दिल्ली से पटना… नाम सुनते ही दिमाग में क्या आता है. लंबा सफर, ट्रकों की लाइन, थकान और 'कितना और बाकी है' वाला सवाल. देश की राजधानी से बिहार की राजधानी तक का ये सफर हमेशा से ही काफी लंबा रहा है. अब तक सड़क मार्ग से दिल्ली-पटना की दूरी तय करने के लिए ज्यादातर लोग वाया लखनऊ जाते रहे हैं. लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश में एक नए एक्सप्रेसवे के लॉन्चिंग को लेकर हलचल मची हुई है. नाम है गंगा एक्सप्रेसवे. ये एक ऐसा एक्सप्रेसवे, जो सिर्फ सड़क नहीं बल्कि स्पीड, कनेक्टिविटी और समय की नई परिभाषा लिखने जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. अब गंगा एक्सप्रेसवे के लॉन्चिंग के बीच एक और चर्चा जोर पकड़ रही है कि, क्या इस नई सड़क से पुरानी दिल्ली और पटना के बीच की दूरियां कम होंगी? या फिर अब तक लगने वाला आधे दिन से ज्यादा का वक्त... क्या कम हो पाएगा? कुल मिलाकर सवाल ये है कि, क्या गंगा एक्सप्रेसवे से पटना सच में दिल्ली के 'नजदीक' आ जाएगा. अपने इस लेख में हम इसी की पड़ताल लेकर आए हैं. लेकिन इसके लिए पूरी कहानी समझनी जरूरी है.
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडिस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA), द्वारा डेवलप किया गया गंगा एक्सप्रेसवे यूपी का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे है. यह करीब 594 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को सीधा जोड़ेगा. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी है. यह सीधे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है, यानी दिल्ली और एनसीआर से गाड़ी उठाइए और बिना शहर के ट्रैफिक में फंसे सीधे हाईस्पीड कॉरिडोर पर चढ़ जाइए.
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ दूरी कम नहीं करता, यह यात्रा का अनुभव भी बदलता है. इस हाईवे पर 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड रखी गई है. हर कुछ किलोमीटर पर इंटरचेंज बनाए गए हैं ताकि लोग आसानी से चढ़-उतर सकें. इसके अलावा यहां हाईटेक टोल सिस्टम होगा, जिससे रुकने की जरूरत कम पड़ेगी.
सुविधाओं की बात करें तो यह एक्सप्रेसवे किसी एयरपोर्ट कॉरिडोर से कम नहीं होगा. यहां फूड प्लाजा, पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, शौचालय, कैफेटेरिया, डॉरमेट्री और होटल जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसके साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए अलर्ट स्ट्रिप्स और लगातार निगरानी की व्यवस्था भी होगी, ताकि दुर्घटनाओं को कम किया जा सके.
टोल प्लाजा की बात करें तो मेरठ और प्रयागराज के पास बड़े टोल प्लाजा बनाए गए हैं और बीच-बीच में छोटे टोल प्वाइंट्स भी होंगे. हालांकि टोल दरें अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई हैं, लेकिन अनुमान है कि यह देश के अन्य एक्सप्रेसवे की तरह प्रति किलोमीटर के हिसाब से होगी. अब लागत की बात. इस मेगा प्रोजेक्ट पर करीब 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है, जिसमें जमीन अधिग्रहण की लागत भी शामिल है. गंगा एक्सप्रेसवे सही मायनों में पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से सीधे तौर पर जोड़ रहा है.
दिल्ली से गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए आपको मेरठ के बिजौली गांव तक जाना होगा. अलग-अलग रूट से दिल्ली से यहां तक की दूरी लगभग 80-90 किमी की है, जो करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकती है. नोएडा सेक्टर 15 या फिल्म सिटी की तरफ से जाने वालों को सेक्टर 62 होते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पकड़ना होगा. इस रूट से 82 किमी की दूरी तकरीबन 1 घंटा 30 मिनट में पूरी होगी. वहीं इंडिया गेट की तरफ से आने पर मेरठ एक्सप्रेसवे, NH 9 और NH 34 होते हुए, गंगा एक्सप्रेसवे के बिजौली एंट्री प्वाइंट की दूरी करीब 88 किलोमीटर पड़ेगी. ये करीब डेढ़ घंटे की यात्रा है.
अभी ज्यादातर लोग सड़क से दिल्ली से पटना तक का सफर यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए करते हैं. एक्सप्रेस वे उतरने के बाद लखनऊ का आउटर रिंग रोड, चांद सराय होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक ले जाता है. आगे की यात्रा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते बलिया जिले के 'चाक गिर्धारिया' इलाके तक की जाती है. वहां से गाजीपुर-बलिया नेशनल हाईवे से आगे बढ़ते हुए ये सफर गंगा के किनारे-किनारे बक्सर-भरौली पुल से 'बिहार' में दाखिल होता है. इसके बाद पटना-बक्सर-आरा नेशनल हाईवे आपको बिहार की राजधानी पहुंचाता है. तकरीबन 1060 किलोमीटर की ये पूरी यात्रा 15 घंटे (बिना रुके) में पूरी होती है.
अगर आप गंगा एक्सप्रेसवे से पटना जाने की तैयारी में हैं तो पहले आपको दिल्ली से मेरठ (बिलौजी) एंट्री प्वाइंट पहुंचना होगा. इसके बाद मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा (594 किमी) एक्सप्रेसवे के जरिए करनी होगी. यह एक्सप्रेसवे आपको प्रयागराज के जुदापुर डांडू गांव के पास पहुंचाएगा, जहां से आगे बढ़ने के दो रास्ते हैं— एक है पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जो लगभग 454 किमी (9 घंटे) लंबा है. दूसरा होगा NH19 जो 400 किमी (7 घंटे 30 मिनट) लंबा है.
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाने के लिए आपको सुल्तानपुर के दोस्तपुर तक जाना होगा, जो यूपी में आजमगढ़ और बिहार में बक्सर-आरा होते हुए आपको पटना पहुंचाएगा. वहीं दूसरा रूट आगे चलकर दिल्ली-कोलकाता हाईवे से आरा होते हुए पटना ले जाएगा.
दिल्ली-पटना, वाया गंगा एक्सप्रेसवे
| दिल्ली - मेरठ | 78 किमी | 1 घंटा 30 मिनट |
| मेरठ - प्रयागराज | 594 किमी | 6 घंटा (वाया गंगा एक्सप्रेसवे) |
| प्रयागराज - पटना | 400 किमी | 7 घंटा 30 मिनट |
| टोटल | 1072 किमी | 15 घंटा (लगभग) |
कुल मिलाकर मौजूदा रूट और गंगा एक्सप्रेसवे दोनों से दिल्ली-पटना की यात्रा लगभग 15 घंटे में पूरी होगी. वहीं गंगा एक्सप्रेसवे से आप करीब 1072 किलोमीटर तक की यात्रा करेंगे. हालांकि गंगा एक्सप्रेसवे भविष्य में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगे प्रस्तावित लिंक रोड्स के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा तक पहुंच बनाने की तैयारी में है. मतलब साफ है कि दिल्ली से चलकर यह रास्ता सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे पटना तक यात्रा को तेज और आसान बना सकता है.
अश्विन सत्यदेव