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धर्म

साफ दिल से इबादत का महीना है रमजान, आसमां से उतरी थी कुरान

साफ दिल से इबादत का महीना है रमजान, आसमां से उतरी थी कुरान
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इस्लाम में रमजान के महीने को सबसे पाक महीना माना जाता है. रमजान के महीने में कुरान नाजिल हुआ था. माना जाता है कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं. अल्लाह रोजेदार और इबादत करने वाले की दुआ कूबुल करता है और इस पवित्र महीने में गुनाहों से बख्शीश मिलती है.

साफ दिल से इबादत का महीना है रमजान, आसमां से उतरी थी कुरान
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मुसलमानों के लिए रमजान महीने की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इन्हीं दिनों पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जरिए अल्लाह की अहम किताब ‘कुरान शरीफ’ (नाजिल) जमीन पर उतरी थी. इसलिए मुसलमान ज्यादातर वक्त इबादत-तिलावत (नमाज पढ़ना और कुरान पढ़ने) में गुजारते हैं. मुसलमान रमजान के महीने में गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दान देते हैं.
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रोजा रखने के लिए सवेरे उठकर खाया जाता है इसे सेहरी कहते हैं. सेहरी के बाद से सूरज ढलने तक भूखे-प्यासे रहते हैं. सूरज ढलने से पहले कुछ खाने या पीने से रोजा टूट जाता है. रोजे के दौरान खाने-पीने के साथ गुस्सा करने और किसी का बुरा चाहने की भी मनाही है.
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साफ दिल से इबादत का महीना है रमजान, आसमां से उतरी थी कुरान
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शाम को सूरज ढलने पर आमतौर पर खजूर खाकर या पानी पीकर रोजा खोलते हैं. रोजा खोलने को इफ्तार कहते हैं. इफ्तार के वक्त सच्चे मन से जो दुआ मांगी जाती है वो कूबुल होती है.
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बता दें कि रमजान के महीने को और तीन हिस्सों में बांटा गया है. हर हिस्से में दस-दस दिन आते हैं. हर दस दिन के हिस्से को 'अशरा' कहते हैं जिसका मतलब अरबी में 10 है. इस तरह इसी महीने में आसमान से पूरी कुरान उतरी, जो इस्लाम की पाक किताब है.


साफ दिल से इबादत का महीना है रमजान, आसमां से उतरी थी कुरान
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ईद के चांद के साथ रमजान का अंत होता है. रमजान की खुशी में ईद मनाई जाती है. ईद का अर्थ ही 'खुशी का दिन' है. मुसलमानों के लिए ईद-उल-फित्र त्योहार अलग ही खुशी लेकर आता है. ईद के चांद के दर्शन के साथ हर तरफ रौनक हो जाती है.


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