ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद अचानक शेयर बाजारों में हड़कंप मच गया, और फिर जैसे ही ईरान ने पलटवार किया माहौल और बिगड़ गया. ईरान-इजरायल के बीच तनाव युद्ध में बदल गया, अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई. जिसके बाद ईरान ने UAE, सउदी अरब में मौजूद अमेरिकी दूतावास और एयरबेस को निशाना बनाया.
ईरान ने तेल सप्लाई को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को बंद करने का ऐलान कर दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई, ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. कुल मिलाकर आर्थिक चुनौतियां बढ़ने लगीं, और इसका सीधा असर ग्लोबल शेयर बाजार पर पड़ने लगा. फिर लगातार 4 दिन तक बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली, निवेशकों में हाहाकार मच गया, सबके मन में यही सवाल कि ये युद्ध कब रुकेगा? क्योंकि हर दिन नुकसान बढ़ता जा रहा.
लेकिन बुधवार से ग्लोबल शेयर बाजारों के सेंटीमेंट सुधर रहे हैं, हालांकि अभी भी युद्ध जारी है, और इसी हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कम से कम 4-5 हफ्ते ये युद्ध चलेगा. लेकिन इस बीच युद्ध थमने या रुकने के चार संकेत मिल रहे हैं, ये भी कहा जाता है कि किसी भी खबर की भनक सबसे पहले बाजार को लगती है, तो क्या अगले कुछ दिनों में युद्ध रोकने के लिए बीच का रास्ता निकलने वाला है.
पहला संकेत: अचानक वैश्विक बाजार का मूड बुधवार से बदला नजर आ रहा है. आमतौर पर युद्ध या बड़े भू-राजनीतिक संकट के समय निवेशक जोखिम से बचने लगते हैं और शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिलती. शुरुआती 4 दिन ऐसा ही हुआ, लेकिन बुधवार से बाजारों में हरियाली लौटती नजर आ रही है. सबसे ज्यादा South Korea के शेयर बाजार में तेजी देखी गई, यहां 9-10 फीसदी की उछाल आई है. इसकी शुरुआत अमेरिकी शेयर बाजार से ही हुई, बुधवार को नैस्डेक में 1 फीसदी ज्यादा की तेजी रही, जापान और चीन के बाजार Yr पलटी मार चुके हैं. यानी युद्ध के खौफ बाजार धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है. भारतीय बाजारों में गुरुवार को शानदार तेजी रही. ऐसे में अगर युद्ध बहुत लंबा चलता तो बाजारों में इतना भरोसा नहीं दिखाई देता.
दूसरा संकेत: कच्चे तेल में उबाल भी अब ठंडा पड़ रहा है. ब्रेंट क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. एक समय भाव 85 डॉलर से ऊपर निकल गया था. बता दें, मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए वहां किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है. लेकिन मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ज्यादा उछाल नहीं दिखा रही हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार को बड़े पैमाने पर आपूर्ति बाधित होने का डर नहीं है और निवेशक मान रहे हैं कि स्थिति जल्द नियंत्रण में आ सकती है.
तीसरा संकेत: ईरान की ताकत कमजोर पड़ती जा रही है, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लंबे समय तक टकराव की स्थिति में ईरान के लिए हथियारों और संसाधनों की आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. खुद अमेरिका कह रहा है कि ईरान के पास मिसाइलें अब खत्म होने वाली हैं. अगर ऐसा होता है तो संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल हो सकता है.
चौथा संकेत: सोने-चांदी में मुनाफावसूली देखने मिल रहे हैं. युद्ध की स्थिति में हमेशा सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिलती है, लेकिन पिछले दो दिनों से सोने-चांदी के भाव में दबाव बढ़ता जा रहा है. यानी निवेशक इस युद्ध को लेकर अब बहुत ज्यादा सहमे हुए नहीं हैं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है, लेकिन कई वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े देश इस तनाव को जल्दी कम कराने की कोशिश करेंगे. कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता भी युद्ध को सीमित करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अक्सर भविष्य की आशंका को पहले ही भांप लेते हैं. अगर निवेशकों को लगता कि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहेगा, तो वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता. फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है, इसलिए कई विश्लेषक मानते हैं कि हालात धीरे-धीरे शांत हो सकते हैं. हालांकि पूरी तरह से यह कहना जल्दबाजी होगी कि युद्ध खत्म होने वाला है.
आजतक बिजनेस डेस्क