मालेगांव ब्लास्ट की जांच-
2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में शब-ए-बारात के दौरान दो ब्लास्ट हुए जिसमें 37 लोग मारे गए और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इनमें से अधिकतर मुस्लिम थे. 2007 से 2008 के दौरान समझौता एक्सप्रेस, हैदराबाद मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में (2008) एक बार फिर इसी तरह के धमाके हुए.
ATS चीफ करकरे को मालेगांव ब्लास्ट 2008 मामले की जांच सौंपी गई. करकरे ने ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकल बरामद कर ली. यह साध्वी सिंह ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी. करकरे की जांच से पुलिस हिंदुत्व प्लॉट की तरफ आगे बढ़ी. जल्द ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट एसके पुरोहित को मुख्य आरोपी बनाया गया, उनकी गिरफ्तारी हुई और चार्जशीट दाखिल की गई. करकरे के नेतृत्व वाली एटीएस ने 4500 पेज की चार्जशीट में सारा विवरण दिया और हिंदुत्ववादी संगठन अभिनव भारत संघ को हमले के लिए जिम्मेदार बताया.
उनकी चार्जशीट को लेकर कई सवाल खड़े हुए. जांच के दौरान उन पर आरोपियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगा. उन पर यह भी आरोप लगा कि साध्वी प्रज्ञा सहित तमाम आरोपियों को एक साजिश के तहत फंसाया गया.
2011 में इस मामले की जांच एटीएस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी. मगर 2016 में जब एनआईए ने अपनी पहली फाइनल चार्जशीट कोर्ट में दायर की तो उसमें साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दे दी थी.