दो बार नर्मदा परिक्रमा करने वाले अमृतलाल वेगड़ का शुक्रवार सुबह जबलपुर में निधन हो गया. अमृतलाल वेगड़ ने 90 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. खराब स्वास्थ्य की वजह से वे पिछले कुछ समय से वेंटिलेटर पर थे.
अमृतलाल वेगड़ गुजराती तथा हिन्दी भाषा के विख्यात साहित्यकार साथ ही जाने-माने चित्रकार थे. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए उल्लेखनीय काम किया. वे गुजराती और हिंदी में साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए थे. अमृतलाल वेगड़ ने नर्मदा और सहायक नदियों की 4000 किलोमीटर से भी अधिक की पदयात्रा की.
उन्होंने नर्मदा पर चार किताबें लिखीं. जिनमें 'सौंदर्य की नदी नर्मदा' काफी प्रसिद्ध है. इसके अलावा 'अमृतस्य नर्मदा', 'तीरे-तीरे नर्मदा' और 'नर्मदा तुम कितनी सुंदर हो' भी प्रकाशित हुई थी.
अमृतलाल वेगड़ का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर में 3 अक्टूबर 1928 को हुआ था. उन्होंने 1948 से 1953 तक शांतिनिकेतन में आर्ट की पढ़ाई की.
अमृतलाल वेगड़ के निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया कि 'मां नर्मदा के जीवनदायनी असीमित स्वरूप को रंगों और शब्दों में अभिव्यक्त करने वाले मूर्धन्य साहित्यकार श्री अमृतलाल वेगड़ को श्रद्धांजलि. आपका जाना पर्यावरण, साहित्य और नर्मदा सेवकों सहित देश के लिए अपूरणीय क्षति है. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें.
मां नर्मदा के जीवनदायनी असीमित स्वरूप को रंगों और शब्दों में अभिव्यक्त करने वाले मूर्धन्य साहित्यकार श्री अमृतलाल वेगड़ को श्रद्धांजलि। आपका जाना पर्यावरण, साहित्य और नर्मदा सेवकों सहित देश के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। pic.twitter.com/iDU6z5A0oD
— ShivrajSingh Chouhan (@ChouhanShivraj) July 6, 2018
शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 'श्री वेगड़ ने 82 वर्ष की आयु तक नर्मदा व सहायक नदियों की 4 हजार किमी से भी अधिक की पदयात्रा की और "सौंदर्य की नदी नर्मदा" सहित वृत्तांत की उनकी तीन पुस्तकें हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला अंग्रेजी और संस्कृत में प्रकाशित हुई हैं. ये साहित्य ही नहीं, समाज की अमूल्य धरोहर हैं.