वर्ष 1984 दंगा मामले में सज्जन कुमार को बरी करने के खिलाफ आज सिख दंगा पीड़ितों का जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ. भारी तादाद में यहां सिख समुदाय के लोग अपना विरोध जताने के लिए इक्कठा हुए. दिल्ली कैंट सिख विरोधी दंगो में सज्जन कुमार के बरी होने पर सिख समुदाय के लोग काफी गुस्सें में है.
हाथो में पोस्टर और बैनर लिए इन लोगों ने जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए और सज्जन कुमार को फांसी देने की मांग की. इन्हें काबू करने के लिए काफी पुलिस भी राष्ट्रपति भवन के बाहर तैनात थी. कड़ी मशक्कत के बाद इनपर काबू पाया जा सका है. प्रदर्शनकारियों ने दो घंटे तक ट्रैफिक को रोके रखा, बाद में उन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर नजदीक पुलिस चौकी ले गए.
इससे पहले गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सोनिया गांधी के घर के बाहर भी विरोध-प्रदर्शन किया था. रविवार को भी पीएम आवास पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से मुठभेड हुई, जिसके बाद करीब 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया था.

सिखों का विरोध प्रदर्शन कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को बरी करने के बाद से ही चल रहा है. कड़कड़डूमा कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया था.
क्या है पूरा मामला
वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे फैले थे. इस दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर में 5 सिख केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी. इस दंगे की भेंट चढ़े केहर सिंह इस मामले की शिकायतकर्ता जगदीश कौर के पति थे, जबकि गुरप्रीत सिंह उनके बेटे थे. इस घटना में मारे गए अन्य सिख दूसरे गवाह जगशेर सिंह के भाई थे.

सीबीआई ने 2005 में जगदीश कौर की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश पर दिल्ली कैंट मामले में सज्जन कुमार, कैप्टन भागमल, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, गिरधारी लाल, कृष्ण खोखर और पूर्व पार्षद बलवंत खोखर के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसके बाद सीबीआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ 13 जनवरी 2010 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें से सज्जन कुमार को कोर्ट ने बरी किया जबकि बाकी पांचों लोगों को दोषी करार दिया गया है.