बिहार में सत्ता परिवर्तन की इबारत लिख दी गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने का फैसला किया है. इस बात को उन्होंने खुद ऐलान कर दिया है, जिसके बाद बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम होगा, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी के किस नेता के सिर सत्ता का ताज सजेगा?
बीजेपी हमेशा अपने फैसलों से राजनीतिक पंडितों को हैरान करती रही है, लेकिन बिहार की मौजूदा परिस्थितियों में कई बड़े नेताओं के नाम सीएम पद की रेस में चल रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पटना पहुंचे हैं. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के दौरान अमित शाह मौजूद रहेंगे.
बिहार में एनडीए सरकार के अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए कि नीतीश कुमार अब पटना से दिल्ली जाने का फैसला कर लिया है तो बिहार में पावर ट्रांसफर भी तय है. नीतीश की जगह पर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और उपमुख्यमंत्री किसे बनाया जाएगा. ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में बने हुए हैं.
सीएम की रेस में बीजेपी के कौन नेता?
बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए दिलीप जायसवाल, सम्राट चौधरी, संजीव चौरसिया और केंद्रीय नित्यानंद राय के नाम की चर्चा हो रही है. इसके अलावा भी कई अन्य नाम के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन बिहार के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा.
एनडीए के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि अगर मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाता है तो पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी। फिलहाल कई नामों पर मंथन चल रहा है, लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा हैय
सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे मजबूत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी ओबीसी वर्ग के कुशवाहा समाज से आते हैं और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है.
पिछले दो सालों में सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ सरकार में काम करने का अनुभव भी हासिल किया है, जिसके कारण उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है. भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत नेता माना जाता है.
CM रेस में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय
बीजेपी में मुख्यमंभी के लिए दूसरा प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है. नित्यानंद राय ओबीसी के यादव समाज से आते हैं और पिछले छह वर्षों से केंद्र में गृहमंत्री अमित शाह के जूनियर मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं.
माना जा रहा है कि अगर भाजपा किसी 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर राजद के सबसे बड़े वोट बैंक यादव समाज को बड़ा संदेश देना चाहे, तो नित्यानंद राय एक रणनीतिक विकल्प हो सकते हैं.
बिहार की राजनीति में यादव वोट बैंक पर परंपरागत रूप से लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव दबदबा 1990 के बाद से ही बना हुआ है। ऐसे में भाजपा अगर यादव समुदाय से मुख्यमंत्री बनाती है, तो यह विपक्ष के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति भी हो सकती है.
सीएम की दौड़ में दिलीप जायसवाल
सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के बाद बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल का नाम भी चर्चा में है. दिलीप जायसवाल ओबीसी वैश्य समुदाय से आते हैं और बीजेपी अगर किसी ओबीसी को नहीं चुनकर इबीसी नेता पर दावा लगाना चाहती है दिलीप जायसवाल एक विकल्प हो सकते हैं.
दिलीप जायसवाल वैश्य (कलवार) समाज से आते हैं और सीमांचल के किशनगंज क्षेत्र से उनका मजबूत राजनीतिक आधार है. पार्टी के अंदर उन्हें सौम्य और संतुलित स्वभाव का नेता माना जाता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल दौरे पर किशनगंज जब भी जाते हैं, तो अक्सर दिलीप जायसवाल के मेडिकल कॉलेज में ही ठहरते हैं। इससे उनकी केंद्रीय नेतृत्व से नजदीकी का अनुमान लगाया जा सकता है.
संजीव चौरसिया को बनाएगी सीएम
बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने की रेस में पटना की दीघा विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी सामने आ रहा है. संजीव चौरसिया ओबीसी समाज के तहत आने वाली तमोली जाति से आते हैं और उन्हें पटना क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक पकड़ वाला नेता माना जाता है.
संजीय चौरसिया लंबे समय से विधायक रहने के कारण उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी हासिल है. संजीव चौरसिया के पिता गंगा प्रसाद भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और पूर्व में सिक्किम के गवर्नर भी रह चुके हैं.
रोहित कुमार सिंह