दिल्ली-एनसीआर में अपना घर खरीदना अब बड़ी चुनौती बन गया है, पिछले कुछ समय में जिस तरह से नोएडा और गुरुग्राम के प्रॉपर्टी रेट्स आसमान छू रहे हैं, उन्होंने मध्यम वर्ग और नए घर खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. आज स्थिति यह है कि नोएडा के प्राइम सेक्टर्स या गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड एक्सटेंशन में एक अदद फ्लैट लेना आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है. ऐसे में 'स्मार्ट इन्वेस्टर' और समझदार खरीदार अब गाजियाबाद की ओर रुख कर रहे हैं. गाजियाबाद न केवल किफायती है, बल्कि यहां की कनेक्टिविटी और भविष्य की योजनाएं इसे निवेश के लिहाज से बेहतर हैं.
आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में रियल एस्टेट एक्सपर्ट शशांक त्रिवेदी बताते हैं- 'आप इस समय नोएडा या दिल्ली में काम करते हैं और एक ऐसी जगह तलाश रहे हैं, जहां से ऑफिस पहुंचना आसान हो और माहौल पूरी तरह विकसित हो, तो गाजियाबाद के तीन इलाके आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होने चाहिए. इंदिरापुरम इस समय एंड-यूजर के लिए सबसे हॉट डेस्टिनेशन है. यह इलाका नोएडा के सेक्टर 62, 63 और 76 जैसे बड़े आईटी हब्स के बिल्कुल बगल में स्थित है. यहां रहने का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को है जो आईटी सेक्टर में जॉब करते हैं, क्योंकि उनका यात्रा का समय लगभग शून्य हो जाता है. हालांकि, लोकप्रियता के कारण यहां प्राइस पॉइंट थोड़े बढ़े हैं, लेकिन सुविधाओं के मामले में यह क्षेत्र बेजोड़ है.'
इसी कड़ी में वैशाली और वसुंधरा का नाम आता है. ये दोनों इलाके उन लोगों के लिए वरदान हैं जो पूर्वी दिल्ली या मध्य दिल्ली से जुड़ाव रखना चाहते हैं. वैशाली और वसुंधरा न केवल दिल्ली के बेहद करीब हैं, बल्कि यहां का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से तैयार है. स्कूल, अस्पताल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां पहले से ही स्थापित हैं, जो इसे एक 'रेडी-टू-मूव' लाइफस्टाइल के लिए परफेक्ट बनाती हैं.
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नोएडा से कम हैं रेट
सिद्धार्थ विहार एनएच-24 की बेल्ट के साथ लगा यह इलाका इस समय रियल एस्टेट जगत में 'बूम' कर रहा है. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि बाहर से आए बड़े और नामी बिल्डर्स यहां बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं और विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं. सिद्धार्थ विहार उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है जो 'लो इन्वेस्टमेंट और हाई रिटर्न' के फॉर्मूले पर काम करना चाहते हैं.
यहां अभी प्रॉपर्टी के दाम नोएडा के मुकाबले काफी कम हैं, लेकिन विकास की गति को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ वर्षों में यहां की कीमतों में जबरदस्त उछाल आएगा. यह उन लोगों के लिए भी एक बेहतरीन मौका है जिनका सैलरी पैकेज कम है, लेकिन वे दिल्ली-एनसीआर की मुख्यधारा से कटे बिना अपना आशियाना चाहते हैं.
ये इलाके गाजियाबाद के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं. यहां निवेश करने का सबसे बड़ा तर्क यह है कि यहां आप कम पैसा लगाकर बड़े मुनाफे की नींव रख सकते हैं. जो लोग आज 2 से 5 करोड़ का निवेश नहीं कर सकते, उनके लिए ये लोकेशंस एक सुरक्षित और बढ़िया रिटर्न देने वाला विकल्प प्रदान करती हैं. यहां की टाउनशिप प्लानिंग आधुनिक है और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है.
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शशांक बताते हैं गाजियाबाद की वैल्यू बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ यहां का कनेक्टिविटी नेटवर्क है. अक्सर लोग सोचते हैं कि गाजियाबाद दूर है, लेकिन हकीकत इसके उलट है. उदाहरण के तौर पर, नए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के आने से गाजियाबाद की किस्मत बदल गई है, यदि कोई इंदिरापुरम में रहता है, तो वह महज 2 घंटे 45 मिनट में देहरादून पहुंच सकता है.
तुलना की जाए तो नोएडा या ग्रेटर नोएडा में रहने वाले व्यक्ति को इस एक्सप्रेसवे को पकड़ने के लिए ही सवा घंटा अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा. चाहे कोई गुड़गांव से आए या दिल्ली के किसी और कोने से उसे उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में जाने के लिए गाजियाबाद की 5-10 किलोमीटर की परिधि से गुजरना ही होगा. यही भौगोलिक श्रेष्ठता गाजियाबाद को निवेश का केंद्र बनाती है.
खरीददारों के लिए गाइड
शशांक कहते हैं गाजियाबाद का मार्केट जितना आकर्षक है, उतना ही ट्रिकी भी हो सकता है. एनएच-24 के किनारे प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आई हुई है, ऐसे में एक आम खरीदार अक्सर उलझ जाता है. बिना किसी ब्रोकर या एजेंट के भी यदि आप सही चुनाव करना चाहते हैं, तो सबसे पहले जीडीए अप्रूव्ड प्रोजेक्ट्स को ही देखें. अप्रूव्ड लोकेशन पर निवेश करना आपकी मेहनत की कमाई की सुरक्षा की गारंटी देता है.
गाजियाबाद केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक समझदारी भरा निर्णय है. यहां कनेक्टिविटी बेहतर है, एक्सप्रेसवे का जाल बिछा हुआ है और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां हर बजट के लिए कुछ न कुछ मौजूद है.
स्मिता चंद