नीतीश के जाते और BJP के सीएम बनने के साथ तेजस्वी एक्टिव, आरजेडी का समझें प्लान

बिहार में सत्ता नेतृत्व का परिवर्तन हो चुका है. नीतीश कुमार की जगह पर सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही आरजेडी नेता तेजस्वी यादव फुल फार्म में नजर आ रहे हैं. बीजेपी को सियासी कठघरे में खड़ा करके तेजस्वी अपनी खोई भी सियासी जमीन को दोबारा से पाना चाहते हैं?

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बिहार की सियासत में सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही तेजस्वी यादव आक्रामक (Photo-ITG AI) बिहार की सियासत में सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही तेजस्वी यादव आक्रामक (Photo-ITG AI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली मात के बाद साइलेंट मोड में चल रहे आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ता बदलते ही एक्टिव हो गए हैं. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के हाथों में सत्ता की कमान आते ही तेजस्वी यादव फिर से फ्रंटफुट पर उतर गए हैं. ऐसे में सूबे का राजनीतिक तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया है. 

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बीजेपी के फायरब्रैंड नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही बिहार की राजनीति गर्मा गई है. तेजस्वी यादव अब फिर से बिहार में आक्रामक तरीके से आरपार के मूड में नजर आ रहे हैं. तेजस्वी के 'बदले' सियासी तेवर के सियासी मायने को भी समझा जा सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी वापसी की संभावना दिख रही है. 

बिहार राजभवन में सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण होते और बीजेपी का पहली बार मुख्यमंत्री बनते ही, तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया कि वह अब खामोश नहीं बैठेंगे. बीजेपी के खिलाफ हर मोर्चे पर सड़क से सदन तक लड़ते नजर आएंगे. यही वजह है कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक से लेकर नीतीश कुमार के ट्रिपल-सी मुद्दे पर बीजेपी को घेरते तेजस्वी दिखे. 

तेजस्वी ने सम्राट को सेलेक्टेड सीएम बताया

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर बधाई देते हुए सियासी तंज कसा. उन्होंने लिखा, "सम्राट चौधरी द्वारा आज 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई तथा 𝐒𝐞𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं.

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तेजस्वी यादव ने कहा कि आशा है कि नए माननीय मुख्यमंत्री इस कड़वे, अप्रिय एवं कठोर तथ्य से पूर्ण रूप से अवगत होंगे कि 𝟐𝟏 वर्षों के 𝐍𝐃𝐀 शासन उपरांत भी नीति आयोग के अधिकांश मानकों, सत्तत विकास के सभी सूचकांकों सहित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, ध्वस्त विधि व्यवस्था, आय-निवेश, खर्च-खपत, नौकरी-रोजगार, गरीबी-पलायन, एक समान प्रगति-एकरूप संवृद्धि तथा मानव विकास के तमाम संकेतकों में बिहार राष्ट्रीय औसत से अत्यधिक कम और बहुत पीछे है. 

बिहार में फिर तेजस्वी की आक्रमक स्टाइल 
बिहार के इतिहास में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. नीतीश कुमार के सत्ता से हटते ही और सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही तेजस्वी यादव ने फ्रंटफुट पर उतरकर पटना से लेकर दिल्ली तक संदेश भेज दिया है, 'नीतीश कुमार तो बस एक मोहरा थे, उनकी असली लड़ाई अब शुरू हुई है.' तेजस्वी ने अपने आरजेडी नेताओं-कार्यकर्ता को सड़क पर उतरकर बीजेपी के खिलाफ संघर्ष करने का सियासी संदेश भी भेज दिया है. इसकी शुरुआत उन्होंने खुद बीजेपी को घेरने से शुरू कर दी है. 

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तेजस्वी यादव की सीधी चुनौती तेजस्वी यादव ने कहा कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन तो गए हैं लेकिन उनके समझ में महिला आरक्षण बिल आया ही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर ये लोग परिसीमन करना चाह रहे थे. तेजस्वी यादव ने कहा कि सम्राट चौधरी से पूछिए. आगामी 3 साल पहले ही बिल पास हो गया था तो राष्ट्रपति जी से साइन क्यों नहीं करवाया गया. इसे लागू क्यों नहीं किया गया.

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तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी और उनकी सरकार खुद कोई निर्णय नहीं लेती. उन्होंने कहा कि ये लोग वही करेंगे जो गुजराती भाई कहेंगे. अब तो इनको चलाने के लिए दिल्ली से पीएमओ के लोग आ रहे हैं. तेजस्वी यादव ने दावा किया कि अब इनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी वही बनेंगे जो पीएमओ से आएंगे और वही 2 लोग जो चाहेंगे वही होगा. इसके अलावा तेजस्वी ने आरक्षण का मुद्दा भी उठाया. 

तेजस्वी यादव ने याद दिलाया कि नीतीश कुमार कहते थे कि ट्रिपल सी से समझौता नहीं करेंगे और निशांत कुमार भी कल तक कह रहे थे कि ट्रिपल सी से कोई समझौता नहीं होगा. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नीतीश जी के ट्रिपल सी से समझौता किया तभी तो क्राइम पूरे देश में, खासकर बिहार में सबसे ज्यादा है. इस तरह तेजस्वी ने आक्रमक तरीके से बीजेपी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. 

सम्राट चौधरी के उदय और तेजस्वी की चुनौती
बीजेपी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ा दांव खेला है. सम्राट न केवल ओबीसी (कुशवाहा) समाज का बड़ा चेहरा हैं, बल्कि वह लालू परिवार के सबसे प्रखर आलोचक भी रहे हैं. सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना तेजस्वी के लिए सीधी चुनौती मानी जा रही है. अब मुकाबला सिर्फ विचारधारा का नहीं, बल्कि वोट बैंक और युवाओं के बीच लोकप्रियता का भी है.

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राजनीतिक विश्लेषक भी कहते हैं कि तेजस्वी यादव जानते हैं कि अब बिहार की राजनीति में घर बैठने का वक्त नहीं बल्कि सड़क पर उतरकर संघर्ष करने का है. घर बैठे रहे और अगर सम्राट चौधरी ने सरकार में रहते हुए लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण को साध लिया, तो आरजेडी के लिए आगे की राह मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. इसीलिए तेजस्वी एक्टिव हो गए हैं. तेजस्वी यादव की सक्रियता के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है.

तेजस्वी अब पूरा फोकस बिहार पर केंद्रित कर रखना चाहते हैं. इसीलिए बार-बार दोहरा रहे हैं कि नीतीश अब 'अप्रासंगिक' हो चुके हैं और भाजपा के हाथों की कठपुतली बन गए हैं, सम्राट चौधरी भी एक मोहरा है. इसका सीधा फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना चाहते हैं. कोर वोट बैंक को एकजुट करना सत्ता जाने के बाद अक्सर कार्यकर्ताओं में निराशा आती है. तेजस्वी के तेवर आरजेडी कैडर में नई जान फूंक दी है. वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका वोट बैंक टूटे नहीं, बल्कि और अधिक गोलबंद हो जाए. 

क्या बदल जाएगा बिहार का चुनावी गणित?
तेजस्वी यादव को लगता है कि नीतीश कुमार के दिल्ली राजनीति में जाने से बिहार में जेडीयू के वोटबैंक के बीच सेंधमारी आसानी से कर सकते हैं. बिहार की राजनीति अब द्विध्रुवीय होती दिख रही है. एक तरफ भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए है, एक तरफ सम्राट चौधरी का चेहरा है, तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव का आक्रमक चेहरा. बीजेपी के सीएम बनने के बाद तेजस्वी को लगता है कि जेडीयू के वोटबैंक को अपने साथ जोड़ लेंगे. इसीलिए बार-बार सामाजिक न्याय के मुद्दे को उठा रहे हैं और सम्राट चौधरी बीजेपी और संघ की कठपुत्ली बताने में जुटे हैं. 

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हालांकि, असली परीक्षा अभी बाकी हैतेजस्वी यादव की सक्रियता ने यह तय कर दिया है कि सम्राट चौधरी के लिए डगर आसान नहीं होने वाली है. बिहार में सदन से लेकर सड़क तक, तेजस्वी एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. उनके लिए यह केवल सत्ता गंवाने का दुख नहीं, बल्कि अपने खिसके हुए जनाधार को दोबारा से जोड़ने की है. ऐसे में सवाल उठता है कि तेजस्वी के एक्टिव होने से क्या आरजेडी दोबारा से वापसी कर पाएगी और सम्राट चौधरी के खिलाफ माहौल बना सकेंगे? 

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