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ई-सिगरेट की गिरफ्त में युवा आबादी, जानें- कितना बड़ा है कारोबार

अमित कुमार दुबे
  • 19 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST
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मोदी सरकार ने बुधवार को देश में ई-सिगरेट पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. इसके तहत ई-सिगरेट निर्माण, आयात, निर्यात, वितरण और भंडारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. मंत्रिमंडलीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रतिबंध को लागू करने के लिए सरकार तत्काल एक अध्यादेश लाएगी, जिसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र में एक विधेयक संसद में पेश करेगी. (Photo: Reuters)

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव प्रीति सुदान ने कहा कि प्रतिबंध के तहत, पहली बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना या एक साल की जेल की सजा का प्रावधान होगा. नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर तीन साल की जेल या पांच लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि आयात, निर्यात और वितरण, ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पादों का भंडारण करना भी अपराध माना जाएगा. (Photo: Reuters)

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यह निर्णय विभिन्न धड़ों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) पर प्रतिबंध की मांग किए जाने के बाद लिया गया है. ईएनडीएस में ई-सिगरेट्स, हीट-नॉट-बर्न डिवाइसेज, वेप, ई-शीशा, ई-निकोटीन फ्लेवर्ड हुक्का और ऐसी ही अन्य डिवाइसें आती हैं. (Photo: Reuters)

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ई-सिगरेट्स में तंबाकू नहीं जलती है, लेकिन तरल रसायन गर्म होता है जो भाप बनकर व्यक्ति के शरीर में जाता है. इस कारण इसे वेपिंग भी कहा जाता है. ई-सिगरेट्स स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी गया है. सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में हालांकि भारत की कोई कंपनी ई-सिगरेट नहीं बनाती है, लेकिन यहां लगभग 400 ब्रांड 150 फ्लेवर्स में ई-सिगरेट उपलब्ध कराते हैं. (Photo: Reuters)

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ड्राफ्ट ऑर्डिनेंस के मुताबिक, ई-सिगरेट रखने पर 6 महीने की सजा या 50,000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकती है. अगर कोई ई-सिगरेट के प्रोडक्शन, मैन्युफैक्चर, सेल्स, एडवर्टाइजमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन में पहली बार पकड़ा गया तो उसे एक साल की जेल या 1 लाख रुपये का जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है. अगर कोई दोबारा यह अपराध करता हुआ पकड़ा गया तो उसे तीन साल की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा.

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जो लोग ई-सिगरेट का सपोर्ट कर रहे थे, उनका कहना था कि यह तंबाकू के मुकाबले कम नुकसानदायक है. लेकिन सरकार का कहना है कि इससे उतना ही नुकसान होता है जितना सामान्य सिगरेट से होता है. ई-सिगरेट में तंबाकू नहीं होता है. इसमें वैपोराइज्ड लिक्विड निकोटिन होता है जिसे यूजर्स इनहेल करते हैं.

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ई-सिगरेट पर पाबंदी लगते ही मंगलवार को सिगरेट कंपनियों के शेयरों में अच्छा खासा उछाल देखने को मिला. बाजार बंद होने से पहले ITC के शेयर 1.8 फीसदी, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर 7.8 फीसदी, वीएसटी इंडस्ट्रीज के शेयर 1 फीसदी और गोल्डन टोबैको के शेयर 4.5 फीसदी चढ़कर बंद हुए. (Photo: Reuters)

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दरअसल ई-सिगरेट्स गैर-लाइसेंस वाले प्रोडक्ट्स हैं, जो अवैध रूप से भारत में घुस आए हैं. इसे एक ऐसे प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाता है जो लोगों को स्मोकिंग छोड़ने में मदद करते हैं. फिलहाल युवाओं में ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में ई-सिगरेट के 460 ब्रांड मौजूद हैं, जिसमें 7,700 से भी ज्यादा फ्लेवर की ई-सिगरेट मिलती हैं.

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भारत में कितना बड़ा ई-सिगरेट का कारोबार है, इसका कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक भारत में ई-सिगरेट का करोड़ों रुपये का बाजार बन चुका है. इससे पहले 31 मई 2019 को राजस्थान सरकार ने ई-सिगरेट की बिक्री और इस्तेमाल पर बैन लगाया था. (Photo: Getty)

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कैसे आई ई-सिगरेट
2003 में चीनी फॉर्मासिस्ट होन लिक ने इसे बनाया था, जिसके बाद चीन की ही कंपनी गोल्डन ड्रैगन ने बाकी देशों में इसकी बिक्री शुरू कर दी. भारत में ई-सिगरेट नाथुला-पास, नेपाल समेत अन्य व्यापारिक रास्तों से प्रवेश किया.

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