डोनाल्ड ट्रंप का हालिया ईरान को मुद्दा बनाकर किया गया 25% टैरिफ अटैक (Trump Tariff Attack) हो, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वहां के तेल के खजाने पर कंट्रोल हो या फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की तैयारी, ऐसा लगता है कि अमेरिका ने चीन को निशाना बनाकर ही ये तीनों ब्रह्मास्त्र (US Three Brahmastra On China) छोड़े हैं, क्योंकि इन कदमों से अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा नुकसान ड्रैगन को ही होता नजर आ रहा है. आइए समझते हैं कैसे?
पहला ब्रह्मास्त्र: वेनेजुएला के तेल पर कंट्रोल
Venezuela एक ऐसा देश है, जिसके पास प्रमाणित कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, जो 303 अरब बैरल का है. इस तेल के खजाने पर कंट्रोल करने का दावा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी तेल कंपनियां (US Oil Firms) वेनेजुएला में एंट्री करेंगी, और वहां क्षतिग्रस्त ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़ा निवेश करेंगी. इसे लेकर ट्रंप ने कदम भी आगे बढ़ा दिए हैं, बीते सप्ताह 17 तेल कंपनियों के सीईओ के साथ उन्होंने बैठक की थी. इस दौरान उन्होंने ये भी साफ कर दिया था कि सिर्फ उनका प्रशासन ही यह तय करेगा कि वेनेजुएला में किन कंपनियों को काम करने की अनुमति मिलेगी.
China के लिए ट्रंप का ये कदम इसलिए मुसीबत का सबब है, क्योंकि ड्रैगन Venezuelan Crude Oil का सबसे बड़ा खरीदार है. बीते साल के आंकड़े देखें, तो 2025 में वेनेजुएला के कुल तेल निर्यात का करीब 75% हिस्सा तो चीन को ही गया था. खास बात ये है कि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों (US Ban) के बाद भी वेनेजुएला ने चीन, रूस और ईरान को डिस्काेउंट पर तेल की सप्लाUई जारी रखी. वेनेजुएला का तेल अपने शिप ट्रैकिंग सिस्टम को बंद कर यानी Dark Shiping के जरिए चीन पहुंचता रहा है. अब ट्रंप के कंट्रोल के बाद चीन का सबसे बड़ा तेल सप्लायर उससे छिन जाएगा और अमेरिका द्वारा इतना बड़ा निवेश करके चीन को किफायती रेट में तेल बेचने के चांस बहुत कम हैं.
दूसरा ब्रह्मास्त्र: ईरान को घेरने के लिए ' 25% टैरिफ बम'
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घेरने के लिए उसके व्यापारिक साझेदारों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इसका भी सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ता नजर आ रहा है और एक बार फिर US-China Trade War के संकेत मिलने लगे हैं. दरअसल, चीन ईरानी तेल का भी सबसे बड़ा खरीदार है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80-90% तेल China Import करता है.
अगर ट्रंप के हालिया टैरिफ अटैक पर गौर करें, तो अमेरिका चीन के सभी सामानों पर 25% Tariff लगा देगा. सिर्फ इसलिए कि चीन ईरान से तेल खरीदना जारी रखे हुए है. इससे चीन की टेंशन बढ़ेगी, क्योंकि ये सीधा उसके एनर्जी सिक्योरिटी को कमजोर करेगा. ट्रंप के टैरिफ के बाद EVs, बैटरियां, सोलर पैनल, स्टील-एल्युमिनियम का निर्यात चीन को महंगा पड़ेगा. इस बीच Iran Crisis से अगर तेल महंगा होगा तो ये सीधे चीन की इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर बुरा असर डालेगा. एक असर ये भी होगा कि US-China के बीच बीते अक्तूबर 2025 में बड़े ट्रेड टेंशन के बाद हुए अंतरिम व्यापार समझौता पर संकट आ सकता है, जिसमें ट्रंप ने चीन पर लगाए टैरिफ में राहत दी थी, तो शी जिनपिंग की ओर से रेयर अर्थ के निर्यात पर लगाए प्रतिबंधों अस्थायी रूप से हटा लिए गए थे.
तीसरा ब्रह्मास्त्र: ग्रीनलैंड के जरिए ड्रैगन को चोट
वेनेजुएला पर कब्जा और ईरान पर एक्शन के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड (Trump Eyes On Greenland) पर है और उन्होंने साफ कहा है कि इसपर कंट्रोल से कम कुछ भी मंजूर नहीं है. वे पहले भी खुले तौर पर कह चुके हैं कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को 'आसान तरीके' से हासिल नहीं कर पाया, तो 'मुश्किल तरीका' भी अपनाएगा. ये कदम भी चीन की टेंशन (China Tension) बढ़ाने वाला है.
अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड को जरूरी बताते हैं. वे कह चुके हैं कि वहां रूसी (Russian) और चीनी (Chinese) जहाजों की मौजूदगी चिंता की बात है और इस कारण वे इसपर कब्जाs करेंगे. लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. ग्रीनलैंड के पास मौजूद बेशकीमती खजाने पर ट्रंप अपनी आंखें जमा चुके हैं, जो सीधे चीन के वर्चस्व के लिए खतरा है. यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं, जिसके मिलने के बाद अमेरिका को चीन पर निर्भर नहीं रहना होगा.
बता दें कि चीन रेयर अर्थ (China Rare Earth) का 90% तक हिस्साि नियंत्रित करता है. इसके अलावा, ग्रीनलैंड के पास यूरेनियम, लिथियम, कोबाल्ट, निकेल भी बड़ी मात्रा में है. चीन ने पिछले कुछ सालों में आर्कटिक क्षेत्र में माइनिंग, इंफ्रास्ट्र क्चकर बनाने और रिसर्च में दिलचस्पीस दिखाई है और धीरे-धीरे वहां पर ताकत बढ़ा रहा है, अमेरिका का ये कदम उसे सीधी चुनौती है.
दीपक चतुर्वेदी