हिंदुस्तान की राजनीति के अरुण आज पंचतत्व में विलीन हो गए. रविवार को दोपहर तीन बजे दिल्ली के निगम बोध घाट में अरुण जेटली का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अंतिम दर्शन के लिए पक्ष और विपक्ष सभी पार्टी के नेता पहुंचे. आपको बता दें कि शनिवार को दिल्ली के एम्स में अरुण जेटली का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था.
जेटली के निधन से हर किसी की आंखे नम थीं, फिर चाहे उनके साथ राजनीति की लंबी पारी खेलने वाला कोई बीजेपी नेता रहा हो या फिर विपक्ष का कोई दिग्गज नेता. हिंदुस्तान की राजनीति में अरुण जेटली एक अद्भुत मिसाल थे. जनाधार के बिना भी राजनीति में अपरिहार्य रहने की मिसाल थे. वो बीजेपी की ऐसी जरूरत थे, जिसके बगैर न पार्टी चलती थी, न सरकार चलती थी, न शासन चलता था और न ही अनुशासन चलता था.
Delhi: Vice-President M Venkaiah Naidu, Defence Minister Rajnath Singh and Union Home Minister Amit Shah, at Nigambodh Ghat. #ArunJaitley pic.twitter.com/uaFwJYyVyX
— ANI (@ANI) August 25, 2019
ये एक अजीब विडंबना थी कि छात्र राजनीति से छलांग लगाने वाले अरुण जेटली को वोट-युद्ध कभी रास नहीं आया. लोकसभा चुनाव न जीत पाने के दर्द के साथ वो जिंदगी को अलविदा कह गए, लेकिन जेटली जेटली ही थे. एक अदद चुनाव जीतने की चुनौती से बेहद आगे. इतना आगे कि उनके बगैर बीजेपी की नीति-रणनीति बेमानी हो जाती थी.
जेटली के अंतिम संस्कार में ये दिग्गज हुए शामिल
जेटली के अंतिम संस्कार में बीजेपी से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा समेत अन्य शामिल हुए.
वहीं, कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया और कपिल सिब्बल समेत अन्य मौजूद रहे. इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी जेटली की अंतिम यात्रा में शामिल रहे.
जेटली की संजीवनी से आगे बढ़ती रही बीजेपी
अरुण जेटली बीजेपी के ऐसे दिग्गज नेता थे, जिनकी सोच और समझ की संजीवनी से बीजेपी फलती-फूलती और आगे बढ़ती रही. अरुण जेटली अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक एनडीए सरकारों के सूत्रधारों में से एक रहे. यहां विधि की विडंबना भी देखिए कि अपने अजीज के आखिरी दर्शन करने के लिए पीएम मोदी देश में मौजूद नहीं रह पाए. राजकीय और कूटनीतिक मजबूरियां आड़े आ गईं. मगर बीजेपी ने अरुण जेटली की अंतिम विदाई में जो सम्मान दिखाया, वो अभूतपूर्व था. ये भारत की लोकतांत्रिक राजनीति का रश्क करने वाला मानवीय चेहरा है, जहां संवेदनाओं पर सियासत हावी नहीं होती है.
बीजेपी के लिए मनहूसियत भरा रहा अगस्त का महीना
अगस्त की मनहूसियत का अंत ही नहीं हो रहा है और बीजेपी में शोक का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. एक दुख से पार्टी उबर भी नहीं पाती और दहलीज पर दूसरी दुखद खबर दस्तक दे देती है. इस महीने पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, फिर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और अब अरुण जेटली दुनिया को अलविदा कह गए.