गरमी की मार सिर्फ भारत में ही नहीं झेलनी पड़ती है, बल्कि दुनिया के कई देश इससे खासे परेशान रहते हैं. अभी फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत यूरोप के कई शहर उबल रहे हैं और तापमान 40 के पार जा रहा है. यही हाल जापान की राजधानी टोक्यो का भी है जहां अगले साल इसी जुलाई में खेलों के महाकुंभ ओलंपिक का आयोजन होना है.
अगले साल यानी 2020 में ओलंपिक गेम्स (24 जुलाई से 9 अगस्त) टोक्यो में आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इस साल जुलाई में जिस हिसाब से गरमी पड़ रही है उससे माना जा रहा है कि अगले साल भी यह महीना गरमी के लिहाज से न सिर्फ मेजबानों बल्कि मेहमानों को भी खूब रुलाएगा. एक साल आगे के मौसम के बारे में भविष्यवाणी करना असंभव है, लेकिन जिस तरह का ट्रेंड पिछले कुछ सालों का रहा है उससे लगता है कि अगले साल की जुलाई में भी काफी गरमी पड़ने वाली है.
जापान में पिछले साल जुलाई बना हिंसक
पिछले साल (2018) जुलाई में गरमी ने जापान में अपना रौद्र रुप दिखाया और इसे हाल के सालों में सबसे खतरनाक (मौत के लिहाज से) महीना करार दिया गया. पिछले साल जुलाई में 300 से ज्यादा लोगों की मौत गरमी और मौसम संबंधी कई कारणों से हो गई थी. तब तापमान में रिकॉर्ड 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की वृद्धि हुई थी.
बढ़ती गरमी और लू लगने के कारण पिछले साल पूरे जापान में 54 हजार से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिसमें अकेले राजधानी टोक्यों से 4430 लोग शामिल थे.
एथलीट होंगे ज्यादा परेशान
जापान में गरमी लगातार बढ़ती जा रही है. 1980 के दशक में वहां का तापमान 28-29 डिग्री सेल्सियस रहा करता था जो अब बढ़कर 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है और हो सकता है कि अगले साल इसमें और बढ़ोतरी हो जाए.
गरमी और बढ़े तापमान में एथलीटों के लिए ट्रैक पर दौड़ना बेहद दुष्कर होता है, खासकर मैराथन जैसी लंबी दूरी के रेस हों या ट्रेथालन. इसके अलावा रेल वॉकिंग और सेलिंग जैसे खेल भी गरमी में एथलीटों को परेशान कर सकते हैं.
जुलाई नहीं अप्रैल में हो मैराथन मुकाबले
आयोजन के दौरान संभावित गरमी को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने आयोजकों के समक्ष यह प्रस्ताव भी रख दिया है कि मैराथन जैसे फील्ड मुकाबलों को जुलाई-अगस्त में कराने के बजाए अप्रैल में कराया जाए और वह भी सुबह 6 बजे के करीब. साथ ही पुरुषों की 50 किलोमीटर रेस सुबह साढ़े 5 बजे शुरू कराए जाने की बात हो रही है.
स्वास्थ्य अधिकारियों को डर है कि गरमी में एथलीटों के दौड़ने से उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है. अगर उन्हें जुलाई-अगस्त में दौड़ना पड़ा तो प्रदर्शन पर असर पड़ेगा. अगले ओलंपिक में मैराथन के मुकाबले 2 अगस्त (महिला) और 9 अगस्त (पुरुष) को है. गरमी में खिलाड़ियों को मनमाफिक रिजल्ट हासिल करने में दिक्कत होगी.
मैराथन पर 9 साल का अध्ययन
2012 में एक फ्रेंच रिसर्चर्स ने 2001 से 2010 के बीच 1,791,972 मैराथन धावकों के परिणामों (रेस और हर साल के परिणाम) पर एक अध्ययन किया. इसके लिए उन्होंने 3 यूरोपियन (पेरिस, लंदन और बर्लिन) और 3 अमेरिकन (बॉस्टन, शिकागो और न्यूयॉर्क) शहरों में हुए मैराथन रेस का चुनाव किया. 60 रेसों के अलग-अलग पर्यावरण से जुड़े 4 बड़े फैक्टर्स (तापमान, नम्रता, ड्यू प्वाइंट और समुद्री स्तर पर वायुमंडलीय दबाव) भी शामिल किए गए. इसमें प्रदूषण के स्तर को भी रखा गया.

फ्रेंच रिसर्चर्स ने अपने अध्ययन में पाया कि मैराथन रेस के लिए पुरुष और महिला एथलीटों के आदर्श तापमान अलग-अलग हैं. महिलाओं के लिए 49.82 फारेहनाइट (9.9 सेल्सियस) और पुरुषों के लिए 42.8 फारेहनाइट (6 सेल्सियस) का तापमान लंबी रेस को पूरा करने के लिए सबसे बढ़िया होता है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि तापमान बढ़ने के कारण जहां स्पीड पर असर पड़ता है तो लोगों के रेस छोड़ने की दर भी बढ़ जाती है.

बढ़ती गरमी में स्पीड में कमी
इस अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि 29.44 डिग्री सेल्सियस के तापमान में महिला एथलीटों की स्पीड में 13.47 फीसदी और पुरुष एथलीटों की स्पीड में 6 फीसदी की कमी आई. वायु तापमान भी मैराथन रेस में बेहद मायने रखती है और उससे धावकों की स्पीड और स्टेमिना पर असर पड़ता है.
हालांकि टोक्यो प्रशासन भी इस दिशा में लगातार काम कर रहा है. टोक्यो मेट्रोपोलिशन गवर्नमेंट गरमी के असर को कम करने की कोशिशों में जुटी है. वह शहर के केंद्र में 136 किलोमीटर स्पेशल कोटिंग वाले सड़क बना रही है जिससे तापमान में कमी लाई जा सके.
अभी आयोजन में 1 साल का समय शेष है, लेकिन वहां पर वातावरण को ठंडा बनाए रखने के लिए 150 स्वयंसेवकों को बतौर ट्रायल पर रखा गया है. खिलाड़ियों को कूल रखने के लिए पंखे और तौलिए भी दिए जाने की व्यवस्था है.
एसी टेंट और पंखे का आयोजन
इसके अलावा इस साल गरमी में स्टेडियम या आयोजन स्थल के पास एसी टेंट, पंखे और फव्वारे लगाए जा रहे हैं जिससे खेल के दौरान दर्शकों के आने और भीड़ की वजह से बढ़े तापमान के अंतर को परखा जा सके. अगले साल होने वाले गेम्स के लिए अस्थायी एसी टेंट, पंखे, ठंडे फुहारों के अलावा खुले में होने वाले मुकाबलों के लिए मुफ्त में आइस क्यूब देने की व्यवस्था की जा रही है.
1964 के बाद टोक्यो पहली बार ओलंपिक गेम्स की मेजबानी करने जा रहा है. फिलहाल बारिश की वजह से भारत में अभी गरमी से थोड़ी निजात मिली हुई है, लेकिन दुनिया के कई देश इस समय भीषण गरमी का सामना कर रहे हैं जिसमें जापान भी शामिल है. ओलंपिक गेम्स शुरू होने से एक साल पहले से ही वहां गरमी को लेकर तैयारी शुरू की जा चुकी है. आयोजकों की कोशिश है कि इस आयोजन को बेहद शानदार और भव्य बनाया जाए. साथ ही विदेशी मेहमानों और खिलाड़ियों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़ा. आयोजक संभावित गरमी की हर स्थिति को टालने की कोशिश अभी से कर रहे हैं. अब देखना होगा कि अगले साल टोक्यो का तापमान क्या रहता है और आयोजक अपने मकसद में कितने कामयाब होते हैं. फिलहाल यह तय है कि खिलाड़ियों के साथ-साथ खेल प्रेमियों को गरमी का सामना करने के लिए तैयार होना पड़ेगा.