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लंदन कॉन्फिडेंशियल रिव्यू: ZEE5 की स्पाई थ्रिलर आपको आखिर तक बांधे रखेगी

Impact Feature

'लंदन कॉन्फिडेंशियल' एक स्पाई थ्रिलर है. इसमें एक्शन है, मर्डर है, फरेब है, गज़ब के ट्विस्ट्स हैं और ऐसा सस्पेंस है जो आपको अपने नाखून चबाने पर मजबूर कर देगा. लेकिन साथ ही ये एक मर्डर मिस्ट्री भी है.

मोउनि रॉय मोउनि रॉय

कुछ दिनों पहले जब ZEE5 की ओरिजिनल फिल्म 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' का ट्रेलर लॉन्च हुआ था, तब से दर्शक बेसब्री से इस फिल्म के रिलीज़ होने का इंतज़ार कर रहे थे. और क्यूँ ना करते? आखिरकर पेंडेमिक के दौरान शूट की गयी ये पहली फिल्म है. उस इंतज़ार की घड़ी अब ख़त्म हो चुकी है, क्यूंकि 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' अब ZEE5 पर स्ट्रीम की जा सकती है. रहस्य और रोमांच से भरपूर ये स्पाई-थ्रिलर एक बेहतरीन फिल्म है जो आपको आखिर तक अपनी कुर्सी से हिलने नहीं देगी.

 

क्या है 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' की कहानी?
कोविड-19 के बाद पूरी दुनिया में ऐसी अफवाहें सुनने में आ रही हैं कि उससे भी ज़्यादा खतरनाक एक वायरस भारत और चीन के बॉर्डर पर फ़ैल चुका है. इस सिलसिले में रॉ के अंडरकवर एजेंट बिरेन घोष (दिलजॉन सिंह) के हाथ एक ऐसा सबूत लग जाता है जिससे ये साबित होता है कि इस नए वायरस के पीछे भी चीन का हाथ है. बिरेन इस सबूत को लंदन में होने वाली एक कॉन्फरेंस में पेश करना चाहता है, ताकि चीन के नापाक इरादे दुनिया के सामने बेनक़ाब हो सकें. लेकिन कॉन्फरेंस से ठीक सात दिन पहले बिरेन लापता हो जाता है, और अगले दिन उसकी लाश थेम्स नदी में मिलती है. ज़ाहिर है कि चीनी इंटेलिजेंस एजेंसी MSS को बिरेन के मिशन की भनक लग गयी थी, जिसके चलते उन्होंने उसे अपने रास्ते से हटा दिया.

बिरेन की मौत के बाद इस मिशन पर तैनात बाकी रॉ एजेंट्स के सामने दो बड़े सवाल खड़े हो चुके हैं: बिरेन कॉन्फरेंस में कौन सा गवाह पेश करने वाला था? और उनके बीच कौन ऐसा गद्दार है जिसने मिशन की जानकारी चीनी इंटेलिजेंस को लीक करी है? इन दो सवालों के जवाब ढूंढने के लिए उनके पास हैं 6 दिन और सिर्फ एक सुराग: एक चीनी पेंटिंग जो बिरेन अपनी लीडर उमा (मोउनि रॉय) के लिए छोड़ कर गया है.


ZEE5 पर 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.
लेकिन हमारे एजेंट्स की परेशानियां यहीं ख़त्म नहीं होतीं. उन्हें नई दिल्ली से सख्त हिदायत मिली है कि ब्रिटिश इंटेलिजेंस को इस मिशन की ज़रा भी भनक ना लग पाए. इसका मतलब उमा और उनकी टीम को अपना मिशन बिलकुल गुप्त यानि कॉन्फिडेंशियल रखना है.
और फिर लंदन में शुरू होता है चूहे बिल्ली का ऐसा खेल जिसमें कोई भी शक के घेरे से बाहर नहीं है.


एक जासूसी थ्रिलर जो लीक से हट कर है
वैसे तो 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' एक स्पाई थ्रिलर है. इसमें एक्शन है, मर्डर है, फरेब है, गज़ब के ट्विस्ट्स हैं और ऐसा सस्पेंस है जो आपको अपने नाखून चबाने पर मजबूर कर देगा. लेकिन साथ ही ये एक मर्डर मिस्ट्री भी है. इस फिल्म को आप एक नारी-प्रधान फिल्म भी कह सकते हैं. उमा और एम्बेसडर निरुपमा (कुलराज रंधावा), दोनों ही मज़बूत किरदार हैं जो अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी जीते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अपनी निजी ज़िन्दगी में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कास्ट और अभिनय
टीवी पर कई हिट शोज में अपने अभिनय से दर्शकों को लुभाने वाली मोउनि रॉय अब फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ रही हैं. इससे पहले वो अक्षय कुमार के साथ 'गोल्ड' और राजकुमार राव के साथ 'मेड इन चाइना' जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम कर चुकी हैं. 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' उनकी पहली फिल्म है जो कि सीधे डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज़ की गयी है. एक रॉ ऑफ़िसर के किरदार में मोउनि खूब जंची हैं और उनकी परफॉरमेंस इस बात का प्रमाण है कि वो हर तरह के रोले करने में सक्षम हैं. फिल्म में उनका साथ दिया है पूरब कोहली ने, जो अपने सरल और नेचुरल अभिनय के लिए जाने जाते हैं. एक किराना की दुकान चलाने वाले अंडरकवर एजेंट के रोल में उन्होंने काफी प्रभावित किया है.


साथ ही 'बिग बॉस' फेम प्रवेश राणा ने फिल्म में आज़ाद नामक किरदार निभाया है, जो कि भारतीय दूतावास का एक कर्मचारी है और जिसका वैवाहिक जीवन एक कठिन दौर से गुज़र रहा है. प्रवेश ने अपने दमदार अभिनय से आज़ाद के किरदार में जान डाल दी है. वहीँ कुलराज रंधावा 'लंदन कॉन्फिडेंशियल' के ज़रिये पूरे 6 साल बाद फिल्मों में वापसी कर रही हैं. उनका कमबैक दर्शकों को काफी पसंद आएगा.


फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी शानदार है और कंवल सेठी के निर्देशन ने उसमें चार चाँद लगा दिए हैं. साथ ही सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग भी काबिल-ए-तारीफ है. दोनों ही चीज़ें फिल्म को और भी ज़्यादा मनोरंजक और रोमांचकारी बनाती हैं. कहने का मतलब ये है 87 मिनट की ये फिल्म आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देगी.
 

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