scorecardresearch
 

Explainer: जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को मिला अधिकार, प्रदेश से बाहर शादी करने पर पति भी बन सकेगा मूल निवासी

वे लोग जिन्होंने जम्मू-कश्मीर की महिला से विवाह किया है, वह भी इस केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय निवासी बनने के पात्र होंगे. इसके अलावा इस शादी से पैदा हुए बच्चे भी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निवासी माने जाएंगे.

श्रीनगर का डल झील (फोटो- पीटीआई) श्रीनगर का डल झील (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डोमिसाइल सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों में संशोधन
  • प्रदेश की महिलाओं के पति और बच्चे होंगे मूल निवासी
  • राज्य से बाहर शादी करने पर भेदभाव नहीं होगा

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रदेश की बेटियों के पक्ष में एक अहम निर्णय लिया है. अब जम्मू-कश्मीर की वैसी लड़कियां जो अपने प्रदेश से बाहर भारत के किसी दूसरे पुरुष से शादी करती हैं उनके पति और बच्चों को भी राज्य का मूल निवासी प्रमाण पत्र (Domicile certificate)दिया जाएगा. 

इसका ये मतलब हुआ कि वे लोग जिन्होंने जम्मू-कश्मीर की महिला से विवाह किया है, वह भी इस केंद्र शासित प्रदेश के स्थानीय निवासी बनने के पात्र होंगे. इसके अलावा इस शादी से पैदा हुए बच्चे भी जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निवासी माने जाएंगे. इससे पहले महिलाओं को ये अधिकार नहीं था. यानी कि ऐसे महिलाओं के पति राज्य के मूल निवासी नहीं माने जाते थे.

लैंगिक असमानता दूर करने की दिशा में अहम कदम

जम्मू कश्मीर में लैंगिक असमानता को दूर करने की दिशा में ये बड़ा कदम माना जा रहा है. बता दें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पुरुष अगर दूसरे राज्य की महिला से शादी करते थे तो उसके बच्चे राज्य के स्थायी निवासी माने जाते थे, लेकिन महिलाओं के साथ ऐसा नहीं थी. अब इसी में बदलाव किया गया है. 

इस बाबत जम्मू-कश्मीर सामान्य प्रशासन विभाग ने नई अधिसूचना जारी कर दी है. नई अधिसूचना में महिला पुरुष का जिक्र नहीं है. इसके अनुसार जम्मू कश्मीर के मूल निवासी के Spouse यानी कि पति या पत्नी को राज्य का मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा. 

डोमिसाइल सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के लिए पति या पत्नी का डोमिसाइल सर्टिफिकेट और शादी का वैध प्रमाण पत्र तहसीलदार के सामने प्रस्तुत करना पड़ेगा. 

Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 बना बदलाव का आधार

बता दें कि इससे पहले जम्मू कश्मीर का मूल निवासी बनने के लिए वहां 15 सालों तक रहना अनिवार्य था. बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट ने 2020 में Jammu and Kashmir (Adaptation of State Laws) सेकेंड ऑर्डर 2020 को मंजूरी दी थी. ये मंजूरी Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के तहत दी गई थी. इस के बाद ही मूल निवासी प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में बदलाव का रास्ता साफ हुआ. 

नौकरियों के होंगे मौके

मूल निवासी प्रमाण पत्र पाने के बाद ऐसे व्यक्ति के अधिकारों में कई गुना वृद्धि हो जाएगी. ऐसा शख्स जम्मू कश्मीर की सरकार नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेगा. इसके अलावा उसे राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का भी फायदा मिल सकेगा. 

बीजेपी ने किया स्वागत 

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा कि ये बेहद हास्यास्पद है कि कुछ अलगाववादी नेता जिन्होंने देश के बाहर से महलिाओं से शादियां की, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, उन्होंने उनके लिए यहां का मूल निवासी होने का अधिकार सुनिश्चित किया, लेकिन यहां की जिन बेटियों ने प्रदेश से बाहर शादियां की उनके सारे अधिकार जम्मू-कश्मीर में खत्म हो जाते थे. 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें