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क्रिकेट

बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल

बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल
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वर्ल्ड कप का मौसम है, लेकिन मौजूदा टूर्नामेंट में क्रिकेट के बदले महेंद्र सिंह धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं. धोनी के दस्तानों पर 'बलिदान बैज' के निशान ने वर्ल्ड कप टूर्नामेंट को नया मोड़ दे दिया, जिससे विवाद ने जन्म ले लिया है. एक तरफ धोनी हैं कि वह अपने ग्लव्स बदलने को तैयार नहीं हैं, जबकि आईसीसी (ICC) अपने रुख से पलटना नहीं चाह रही है. ऐसे में 'धोनी-आईसीसी' प्रकरण मौजूदा वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. धोनी की बात करें तो बलिदान बैज से उनको बहुत प्यार है. धोनी ग्लव्स पर ही नहीं बल्कि फोन पर भी इस चिह्न का इस्तेमाल करते हैं.
बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल
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बलिदान बैज का इस्तेमाल धोनी कैप पर भी करते हैं. बुधवार को साउथेम्प्टन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के पहले मैच के दौरान धोनी को बलिदान बैज के साथ विकेटकीपिंग करते देखा गया था. आईसीसी ने धोनी को अपने दस्ताने से यह निशान हटाने को कहा था. लेकिन धोनी ने अपने ग्लव्स से इस निशान को हटाने से मना कर दिया. 
बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल
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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों के कारण 2011 में प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी. धोनी यह सम्मान पाने वाले कपिल देव के बाद दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं.
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धोनी को मानद कमीशन दिया गया क्योंकि वह एक युवा आइकन हैं और वह युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. धोनी एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर हैं. उन्होंने पैरा बेसिक कोर्स किया है और पैराट्रूपर विंग्स पहनते हैं.
बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल
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महेंद्र सिंह धोनी ने प्रादेशिक सेना (टीए) की 106 पैराशूट रेजिमेंट में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में अपनी रैंक को साबित कर दिखाया है. धोनी अगस्त 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे.
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आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न (Para Wings insignia) लगाने की अर्हता प्राप्त कर ली थी. यानी इसी के साथ धोनी को इस बैज के इस्तेमाल की योग्यता हासिल हो गई.
बलिदान बैज से धोनी का प्यार: ग्लव्स ही नहीं इन चीजों पर भी करते हैं इस्तेमाल
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गौरतलब है कि तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद गए थे और एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक उतरे थे. नवंबर 2011 में धोनी को प्रादेशिक सेना (TA) में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से सम्मानित किया गया था. तब उन्होंने कहा था कि वह सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें क्रिकेटर बना दिया.
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