वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा में उलथ-पुथल मची हुई थी. पार्टी के वरिष्ठ नेता और 2009 में पार्टी के पीएम उम्मीदवार लाल कृष्ण आडवाणी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ दिया था और सुषमा स्वराज लोकसभा की अध्यक्ष बनाई गई थीं. इन सबमें लगभग एक साल बीत गया और उस समय आज के भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, दिल्ली के राजनीति से काफी दूर गुजरात के 50वीं स्थापना दिवस कार्यक्रम मनाने की तैयारी में जुटे थे.
दिल्ली से कुछ पत्रकार गुजरात के 50वें स्थापना दिवस कार्यक्रम की कवरेज के लिए गुजरात गए थे. मैं भी पत्रकार के नाते वहां मौजूद था. अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम के पत्रकार दीर्घा में मैं भी बैठा था. बगल वाले दीर्घा में अरुण जेटली बैठे दिखे. मैंने उन्हे मोबाइल पर कॉल किया. वो बोले कि अच्छा आप भी आए हैं और आसपास कौन-कौन पत्रकार बैठे हैं. मैंने उन्हें मेरे बगल में बैठे पत्रकार (अब राज्यसभा सांसद) स्वप्नदास गुप्ता के बारे में बताया. जेटली ने तुरंत ही कहा कि कार्यक्रम के बाद नीचे मिलें, साथ में खाना खाने चलते हैं.
कार्यक्रम के बाद मैं और स्वप्नदास गुप्ता उनसे मिले. उन्हीं की गाड़ी में बैठकर हम एक प्रसिद्ध गुजराती रेस्तरां में खाने गए. वहां बातचीत के दौरान जेटली ने अपने चिरपरिचित अंदाज में मुझसे पूछा कि ठाकुर साहब (मुझे वह इसी नाम से संबोधित करते थे) आज का ज्ञान क्या है. मैंने अपने अंदाज में उत्तर दिया, कि मोदीजी की हिंदी अच्छी है. वह जोर से हंसे फिर कहा कि, मतलब आपके मुताबिक मोदीजी ने दिल्ली आने की दस्तक दे दी है. मैंने कहा कि आप क्या सोचते हैं.
अरुण जेटली ने कहा कि ठाकुर साहब आप की बात कभी काटी है मैंने. बाद में कई मुद्दे पर चर्चा करने के बाद उन्होंने संकेत में ही यह बताया कि, सेकेंड जेनरेशन (वाजपेयी, आडवाणी, जोशी) को ही 2014 में भूमिका निभाना है और मोदीजी समकक्षों (राजनाथ, सुषमा, जेटली, वेंकैया) में प्रथम होने के प्रबल दावेदार हैं. अलबत्ता इससे पहले 2012 में गुजरात का विधानसभा चुनाव जीतना उनके लिए एक साधारण चुनौती है.