल के शांत इलाकों में निवेश कर रहे हैं. खरीदार अब घर नहीं, बल्कि 'वेलनेस' खरीद रहे हैं. पहाड़ों में स्थित विला और फार्महाउस अब केवल वीकेंड गेटवे नहीं, बल्कि साल भर रहने के स्थायी ठिकानों में बदल रहे हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

Mypropertyfact.in के फाउंडर  रिट्ज़ मलिक aajtak.in से बातचीत में कहते हैं- "दिल्ली-एनसीआर में गहराता प्रदूषण अब केवल एक मौसमी स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा आर्थिक मोड़ बन गया है. खरीदारों की प्राथमिकताएं अब आलीशान इंटीरियर से हटकर 'सस्टेनेबल लिविंग' की ओर मुड़ रही हैं. कंक्रीट के जंगलों के बजाय, अब उन प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ रही है, जो 'ग्रीन बेल्ट' के करीब हैं या जहां उन्नत 'एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम' मौजूद हैं.'

मलिक आगे कहते हैं- 'प्रदूषण अब निवेश के फैसलों को प्रभावित करने वाला एक निर्णायक कारक बन चुका है. अब वो लोग जिनके पास पैसा है वो हिल स्टेशनों और कम प्रदूषण वाले इलाकों में लग्जरी विला और सेकंड होम्स खरीद रहे हैं. यह ट्रेंड लोगों के निवेश से ज्यादा उनकी लाइफ स्टाइल और स्वस्थ जीवन से जुड़ा है. अब हालत ऐसी है कि साफ हवा, खुली जगह और मानसिक शांति ही लग्जरी बन चुका हैं. आने वाले समय में ‘हेल्दी लोकेशन’ एक बड़ा रियल एस्टेट पैरामीटर बनकर उभरेगा.'

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हर साल जहरीली हो रही है हवा

दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण अब हर साल की कहानी बन चुका है, पहले साल में कुछ दिन खराब हवा होती थी, लेकिन अब तो लोगों को साफ हवा देखें हुए कई महीने गुजर जा रहे हैं. हालात बिगड़ते देख लोगों को यही समझ आ रहा है कि यहां तो कुछ सही नहीं होने वाला है, इसलिए इस शहर से दूर जाना ही बेहतर है.   

FarmlandBazaar.com के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गुप्ता कहते हैं- 'दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण ने लोगों को साफ हवा की कीमत अब समझा दी है. जीवन की गुणवत्ता को लेकर लोग अब पहले से अधिक जागरूक हो गए है. अमीर खरीदार अब रियल एस्टेट सिर्फ पैसे नहीं निवेश नहीं कर रहे, बल्कि बेहतर और लाइफ स्टाइल में निवेश कर रहे हैं, हमसे दिल्ली-एनसीआर इलाके के लोग लगातार पूछताछ कर रहे हैं. वो लोग देहरादून, मसूरी बेल्ट, नैनीताल क्षेत्र, ऋषिकेश के आसपास और हिमाचल जैसे नजदीकी हिल स्टेशनों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं.'

पवन आगे कहते हैं- 'अब बात सिर्फ निवेश की नहीं रह गई है, अब प्राथमिकताएं बदल रही हैं. यही कारण है कि घर खरीदार अब फरीदाबाद, नोएडा और गुरुग्राम के उन बाहरी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां 'लो-डेंसिटी' और 'ग्रीन प्रोजेक्ट्स' की बहुलता है. यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि अब रियल एस्टेट के मायने सिर्फ ईंट-पत्थरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्वच्छ आबोहवा और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा एक जीवन रक्षक फैसला बन चुका है. "

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दिल्ली में लोग रहने से लोग डरते हैं 

कुछ साल पहले तक दिल्ली-एनसीआर में घर बनाना और यहां बसना लोगों को सपना हुआ करता था, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग यहां से निकलने के रास्ते तलाश रह हैं, लोगों के लिए अपनी जिंदगी इस शहर में अब सस्ती लगने लगी है. यहां लोग खुद के लिए और अपने बच्चों के लिए हर पल खतरा महसूस कर रहे हैं. वो यहां से दूसरे शहरों में शिफ्ट होना चाहते हैं क्योंकि अब लोगों की इस बात की उम्मीद ही नहीं है कि अब दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ हो पाएगी, इसलिए दूसरे विकल्प तलाशना की अपने लिए सही फैसला होगा.

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