बिहार में दो दशकों तक की राजनीतिक पारी खेलने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली की सियासत में किस्मत आजमाने के लिए लौट आए हैं. नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद पद की शुक्रवार को शपथ ले ली है इसके साथ ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं और उनकी सियासत 360 डिग्री पर घूम गई है. ऐसे में नीतीश कुमार ने जहां से निकलकर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और अब 21 साल बाद फिर से वहीं पर लौट आए हैं?
नीतीश कुमार ने गुरुवार दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'मैंने बिहार में बहुत काम किया है. अब मुझे लगा कि मुझे यहां (दिल्ली) में रहना चाहिए. राज्यसभा में सांसद बन गया हूं. तीन-चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा और नए लोगों को मुख्यमंत्री व मंत्री बनाया जाएगा.'
बिहार की सियासत साल 2005 से ही नीतीश कुमार का इर्द-गिर्द सिमटी रही है. नीतीश कुमार ने 2005 में लोकसभा सदस्य रहते बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, लेकिन अब 21 साल के बाद सीएम रहते हुए नीतीश कुमार ने राज्यसभा में वापसी की है. ऐसे में सवाल उठता है कि पटना से दिल्ली वापस लौटे नीतीश कुमार का क्या रोल होगा?
नीतीश के नाम चारों सदन के सदस्य का रिकार्ड
नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जो संसदीय राजनीति में चारो सदन के सदस्य. बिहार विधानमंडल के दोनों सदन का सदस्य नीतीश रहे हैं और अब संसद के दोनों सदन का सदस्य रहने की उनकी ख्वाहिश पूरी हो गई है. लोकसभा के सदस्य नीतीश कुमार चार बार रह चुके हैं और अब राजसभा सदस्य बनने की अधूरी इच्छा भी पूरी हो रही है.
मुख्यमंत्री नीतीश के चारों सदन की इच्छा दो दशक तक सीएम रहने के बाद पूरी हो रही है. इस तरह नीतीश कुमार ने एक समय सांसदी छोड़कर मुख्यमंत्री बने थे और अब सीएम की कुर्सी छोड़कर सांसदीय करने के लिए दिल्ली लौटे हैं. अब संसद के उच्च सदन के सदस्य बन गए हैं.
सांसद रहते नीतीश कुमार दो बार सीएम बने
नीतीश कुमार अपने राजनीतिक करियर में 1989 से लेकर 2005 तक लगातार लोकसभा के सांसद रहे. इस दौरान नीतीश कुमार दो बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. सांसद रहते हुए नीतीश कुमार सबसे पहले साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के चलते सात दिन के बाद सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था. नीतीश कुमार संसद के सदस्य बने रहे. इसके बाद दोबारा सीएम बनने का मौका साल 2005 में बना.
2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार चौथी बार सांसद चुने गए थे.एक साल के बाद 2005 में दो बार बिहार विधानसभा चुनाव हुए. पहली बार किसी दल को बहुमत नहीं मिल सका था. इसके बाद दोबारा अक्तूबर 2005 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें एनडीए को बहुमत मिला तो सत्ता का ताज नीतीश कुमार के सिर सजा. लोकसभा के सांसद रहते हुए नीतीश कुमार ने दूसरी बार से 24 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
सीएम की कुर्सी छोड़कर क्या करेंगे नीतीश
बिहार की सियासत 2005 से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी रही. कुछ समय छोड़कर नीतीश कुमार 2005 से लेकर अभी तक मुख्यमंत्री हैं, लेकिन अब राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं. हालांकि, नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वे अगले पांच वर्षों तक सीएम शायद ही रह पाएं, लेकिन इसे विराम कब देंगे, इसके बारे में कोई तिथि तय नहीं की गई थी. यह तिथि इतनी करीब होगी, इसका अनुमान नहीं था.
नीतीश के मुताबिक, राज्यसभा में जाने की उनकी इच्छा थी. यह वादा भी किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका सहयोग जारी रहेगा। विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा. अब बताया जा रहा है कि राज्यसभा जाने का निर्णय नीतीश कुमार का अपपना था, लेकिन यह बात नीतीश के समर्थक को हजम नहीं हो रही है. जेडीयू के नेता और कार्यकर्ता जगह-जगह सड़क पर उतर गए और विरोध प्रदर्शन किया.
नीतीश की सियासत 21 साल फिर पलटी मारी
नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज आपातकाल के दौर में शुरू किया, लेकिन उन्हें सफलता 1985 के चुनाव में मिली. 1985 में विधायक बने और दो साल बाद युवा लोकदल के अध्यक्ष और फिर जनता दल के महासचिव. 1989 से पहली बार लोकसभा सांसद बने और केन्द्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई.
वर्ष 1991 में नीतीश कुमार दोबारा लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना किया था. 1996 में वे लोकसभा के लिए चुने गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया. वे लगातार वर्ष 1989 से लेकर 2004 तक बाढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने.
1990 में वीपी सिंह की सरकार में पहली बार केंद्रीय मंत्रीमंडल में बतौर कृषि राज्यमंत्री शामिल हुए थे. इसके बाद 2001 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर रेल मंत्रालय रहे. इसके बाद 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया, उसके बाद से विधान परिषद के सदस्य बने. इस तरह अभी तक बिहार के विधान परिषद के सदस्य रहे और मुख्यमंत्री बनते रहे.
साल 2013 में बीजेपी न नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री को चेहरा घोषित किया था तब नीतीश कुमार ने NDA का साथ छोड़ दिया था, लेकिन 2017 में दोबारा से फिर एनडीए के साथ आ गए. इसके बाद 2022 में फिर एनडीए से अलग हुए, लेकिन 2024 में दोबारा वापसी कर गए.
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिली तो नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के सीएम बने, लेकिन अब चार महीने के बाद सीएम पद से मोहभंग हो गया है और फिर से सांसदी करने के लिए राज्यसभा का रास्ता अपनाया है. इस तरह नीतीश कुमार ने जहां से आकर बिहार की सत्ता अपने हाथ में ली थी और अब फिर से वहीं लौट आए हैं.
दिल्ली में नीतीश कुमार का क्या रोल होगा
नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बन गए हैं, लेकिन दिल्ली की सियासत में उनका रोल क्या होगा, ये बड़ा सवाल है. नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से एक दो दिन में इस्तीफा दे देंगे. ऐसे मेंनीतीश कुमार का बयान है कि उन्होंने 20 साल तक बिहार में काम कर लिया है और अब वे कुछ दिन दिल्ली में भी काम करना चाहते हैं. इस तरह से नरेंद्र मोदी सरकार में क्या केंद्रीय मंत्री बनेंगे या फिर कोई दूसरा रोल अदा करेंगे, ये सवाल सभी के मन में है.
माना जा रहा है कि राज्यसभा में अपनी भूमिका के साथ नीतीश कुमार NDA गठबंधन के भीतर एक अनुभवी नेता के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में अहम रोल अदा कर सकते हैं. ऐसे में उन्हें एनडीए का संयोजक भी बनाया जा सकता है, जैसे पहले बीजेपी अपने किसी सहयोगी दल के नेता के बनाती रही है.
कुबूल अहमद