मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के सियासी पिच को छोड़कर केंद्र की राजनीति में वापसी करने के लिए अपने कदम बढ़ा दिए हैं. नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बनने जा रहे हैं, लेकिन जेडीयू नेताओं को उनका दिल्ली जाना पसंद नहीं आ रहा है. ऐसे में नीतीश ने अपने बेटे निशांत कुमार की सियासी एंट्री भी करा दी है, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से पहले बिहार की यात्रा पर निकल रहे. अब सवाल उठता है कि नीतीश यात्रा के जरिए डैमेज कन्ट्रोल करना चाहते हैं या फिर अपनी सियासी ताकत दिखाने की रणनीति है?
नीतीश कुमार मंगलवार को सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए 'समृद्धि यात्रा' और प्रगति यात्रा' पर निकलेंगे. यात्रा के दौरान तीन दिनों तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मधेपुरा में प्रवास करेंगे. मधेपुरा को सियासी केंद्र बनाकर कोसी और सीमांचल क्षेत्र में विकास योजनाओं को समझने के साथ ही सियासी माहौल की भी थाह लेंगे.
बिहार की सत्ता की कमान को दो दशक तक संभालने के बाद नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है, लेकिन बिहार की सरकार को मार्ग दर्शन करते रहेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार भले ही राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी पकड़ को बनाए रखना चाहते हैं. यही वजह है कि दिल्ली कूच से पहले बिहार के दौरा शुरू कर रहे हैं.
नीतीश का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा
नीतीश कुमार मंगलवार को एक बार फिर से समृद्धि यात्रा और प्रगति यात्रा पर निकलेंगे. इस यात्रा के दौरान उनका मुख्य पड़ाव मधेपुरा होगा, जहां वे तीन दिनों तक प्रवास करेंगे. इस यात्रा वो दौरान सबसे पहले मधेपुरा में नवनिर्मित पुलिस लाइन का लोकार्पण करेंगे और उसके बाद किशनगंज का प्लान है. नीतीश अपनी इस सघन यात्रा के दौरान सीएम नीतीश कुमार सीमांचल के छह प्रमुख जिलों मधेपुरा, किशनगंज, अररिया, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा के साथ खगड़िया का भी दौरा करेंगे.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को किशनगंज और अररिया जिले में प्रगति यात्रा के तहत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे जबकि गुरुवार को कटिहार और पूर्णिया में उनके कार्यक्रम निर्धारित हैं.शुक्रवार को मधेपुरा से सहरसा और खगड़िया के लिए रवाना होंगे. मुख्यमंत्री की इस यात्रा का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को देखना और जनता से सीधे संवाद करना है.
डैमेज कंट्रोल या फिर ताकत दिखाने का प्लान
नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे पर निकल रहे, जिसका उद्देश्य माना जा रहा है कि सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया तो जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह बात हजम नहीं हुई. ऐसे में जेडीयू के नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया. शुक्रवार को नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की बैठक ली, जिसमें तमाम नेताओं ने उनके राज्यसभा जाने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की और दुखी हो गए.
नीतीश कुमार अपनी पार्टी के अंदर उठ रहे विरोध को देखते हुए भी यात्रा पर निकल रहे हैं, जिसके जरिए बताना चाहते हैं कि राज्यसभा जाने का उनका अपना फैसला है, लेकिन बिहार की राजनीति पर पूरी नजर रखेंगे. इस तरह जेडीयू नेताओं की नाराजगी का डैमेज कन्ट्रोल करने का भी दांव माना जा रहा है तो दूसरी एक तबका है, जो यह कह रहा है कि इस यात्रा के बहाने नीतीश कुमार अपनी सियासी ताकत को दिखाना चाहते हैं.
नीतीश बिहार यात्रा के जरिए राजनीति में आना न केवल जेडीयू के भविष्य को नई दिशा देगा, बल्कि बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों में अपनी पकड़ को बनाए रखना चाहते हैं. इसीलिए लगातार कह रहे हैं कि नए मुख्यमंत्री उनके मार्गदर्शन में काम करेंगे और पूरी नजर उनकी सरकार पर होगी?
कुबूल अहमद