#प्रभुकीरेल: जानें, आपके परिवार के लिए कितना फायदेमंद है सुरेश प्रभु का दूसरा रेल बजट

रेल बजट के बाद देश के एक औसत परिवार पर कितना फर्क पड़ा है. बजट ने उनकी जरूरतों और अपेक्षाओं को कितना पूरा किया है. हमने एक छह सदस्यों वाले परिवार से इस बारे में जानने की कोशिश की.

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रेल में सफर करने वाले बुजुर्ग, युवा और महिलाओं ने बताई मन की बात रेल में सफर करने वाले बुजुर्ग, युवा और महिलाओं ने बताई मन की बात

केशव कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को अपना दूसरा रेल बजट पेश कर दिया. बजट के बाद देश के एक औसत परिवार पर कितना फर्क पड़ा है. बजट ने उनकी जरूरतों और अपेक्षाओं को कितना पूरा किया है. हमने एक छह सदस्यों वाले परिवार से इस बारे में जानने की कोशिश की. बजट भाषण सुन चुके परिवार ने इसके असर के बारे में हमें बताया. बजट का बड़ा असर खासकर रेल में सफर करने वाले बुजुर्ग, युवा और महिलाओं पर ही होता है.

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सीट और मेडिकल मदद से गदगद हैं बुजुर्ग
घर के बुजुर्ग ने बताया कि ट्रेन के बारे में हम तभी सोचते हैं, जब सफर करना हो. और पहली प्राथमिकता तो करना ही है. इसकी कीमत के बारे में हम सबसे पहले पता करते हैं. इस बजट में सवारी किराया नहीं बढ़ाए जाने की खबर तसल्ली देती है. स्वास्थ्य का मसला सबके लिए जरूरी है, लेकिन बुजुर्गों को इसका खास ख्याल रखना होता है. रेलवे को ट्वीट करने पर मेडिकल मदद मुहैया हो जाने की शुरुआत इस तबके को ढांढस दे रहा है. उन्होंने बताया कि हर ट्रेन में बुजुर्गों के लिए 120 होने की खबर सबसे ज्यादा खुश करने वाली है.

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टिकट कंफर्म के वादे पर जल्दी एतबार नहीं
दूसरी जरूरत काउंटर पर टिकट लेने, रिजर्वेशन कराने या ऑनलाइन बुकिंग को लेकर है. जिसने दिक्कतें झेली हैं, वही इसकी तकलीफ समझ सकता है. प्रभु ने वादा किया है कि साल 2020 तक हर यात्री को कंफर्म टिकट मिलने का इंतजाम कर दिया जाएगा. एक औसत परिवार इस वादे पर एतबार के अलावा और क्या कर सकता है. इस वादे का फौरी तौर पर तो कोई फायदा सामने नहीं दिखता. प्रभु ने बजट में को बढ़ाने की बात कही है.

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कामकाजी लोगों के लिए मदद और मौके
घर के युवा दंपति के मुताबिक सफर के रूट, ट्रेन की कनेक्टिविटी और सफर में लगनेवाला समय कामकाजी लोगों की अहम जरूरत होती है. इस लिहाज से प्रभु के बजट में कोई नया ऐलान नहीं किया गया है. पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 80 किलोमीटर किए जाने से छोटी दूरी के सफर में कम समय लगेगा. इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा. नकदी फसलों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ने की गुंजाइश रहती है. बनाने से कामकाजी लोगों को आसानी होगी. लोग काम करने के लिए इन इलाकों में जाने से कतराएंगे नहीं. रेलवे में निजी और बैंकिंग निवेश से रोजगार बढ़ने की गुंजाइश देखते हुए भी परिवार के युवा सदस्यों में उम्मीद जगी है.

महिला सुरक्षा पर हुई बेहतर कोशिशें
घर की महिला सदस्यों ने बताया कि हमारे देश और समाज में महिलाओं की सुरक्षा सबसे ऊपर है. इसके साथ कुछ भी समझौता किए जाने का सवाल नहीं उठता. उन्होंने बताया कि प्रभु की रेल बजट में इससे जुड़े ऐलानों से महिला यात्रियों में खुशी की लहर है. बजट में के लिए 24 घंटे चलने वाला हेल्‍पलाइन नंबर 182, बोगी के बीच में महिलाओं के रिजर्वेशन का इंतजाम और देश के 311 स्‍टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के ऐलान भरोसा दिलाने वाले हैं. इससे भी बड़ी बात सफर के लिए हर कैटेगरी में 30 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व किए जाने के ऐलान का महिलाओं ने स्वागत किया है. महिलाओं में इस बात की भी खुशी है कि सफर के दौरान छोटे बच्चों के लिए अलग से दूध और खाना मुहैया हो सकेगा.

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आम भारतीय परिवारों का बचेगा वक्त
पूरे परिवार को कई सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज करवाने और उसपर फौरन कार्रवाई होने के इंतजामों से राहत मिली है. इसके लिए 400 स्टेशनों पर फ्री वाई फाई भी लगाए जाएंगे. सफर का प्रोग्राम बदलने की सूरत में टिकट रद्द करवा सकने की व्यवस्था से परिवार खुश है. पहले इन औपचारिकताओं में काफी वक्त और संसाधन लग जाता था. सफर के दौरान अगर कहीं इंतजार के हालात बने तो रिटायरिंग रूम की बुकिंग भी ऑनलाइन हो सकेगी. परिवार के साथ सफर करने वाले कामकाजी युवाओं को इससे काफी मदद मिलने की बात कही जा रही है.

पूरी होगी एसी में यात्रा की मुराद
इसके अलावा जनरल बोगी में भी मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, बोगी में पैसे देकर बिस्‍तर खरीद सकने की सुविधा, लंबी दूरी के लिए अनारक्षित अंत्‍योदय एक्‍सप्रेस चलाने का ऐलान, यात्रियों को टिकट में ही वैकल्पिक बीमा योजना वगैरह के ऐलान ने ऐसे परिवारों के मन में सुरक्षित सफर की उम्मीदें जगाई हैं. एसी में यात्रा की मुराद पूरी करने के लिए 130 किमी की रफ्तार वाली हमसफर का भी परिवार के स्तर पर स्वागत किया गया.

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