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किसी की जम्हाई देखकर आप क्यों लेते हैं उबासी, जानिए इसकी वजह

Why Do We Yawn? हम जम्हाई क्यों लेते हैं? क्यों किसी की उबासी को देखकर हम भी वैसा ही करने लगते हैं. क्या जम्हाई संक्रामक है. क्या ये इतनी तेजी से फैलती है. इसके पीछे की वजह क्या है. क्या इससे कोई फायदा है...या ये सिर्फ ऐसे ही होता है.

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Why Yawns Are Infectious: उबासी लेते देख आपको भी जम्हाई आने लगती है. (फोटोः सैंडर सैमी/अन्स्प्लैश)
Why Yawns Are Infectious: उबासी लेते देख आपको भी जम्हाई आने लगती है. (फोटोः सैंडर सैमी/अन्स्प्लैश)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जम्हाई के कई सारे फायदे भी
  • ज्यादातर जीव लेते हैं उबासी

आप किसी सार्वजनिक स्थान पर हों, वहां पर कोई इंसान जम्हाई ले ले बस. उसके बाद देखिए कैसे पूरा नजारा बदल जाता है. हर कोई जम्हाई लेना शुरु कर देता है. जम्हाई क्या संक्रामक होती है. ये किसी बीमारी से भी तेज फैलती है. आखिर ऐसा होता क्यों है? ये सिर्फ इंसानों में ही नहीं बल्कि ज्यादातर सामाजिक जीवों में देखने को मिलता है. एक ने उबासी ली कि तभी सभी उसके जैसे जीव यही काम शुरु कर देते हैं, ताकि उनके शरीर की अंदरूनी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके. 

स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क पॉलीटेक्नीक इंस्टीट्यूट के इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट एंड्र्यू गैलप ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि जम्हाई 40 करोड़ साल पहले जबड़े वाली मछलियों की उत्पत्ति के साथ ही शुरु हुई थी. एनिमल बिहेवियर नाम के जर्नल में गैलप ने अपनी एक रिपोर्ट प्रकाशित कराई है. जिसमें उन्होंने जम्हाई यानी उबासी की संक्रामकता के बारे में बताया है. साथ ही ये भी बताया है कि जम्हाई आना कैसे फायदेमंद है. यह हमें कैसे सुरक्षित रखती है. 

हर सामाजिक जीव एक दूसरे की जम्हाई देखकर खुद भी उबासी लेने लगता है. (फोटोः अन्स्प्लैश)
हर सामाजिक जीव एक दूसरे की जम्हाई देखकर खुद भी उबासी लेने लगता है. (फोटोः अन्स्प्लैश)

दूसरे को देखकर खुद को जम्हाई क्यों आती है?

जम्हाई हमारे दिमाग और शरीर के बीच होने वाली क्रियाशील प्रतिक्रिया (Reactive Activity) है. इसमें शरीर खुद को आराम देता है. यानी रिलैक्स कराता है. साथ ही जब हम दूसरों को जम्हाई लेते देखते हैं तो, दिमाग रिएक्टिव हो जाता है, वह शरीर को संदेश भेजता है और हम बरबस ही जम्हाई लेने लगते हैं. 

जम्हाई लेने की वैज्ञानिक वजह क्या है?

2014 में फिजियोलॉजी एंड बिहेवियर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जब हमारे शरीर का तापमान ज्यादा हो जाता है तब इसे ठंडा करने और तापमान का संतुलन बनाने के लिए जम्हाई आती है. इसके अलावा दिमाग के थक जाने पर, बोरियत होने पर, कार्बन डाईऑक्साइड के बाहर निकलने पर, नींद आने पर, नींद संबंधी बीमारियों, दवाओं के साइड इफेक्ट्स से या फिर डिप्रेशन की वजह से भी जम्हाई आती है. 

थकान, नींद आने पर, बोरियत होने पर और तापमान बढ़ने से जम्हाई आती है. (फोटोः आंद्रिया पियाक्वादियो/पेक्सेल)
थकान, नींद आने पर, बोरियत होने पर और तापमान बढ़ने से जम्हाई आती है. (फोटोः आंद्रिया पियाक्वादियो/पेक्सेल)

जम्हाई लेने से हमारे शरीर पर क्या असर होता है?

जम्हाई लेना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. यह कई तरह की वजहों से आती है. कई तरह के न्यूरोफिजियोलॉजिकल बदलावों का नतीजा होती है. अगर मौसम बदलता है तब भी ऐसा होता है. नींद आने पर या चलते-फिरते समय. असल में यह कॉर्टिकल एराउजल (Cortical Arousal) की वजह से होता है. यानी जम्हाई लेने से आप सतर्क भी होते हैं. यानी अलर्टनेस आती है. 

क्या सभी जानवर एक जैसे जम्हाई लेते हैं?

एंड्र्यू गैलप ने बताया कि 100 से ज्यादा स्तनधारी और पक्षियों की प्रजातियों की जम्हाई की स्टडी की गई है. जितनी शरीर की लंबाई होती है, उसी हिसाब से जीव जम्हाई लेते हैं. उतना ही जटिल उनका दिमाग होता है. कई बार अंदरूनी प्रक्रिया की वजह से जम्हाई आ जाती है. जम्हाई को देखकर या सुनकर भी लोगों को जम्हाई आने लगती है. यह ज्यादातर सामाजिक जीवों में होता है. 

बिल्लियों की तरह समुद्री जीव भी मुंह खोलकर जम्हाई लेते हैं. (फोटोः टिमोथी मीनबर्ग/अन्स्प्लैश)
बिल्लियों की तरह समुद्री जीव भी मुंह खोलकर जम्हाई लेते हैं. (फोटोः टिमोथी मीनबर्ग/अन्स्प्लैश)

जम्हाई लेने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा नहीं बढ़ती

बहुत लोगों का ऐसा मानना है कि जम्हाई लेने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है. ऐसा वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है. सांस लेना और जम्हाई लेना दोनों ही बेहद अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. समुद्री जीव भी जम्हाई लेते हैं, लेकिन उनके जम्हाई की प्रक्रिया ज्यादा रोचक और हैरान करने वाली होती है. क्योंकि ये पानी के अंदर होते हैं. ये मुंह खोलकर जम्हाई तो ले लेते हैं, लेकिन सांस नहीं ले पाते. उसके लिए गिल्स की जरूरत होती है. 

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