जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह को मिला इनाम, विधानसभा समिति में 2 बाहुबली विधायकों की एंट्री

बिहार विधानसभा समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया गया है. राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वाले विपक्ष के विधायकों को इनाम मिला है तो जेडीयू के बाहुबली विधायकों को भी तरजीह दी गई है. जेल से बाहर आए अनंत सिंह को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.

Advertisement
बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को मिला इनाम (Photo-ANI) बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को मिला इनाम (Photo-ANI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:49 AM IST

बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह जेल से बाहर आ चुके हैं और सियासत में फिर से पूरी तरह एक्टिव हैं. दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत मिलते बाहर आते ही अनंत सिंह ने सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और ऐलान कर दिया है कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. नीतीश के प्रति अपनी वफादारी पेश करने के दो दिन बाद अनंत सिंह को बड़ा इनाम मिला है. 

Advertisement

मंगलवार को बिहार विधानसभा की 19 समितियों का गठन किया गया, जिसमें कई चौकाने वाले नाम हैं. राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वाले कांग्रेस और आरजेडी विधायकों के अलावा दो बाहुबली विधायकों को भी एंट्री दी है.

मोकामा से जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को विधानसभा समिति में सदस्य बनाया गया है तो बाहुबली विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमिल सिंह को चेयरमैन बनाया है. विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की सूची जारी की गई है. 

विधानसभा समिति में दो बाहुबली विधायक की एंट्री
बिहार विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 19 समितियों का गठन कर दिया गया है. बाहुबली विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को विधानसभा की पर्यटन उद्योग से संबंधित कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है, तो मोकामा विधायक अनंत कुमार सिंह को पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण समिति में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है.  अनंत सिंह जिस कमेटी में सदस्य हैं, उस समिति के चेयरमैन अवधेश सिंह हैं. 

Advertisement

धूमल सिंह और अनंत सिंह दोनों ही बाहुबली नेता माने जाते हैं, जिनके खिलाफ कई बड़े मामले दर्ज हैं. जेडीयू के टिकट पर विधायक चुने गए हैं और अब उन्हें विधानसभा समिति में शामिल किया गया है. धुमिल सिंह को जिस समीति का अध्यक्ष बनाया गया है, उसमें विधायक सुनील सिंह पिंटू और अनिल सिंह को सदस्य नियुक्त किया है. 

राज्यसभा में वोटिंग से दूर रहने वालों को मिला इनाम
बिहार में हाल ही में पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव में विपक्ष के तीन विधायकों की गैर-मौजूदगी ने सारा गेम बदल दिया था. वोटिंग से दूर रहने वाले कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह और आरजेडी एमएलए फैसल रहमान को भी एक-एक कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. 

मनोहर प्रसाद को प्रत्यायुक्त विधान समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जिनके साथ विधायक आबिदुर रहमान और मुरारी मोहन झा को सदस्य बनाया है. आरजेडी के फैसल रहमान को गैर सरकारी विधेयक एवं संकल्प समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जिनके साथ विधायक सुरेंद्र कुमार और अजय कुमार को सदस्य नियुक्त किया है. 

विधानसभा समिति का गठन को राज्य की राजनीति में संतुलन साधने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है. कांग्रेस और आरजेडी विधायक को जगह देने के  इससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए सभी पक्षों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है.

Advertisement

एक साल के लिए गठित की गई समिति
विधानसभा की ये समितियां अगले एक वर्ष तक विधानसभा की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से संचालित करने में अहम भूमिका निभाएंगी. इन सभी समितियों का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक निर्धारित किया गया है. इस दौरान समितियां विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगी और सरकार को आवश्यक सुझाव भी देंगी.

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद इन तमाम समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों की आधिकारिक लिस्ट जारी कर दी गई है यह गठन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए किया गया है और इनका कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक रहेगा. 

विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण नियम समिति की अध्यक्षता खुद स्पीकर प्रेम कुमार करेंगे। इस समिति में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी को सदस्य बनाया गया है. इसके अलावा सामान्य प्रयोजन समिति का गठन भी इन्हीं नेताओं के साथ किया गया है, जिसमें स्पीकर चेयरमैन और अन्य तीनों नेता सदस्य के रूप में शामिल हैं.

सियासी संतुलन और संदेश की सियासत
राजनीति के जानकारों के अनुसार, इस बार विधानसभा समितियों के गठन में सत्ता और विपक्ष दोनों को साधने की कोशिश की गई है. विधानसभा अध्यक्ष भले ही समिति का गठन करता हो, लेकिन उसके पीछे सरकार की स्टैटेजी होती है. विभिन्न दलों के विधायकों को जिम्मेदारी देकर यह संदेश देने की कोशिश है कि विधानसभा की कार्यवाही में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. प्रेम कुमार की अगुवाई में गठित ये समितियां आने वाले एक साल में विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की निगरानी करेंगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »