Iran War Impact: गोल्ड, सिल्वर, शेयर बाजार... ईरान युद्ध के बीच सबकुछ बदला, कल मार्केट खुलने पर क्या होगा?

US-Israel Vs Iran टेंशन का सीधा असर सोमवार को शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट से लेकर करेंसी मार्केट तक में ओपनिंग के साथ ही देखने को मिल सकता है. क्रूड ऑयल की कीमतों में भी तगड़ी बढ़ोतरी नजर आने की आशंका जताई जा रही है.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर. (Photo: Reuters) अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

अमेरिका-इजरायल के ईरान पर किए गए ताबड़तोड़ अटैक (US-Israel Strikes On Iran) ने फिर से ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है. मिडिल ईस्ट में बढ़े संघर्ष का सीधा असर सोमवार को वैश्विक बाजारों में देखने को मिलेगा. दरअसल, पहला और बड़ा असर तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में देखने को मिल सकता है, जो युद्ध की शुरुआत से पहले ही डर से उछलती हुई नजर आई थीं.

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ईरान प्रमुख तेल उत्पादक देश है और युद्ध के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट भी बंद होने की खबर है, जिससे ग्लोबल तेल आपूर्ति की 20% गुजरता है, ऐसे में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है. दूसरी ओर शेयर बाजारों में भी उथल-पुथल दिखेगी, तो सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि Global Tension के बीच निवेशक सुरक्षित ठिकाने तलाशने की फिराक में रहते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही बड़े इम्पैक्ट के बारे में विस्तार से...

पहला असर-  तेल की कीमतों में उछाल 
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कई व्यापारिक सूत्रों के बवाले से बताया गया है कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर अटैक और ईरानी पलटवार ने चिंता बढ़ाई है. इस युद्ध (US-Israel Iran War) के चलते कुछ प्रमुख तेल कंपनियों और शीर्ष व्यापारिक घरानों ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए कच्चे तेल और ईंधन की शिपमेंट निलंबित कर दी हैं. कैपिटल इकोनॉमिक्स के इकोनॉमिस्ट विलियम जैक्सन की मानें, तो अगर संघर्ष काबू में आता है, तो ब्रेंट क्रूड प्राइस करीब 80 डॉलर तक पहुंच सकता है, जो जून 2025 में ईरान में 12 दिनों के युद्ध के दौरान दर्ज किया गया हाई था.

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उन्होंने ये भी कहा कि तेल आपूर्ति को प्रभावित करने वाला ये संघर्ष लंबा चलता है, तो इससे ग्लोबल मार्केट में तेल आपूर्ति सीमित हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं. जैक्सन ने कहा कि Crude Oil Price करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जो बीते शुक्रवार को युद्ध की शुरुआत से पहले लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था.

दूसरा असर- शेयर बाजार में मचेगी हलचल
ईरान युद्ध का असर तेल की कीमतों के साथ ही दुनियाभर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है. जबकि ये पहले से ही ट्रंप के टैरिफ (Trump Tariff) और टेक शेयरों की भारी बिकवाली और इनके क्रैश (IT Share Crash) के चलते इस साल काफी उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं.

शेयर बाजारों में डर का पैमाना माने जाने वाले VIX अस्थिरता सूचकांक में इस वर्ष करीब 15% की वृद्धि हो चुकी है, जो इससे अमेरिकी बॉन्ड अस्थिरता का संकेत देता है. एशियाई बाजारों में भी सोमवार को ओपनिंग के साथ ही बड़ी हलचल नजर आ सकती है. खासतौर पर एविएशन सेक्टर और डिफेंस सेक्टर के स्टॉक्स पर असर दिख सकता है. 

तीसरा असर- करेंसी मार्केट में उथल-पुथल 
अमेरिका और इजरायल के कंबाइंड रूप से ईरान पर किए गए हमले और इसमें ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत से बढ़े संघर्ष के बीच विश्लेषकों का कहना है कि मुद्रा बाजार (Global Currency Market) भी इससे अछूते नहीं रहेंगे. CBA के डॉलर सूचकांक में गिरावट का आकार निर्भर करेगा कि संघर्ष कितना बड़ा और कितना लंबा चलने वाला है.

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अगर संघर्ष बढ़ता है और तेल सप्लाई बाधित होती है, तो जापानी येन और स्विस फ्रैंक को छोड़कर ज्यादातर मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में वृद्धि होगी. अमेरिका एनर्जी एक्सपोर्टर भी है, तो तेल आपूर्ति में रुकावट से तेल-गैस की ऊंची कीमतों (Oil Gas Price Hike) से उसे लाभ होगा. इजराइल का शेकेल पर भी असर दिखेगा.

चौथा असर- सोना-चांदी करेंगे अपना काम
दुनिया में ग्लोबल टेंशन बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तरह रुख करते हैं, तो इस समय भी हालात ऐसे ही नजर आ रहे हैं. निवेशक एक बार फिर सोने (Gold) की ओर रुख कर सकते हैं, जिसमें 2026 में अब तक हालिया गिरावट को छोड़कर कुल मिलाकर रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है. Gold Price अभी भी 22% की बढ़त में है. दूसरी ओर चांदी ने भी ताबड़तोड़ रिटर्न दिया है और निवेशक एक बार फिर Silver की ओर मुड़ सकते हैं.

इस संघर्ष से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की मांग में भी इजाफा हो सकता है, जिनकी यील्ड पिछले कुछ हफ्तों से गिर रही है. हालांकि, Bitcoin एक अपवाद रहा है, जिसे अब सुरक्षित निवेश ऑप्शन नहीं माना जाता. बीते दो महीनों में इसकी वैल्यू एक चौथाई से ज्यादा कम हो गई है. 

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