भारतीय एयरलाइंस संकट (Indian Airlines In Crisis) में नजर आ रही हैं. एयर इंडिया से लेकर इंडिगो और स्पाइसजेट समेत तमाम एयरलाइन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अपनी परेशानी बताई है और चेतावनी देते हुए कहा है कि विमान ईंधन (एयर टर्बाइन फ्यूल-ATF) की कीमतों में तेज इजाफा होने से एविएशन सेक्टर बेहद तनाव का सामना कर रहा है.
एफआईए ने अपने लिखे पत्र में एविएशन मिनिस्ट्री से कहा है कि मौजूदा लागत का माहौल कई एयर रूट्स को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना रहा है. अगर ATF Price इसी तरह हाई पर बने रहते हैं, तो एयरलाइंस को अपने परिचालन का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
सरकार से मांगी ये मदद
लेटर में एविऐशन सेक्टर की चिंता का सबसे बड़ा कारण एटीएफ की कीमतों में हुआ तेज इजाफा बताया गया है, जो हालिया हफ्तों में 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से अधिक हो गई है. भारत के विमानन उद्योग ने जेट फ्यूल के दाम में तेजी से फ्लाइट्स ऑपरेशंस पर दबाव और लागत में बड़ा इजाफा होने की बात कहते हुए सरकार से तत्काल इस मामले में राहत देने की मांग की है. FIA ने इस बात पर फोकस किया कि एयरलाइंस ATF Price Hike के चलते संघर्ष का सामना कर रही हैं. खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर, जहां ईंधन की लागत अधिक है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के मुताबिक, ATF आमतौर पर एयरलाइन लागत का लगभग 30-40% होता है, अब बढ़कर परिचालन खर्च का 55-60% तक पहुंच गया है. इसके चलते कंपनियों के मुनाफे में भारी कमी आई है.
'एटीएफ पर हटे एक्साइज ड्यूटी'
विमान ईंधन की कीमतों में तेजी के चलते परिचालन जारी रखने के लिए जूझ रही कंपनियों की समस्या के समाधान के लिए एफआईए ने सरकार से एटीएफ पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाने की डिमांड की है. इसके साथ ही राज्य स्तर पर वैट (VAT) में कमी लाने के लिए दबाव डालने का आग्रह भी किया है, जो कि कुछ राज्यों में 25 फीसदी तक है.
US-Iran युद्ध से इस टेंशन का कनेक्शन
भारतीय एयरलाइंस कंपनियों की इस परेशानी का सीधा कनेक्शन अमेरिका-ईरान युद्ध से है. दरअसल इस तनाव के चलते होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की ग्लोबल कीमतों में तगड़ा इजाफा हुआ है. इसके अलावा Hormuz Strait से सप्लाई में रुकावट ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है.
हवाई सफर पड़ सकता है महंगा!
पत्र के जरिए सरकार को बताया गया कि हालात ये हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने वाले दिनों में भी एटीएफ प्राइस ऊंचे बने रहते हैं, जिससे लागत मुश्किल हो जाती है और फाइनेंशियल टेंशन बढ़ जाती है. एयरलाइंस के लिए इसका सीधा मतलब ईंधन के बिल में वृद्धि है.
उद्योग जगत ने ऐसी ही स्थिति बनी रहने पर चेतावनी दी है कि एयरलाइंस को क्षमता में कटौती करने, रूट्स चेंज और किराए में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. यानी हवाई किराया महंगा हो सकता है. क्योंकि ईंधन की बढ़ती लागत का असर समय के साथ टिकटों की कीमतों पर भी पड़ता है. एयरलाइंस उन मार्गों पर उड़ानों की संख्या भी कम कर सकती हैं, जिन पर फ्लाइट संचालन मुश्किल या महंगा हो रहा है.
अमित भारद्वाज