Iran War Global Impact: तेल के खजाने पर बैठा ईरान... युद्ध से मच सकती है ग्लोबल खलबली, चीन का बड़ा घाटा!

Global Oil Tension Amid Iran War: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए अटैक के बाद से ही तेल को लेकर ग्लोबल टेंशन बढ़ गई है. एक्सपर्ट्स जंग आगे बढ़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के चलते Crude Oil Price के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की आशंका जता रहे हैं.

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ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल रिजर्व. (Photo: ITG) ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल रिजर्व. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

ईरान पर इजरायल-अमेरिका का हमले ने ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है. अब तक US-Israel Iran War के अपडेट पर नजर डालें, तो ईरान के सु्प्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत (Ayatollah Khamenei Killed) हो चुकी है. ट्रंप और इजरायल के दावे के बाद ईरानी सेना(IRGC), सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA और मुख्य समाचार चैनल 'प्रेस टीवी' (Press TV) ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कर दी है. हालांकि, खामेनेई की मौत के बाद भी हमले जारी हैं और इससे क्रूड ऑयल सप्लाई को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ती जा रही है. इसके पीछे बड़ा कारण ये है कि ईरान तेल के खजाने पर बैठा हुआ है और इसमें व्यवधान चीन समेत कई बड़े देशों में खलबली मचा सकता है. आइए जानते हैं कैसे? 

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100 डॉलर के पार पहुंचेगी तेल की कीमत? 
US-Israel Iran War के चलते तेल की कीमतों में तगड़े उछाल का आशंका बढ़ गई है. तमाम रिपोर्ट्स में अगले हफ्ते Crude Oil Price में बड़ी तेजी का अनुमान जाहिर किया जा रहा है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच हॉर्मुज ऑफ स्ट्रेट पर जहाजों को रोकने और आगे भी रुकावट जारी रहने ने मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई को लेकर टेंशन बढ़ा दी है. 

युद्ध की शुरुआत से पहले ही इसके डर से क्रूड प्राइस चढ़ने लगे थे और बीते शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड के दाम 2.87% चढ़कर करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे. वहीं अब भयंकर युद्ध के बीच एक्सपर्ट अगले सप्ताह इसमें तेज उछाल की बात कहते नजर आ रहे हैं. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के मुताबिक, अगर युद्ध के चलते ईरान टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डालता है, तो ब्रेंड क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर पहुंच सकता है. वहीं जेपी मॉर्गन चेस के एनालिसिस से पता चलता है कि मिडिल ईस्ट में गंभीर व्यवधान की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं. 

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ईरान के पास 209 अरब बैरल का खजाना
बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने मध्य पूर्व को एक बार फिर संकट (Middle East Crisis) के कगार पर धकेल दिया है. हालांकि, पूरा फोकस मिलिट्री ऑपरेशंस पर है, लेकिन इसके गहरा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों (Global Energy Markets) में भी देखने को मिल सकता है.

दुनिया में ग्लोबल खलबली मचने के पीछे वजह ये है कि ईरान के पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार (Iran Holds 3rd Largest Proven Oil Reserves) है. वित्त वर्ष 2024-25 के अनुमान को देखें, तो ईरान 208-209 अरब बैरल तेल के खजाने पर बैठा हुआ है. यह आंकड़ा ग्लोबल ऑयल रिजर्व का करीब 12% है, जबकि मिडिल ईस्ट के कुल भंडार का लगभग एक चौथाई है. वर्षों के प्रतिबंधों और सीमित विदेशी निवेश के बाद भी ईरान एक बेहद संतुलित तेल बाजार में महत्वपूर्ण सप्लायर की भूमिका निभा रहा है. 

ईरान में रोज इतना तेल उत्पादन
Iran वर्तमान में रोजाना करीब 3.3 से 3.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है, जो ग्लोबल आपूर्ति का लगभग 3% है. इसके साथ ही लगभग 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कंडेनसेट और अन्य तरल पदार्थों का भी उत्पादन देश मे किया जाता है. ओपेक में तीसरे सबसे बड़े उत्पादक के रूप में ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति में लगभग 4.5% का योगदान देता है. 1974 में अपने चरम पर ईरान करीब 6 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का उत्पादन कर रहा था. ओपेक के आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन तब से घटकर लगभग 3.1 मिलियन बीपीडी रह गया है, लेकिन देश ऊर्जा बाजारों में एक महत्वपूर्ण शक्ति बना हुआ है. प्रतिबंधों के बाद भी रोजाना 1.5 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन जारी है. 

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कंसल्टेंसी फर्म एफजीई के अनुसार, ईरान की घरेलू शोधन क्षमता लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन है. बीते साल 2025 में Iran ने एलपीजी सहित लगभग 820,000 बैरल प्रति दिन ईंधन उत्पादों का निर्यात किया, जो 2024 के स्तर से थोड़ा कम है. ईरान की प्रमुख रिफाइनरियों में अबादान शामिल है, जो मिडिल ईस्ट की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है. इसके साथ ही तेहरान, इस्फहान, बंदर अब्बास, अराक और तबरीज़ भी शामिल हैं.

हॉर्मुज में रुकावट से बढ़ेगी टेंशन
ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा खारग द्वीप के रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जो एक संकरा समुद्री रूट है और ये फिलहाल वैश्विक चिंता (Global Tension) का केंद्र बिंदु बन गया है. ऐसा हो भी क्यों न आखिर होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है. इस कॉरिडोर से कच्चे तेल का प्रवाह मुख्य रूप से खाड़ी उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से आता है और यह तेल चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों में पहुंचता है. 

China के लिए क्यों बड़ी टेंशन? 
जैसा कि बताया प्रतिबंधों ने ईरान की स्वतंत्र रूप से तेल बेचने की क्षमता सीमित की है, लेकिन फिर भी देश प्रतिदिन लगभग 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात जारी रखे है. 2023 में ईरान का शुद्ध तेल निर्यात राजस्व का अनुमान 53 अरब डॉलर था, जो 2021 के 37 अरब डॉलर से अधिक था. इसका ज्यादातर हिस्सा चीन को (China Oil Import From Iran) जाता है और ड्रैगन उसका सबसे बड़ा कस्टमर है. रिपोर्ट की मानें, तो करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा आयाच चीन करता है और ये ईरान के कुल निर्यात का लगभग 85–90% तक पहुंच जाता है. ईरानी तेल में रुकावट से सबसे ज्यादा झटका चीन को ही लग सकता है. 

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