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प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे प्रणब मुखर्जी

90 के दशक में भारतीय राजनीति के सबसे बड़े संकटमोचक प्रणब मुखर्जी भारत रत्न पाने वाले देश की ऐसी पांचवीं हस्ती हैं जो राष्ट्रपति रहे हैं. वह देश के 13वें राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल 2012 से 2017 तक था. उनका राजनीतिक करियर 5 दशक से भी ज्यादा रहा और इस दौरान वह लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे. करीब दो दशक तक वह कांग्रेस के सबसे बड़े संकटमोचक रहे. भारत रत्न से पहले वह 2008 में पद्म विभूषण से नवाजे गए.

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प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)
प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)

70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार की ओर से भारत रत्न का ऐलान कर दिया गया, जिसमें 3 दिग्गज हस्तियों प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को देश के सबसे बड़े सम्मान से नवाजे जाने का फैसला लिया गया. 50 साल से लंबे राजनीतिक करियर में कम से कम 2 मौकों पर प्रधानमंत्री बनने से चूकने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब को मोदी सरकार की ओर से भारत रत्न से नवाजे जाने का ऐलान सभी को चौंकाने वाला रहा.

प्रणब दा के राजनीतिक करियर पर डालते हैं एक नजर...

90 के दशक में भारतीय राजनीति के सबसे बड़े संकटमोचक प्रणब मुखर्जी भारत रत्न पाने वाले देश की ऐसी पांचवीं हस्ती हैं जो राष्ट्रपति रहे हैं. वह देश के 13वें राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल 2012 से 2017 तक था. उनका राजनीतिक करियर 5 दशक से भी ज्यादा रहा और इस दौरान वह लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे. करीब दो दशक तक वह कांग्रेस के सबसे बड़े संकटमोचक रहे. भारत रत्न से पहले वह 2008 में पद्म विभूषण से नवाजे गए.

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1969 में राजनीति में एंट्री

11 दिसंबर 1935 को वीरभूम जिले (पश्चिम बंगाल) के मिराती गांव में जन्मे प्रणब मुखर्जी की 1969 में राजनीति में उस समय एंट्री हुई जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाकर संसद में भेजा.

प्रणब दा जिस वीरभूम जिले में जन्मे वो बेहद खास है क्योंकि यहां से दो देशों के राष्ट्रपति संबंध रखते हैं. उनसे पहले यहां पर जन्मे अब्दुल सत्तर (दकर गांव में जन्मे) 1981 से 1982 तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे. लेकिन विभाजन के बाद अब्दुल सत्तर ढाका चले गए थे.

प्रणब के पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और आजादी की लड़ाई में वह 10 साल से भी अधिक जेल में रहे. उन्होंने 1920 से लेकर कांग्रेस की अगुवाई वाले चले कई आंदोलनों में हिस्सा लिया. वह अखिल भारतीय कांग्रेस समिति और पश्चिम बंगाल विधानपरिषद (1952-64) के सदस्य‍ और जिला कांग्रेस समिति, वीरभूम (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष रहे. उनकी पत्नी शुभ्रा मुखर्जी का निधन 2015 में हो गया.

1984 में बने बेस्ट FM

1969 में राजनीति में आने के बाद उनका कद तेजी बढ़ता चला गया और बहुत जल्द वह इंदिरा गांधी के करीबियों में शामिल हो गए. प्रणब केंद्र में लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री बने रहे. वह पहली बार 1973 में केंद्रीय मंत्री बनाए गए. लेकिन 1982 में इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में बतौर वित्त मंत्री उन्होंने जोरदार कामयाबी हासिल की. 1984 के सर्वे में उन्हें दुनिया के बेस्ट वित्त मंत्री करार दिया गया. वह 1980 से 1985 तक राज्यसभा के नेता भी रहे.

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रवीन्द्र संगीत के दीवाने प्रणब मुखर्जी 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में सबसे प्रबल दावेदार थे, लेकिन उनकी जगह अप्रत्याशित रूप से अनुभवहीन और उनके बेटे राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बना दिया गया, जिससे नाराज होकर प्रणब दा ने कांग्रेस छोड़ दिया और राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया. लेकिन 1989 में राजीव गांधी के साथ विवाद सुलझने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर लिया.

प्रणब दा बने मुख्य कर्ताधर्ता

1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद पीवी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्रीत्व काल में उनका कद बढ़ता चल गया. राव ने उन्हें 1991 में योजना आयोग का अध्यक्ष और 1995 में विदेश मंत्री बनाया. इस बीच सोनिया गांधी की राजनीति में एंट्री की तैयारी शुरू हो चुकी थी और उसके पीछे प्रणब दा को ही मुख्य कर्ताधर्ता माना जाता है.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) 2004 में केंद्र में सत्ता में आई तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बार फिर प्रणब मुखर्जी की जगह अनुभवहीन नेता मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया. हालांकि मनमोहन सरकार के कार्यकाल प्रणब की गिनती नंबर 2 की होती रही. इस दौरान उन्होंने कई (रक्षा (2004-06), विदेश (2006-09) और वित्त (2009-12) जैसे कई अहम मंत्रालय भी संभाला.

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जुलाई, 2012 में यूपीए की ओर से वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुने गए और जुलाई 2012 में उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया. बतौर राष्ट्रपति उन्होंने कई बड़े फैसले लिए. उन्होंने मौत की सजा पाए आतंकी अजमल कसाब, अफजल गुरु और याकूब मेमन समेत 24 लोगों की दया याचिका खारिज की थी. वह 2017 में इस पद से रिटायर हो गए.

राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद प्रणब अचानक उस समय सुर्खियों में आए जब पिछले साल वह 7 जून को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा के कार्यक्रम में शामिल होने पर कांग्रेस समेत कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

राजनीति के अलावा प्रणब दा को चाकलेट खाना खूब पसंद है. वह एक समय चाचा चौधरी की कॉमिक्स के फैन रहे. सुकांत भट्टाचार्य का लिखा और हेमंता मुखर्जी की आवाज में गाया 'अबक पृथ्बी' उनका पसंदीदा गीत है.

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