त्याग और बलिदान का दूसरा नाम मां ही है. वही तो है जो दुनियाभर की परेशानियों को अपने आंचल के छोर में बांध लेती है ताकि उसके बच्चों को कोई तकलीफ न हो. सच कहूं मां बनने के बाद मां के लिए सम्मान और बढ़ गया. मां बनने की राह आसान नहीं होती. असली मुश्किलें तो मां बनने के बाद ही शुरू होती है. मुझे भी मां बनने के बाद ही एहसास हुआ कि मेरी मां ने कितनी तकलीफें उठायी होंगी.
गर्भ में पल रहा एहसास जब बाहों में आया तो जैसे दुनिया की सारी खुशियां मिल गईं. मेरी पूरी दुनिया हम दोनो में ही सिमट गई. तमाम तकलीफों के बाद भी उसकी एक झलक देखते ही सब खूबसूरत सा हो गया. उसे अपनी आंखों के सामने धीरे-धीरे बड़ा होते देखना एक अलग सी खुशी देता है. बच्चे के पीछे दौड़ते भागते कितनी बार ऐसा लगा कि अब बस...थकने लगी हूं पर मां हर बार तुम्हारा ख्याल आ जाता है और हौसला बढ़ जाता है.
लोरी सुनाना, सुलाना, प्यार से उठाकर उसे खिलाना, ये सब तुमने भी तो किया होगा मेरे लिए. तुमने भी तो सबकुछ अकेले ही संभाला होगा. घर-परिवार और हम भाई-बहनों को. तुम्हें देखकर कभी लगा ही नहीं कि तुम किसी परेशानी से गुजरी होगी. तुमने हमेशा मुझे सही और गलत का फर्क समझाया. दूर रहते हुए भी हमेशा मेरे लिए वक्त निकाला. आज एक मां बनने के बाद भी मैं तुम्हारे सामने खुद को बच्ची ही मानती हूं और तुमने भी मुझे बड़ा होने ही नहीं दिया.
मां बनने के बाद बहुत सी चीजें बदल गई हैं. यकीन करोगी मेरे अंदर पेशेंस आ गया है. आज मदर्स डे के दिन यही उम्मीद करती हूं कि तुम्हे देखकर मैने मां के जिस रूप को समझा है, वही रूप मैं मेरे बच्चे को दे सकूं. उसे वही प्यार और संस्कार दे सकूं जो तुमने मुझे दिया...