नॉर्दर्न लाइट्स
नॉर्दर्न लाइट्स (Northern Lights) या ऑरोरा पोलारिस (Aurora Polaris), पृथ्वी के आकाश में एक प्राकृतिक प्रकाश प्रदर्शन है, जो मुख्य रूप से उच्च अक्षांश क्षेत्रों (High-Latitude Regions) (आर्कटिक और अंटार्कटिक के आसपास के क्षेत्र) के वायुमंडल के ऊपरी भाग में दिखाई देती है. नॉर्दर्न लाइट्स शानदार रोशनी के गतिशील पैटर्न प्रदर्शित करते हैं जो पूरे आकाश को कवर करने वाले पर्दे, किरणों, सर्पिल या गतिशील झिलमिलाहट के रूप में दिखाई देते हैं (Northern Lights Display).
सौर हवा के कारण मैग्नेटोस्फीयर (Magnetosphere) उनत्पन्न होता जिसके वजह से यह लाइट्स दिखाई देती है. कोरोनल होल (Coronal Holes) और कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejection) से सौर हवा की गति में वृद्धि होती है, जो मैग्नेटोस्फेरिक प्लाज्मा में आवेशित कणों के प्रक्षेपवक्र को बदल देती है. ये कण, मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन (Electrons) और प्रोटॉन (Protons) होते जो ऊपरी वायुमंडल (thermosphere/exosphere) में शामिल हो जाते हैं. ये कण, मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन (Electrons) और प्रोटॉन (Protons) होते जो ऊपरी वायुमंडल (thermosphere/exosphere) में शामिल हो जाते हैं. वायुमंडलीय घटकों के परिणामस्वरूप आयोनाइजेशन (आयनीकरण) और एक्साइटेशन (उत्तेजना) अलग-अलग रंग और रोशनी का उत्सर्जन करती है. दोनों ध्रुवीय क्षेत्रों के चारों ओर बैंड के भीतर होने वाले ऑरोरा का रूप, अवक्षेपण कणों को दिए गए त्वरण की मात्रा पर भी निर्भर करता है.
सौर मंडल (Solar System) के अधिकांश ग्रह और कुछ प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellites), भूरे रंग के बौने (Brown Dwarfs) और यहां तक कि धूमकेतु (Comets) भी नॉर्दर्न लाइट्स की मेजबानी करते हैं.
प्राचीन रोमवासियों और यूनानियों को इन घटनाओं का ज्ञान था और उन्होंने इन दृश्यों का बेहद रोचक और विस्तृत वर्णन किया है (History).
लद्दाख के हानले में 19-20 जनवरी की रात आसमान लाल हो गया. ये सौर तूफान की वजह से हुआ. यह भारत के सैटेलाइट्स, पावर ग्रिड, GPS और डिजिटल सिस्टम के लिए खतरा है। Aditya-L1 से चेतावनी मिल सकती है, लेकिन तैयारी जरूरी है. इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता.
Ladakh Hanle में दिखा red sky और aurora, वजह बना powerful solar storm. Experts के मुताबिक इससे satellites, GPS, power grid और digital systems को खतरा. जानें Aditya-L1 की चेतावनी और India पर असर.
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