सीसामऊ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से एक है. यह कानपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. सीसामऊ निर्वाचन क्षेत्र में 20 नवंबर 2024 को उपचुनाव के लिए वोटिंग होगी और 23 नवंबर को रिजल्ट घोषित किया जाएगा.
यहां पिछले 28 सालों से कमल नहीं खिला है, यानी भाजपा की यहां जीत नहीं हुई है. आखिरी बार 1996 में यहां कमल खिला था, तब भाजपा के प्रत्याशी राकेश सोनकर जीते थे. वहीं, पिछले 3 चुनावों में लगातार सपा विधायक इरफान सोलंकी जीतते आ रहे थे.
सीसामऊ में कानपुर सदर तहसील के कानपुर नगर निगम में वार्ड संख्या 2, 4, 10, 13, 15, 16, 18, 28, 34, 39, 43, 46, 51, 57, 63, 64, 79, 88, 95, 98 और 110 शामिल हैं.
2022 यूपी विधानसभा चुनाव परिणाम
सपा के हाजी इरफान सोलंकी को 79,163 वोट मिले (जीते)
बीजेपी के सलिल विश्नोई को 66,897 वोट मिले
कांग्रेस के हाजी सुहेल अहमद को 5,616 वोट मिले थे.
Salil Vishnoi
BJP
Hajee Suhel Ahamad
INC
Rajnish Tiwari
BSP
Nota
NOTA
Sunil Babu
AAP
Alok Kumar
IND
Laddan
LD
Shrimati Madhuri
BAHP
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश बढ़ गई है. योगी मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए बीजेपी ने अपने सियासी समीकरण साधने में जुटी है तो सपा अपने ही नेताओं की गुटबाजी से परेशान है. असदुद्दीन ओवैसी को पहचानने से इनकार किए जाने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ AIMIM नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है.
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने योगी कैबिनेट का विस्तार करके अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने का दांव चला है. लेकिन, सवाल यही है कि 2024 में सपा के पीडीए फॉर्मूले ने बिगाड़ा बीजेपी का सियासी गेम कितना बना पाएंगे नए मंत्री?
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव अभी से ही सियासी बिसात बिछाने में जुटे हैं. सपा के समाजवाद पर इन दिनों अखिलेश हिंदुत्व का रंग चढ़ा रहे हैं ताकि बीजेपी धार्मिक ध्रुवीकरण करने में कामयाब न हो सके.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. चुनाव में सियासी मात खाने वाली ममता बनर्जी से मिलने के लिए अखिलेश यादव कोलकाता जा रहे हैं, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.
सुनील बंसल ने पश्चिम बंगाल का जिम्मा चार साल पहले संभाला था, जब बीजेपी की सत्ता में आने की दूर तक संभावना नहीं थी. बीजेपी के लिए मुश्किल लगने वाले काम को बंसल ने अपनी यूपी टीम के सहारे करके दिखाया. अब बंगाल को फतह करने के बाद सुनील बंसल को यूपी में फिर से लगाया जा सकता है, जहां पर 14 साल के सियासी वनवास को खत्म करने का काम किया था.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दिया है, क्योंकि अगले साल यूपी में चुनाव होने हैं. बीजेपी की कोशिश सत्ता की हैट्रिक लगाने की है तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने 10 साल के सियासी वनवास को खत्म करना चाहते हैं. ऐसे में बंगाल के नतीजे ने यूपी के राजनीतिक माहौल पर भी असर डाल दिया है?
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद अब भाजपा का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश पर टिक गया है. लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है और माना जा रहा है कि 8 मई के आसपास योगी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. इसमें जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी तैयारी है.
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी तापमान गर्म है. बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी में फिलहाल असहज महसूस कर रहे हैं, जिसके चलते उनके सपा की साइकिल पर सवारी करने की चर्चा हो रही है. अखिलेश यादव ने भी नरम रुख अपना रखा है.
यूपी के गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल नहीं लगेगा. करीब 15 दिन बाद टोल वसूली शुरू होगी. सरकार ने अलग-अलग वाहनों के लिए दरें तय कर दी हैं, अभी यात्रियों को फ्री सफर का मौका मिल रहा है.
उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव एक साल के बाद है, लेकिन अभी से ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. सड़क से सदन और सोशल मीडिया तक माहौल गर्म है. महिला आरक्षण के बहाने बीजेपी सपा को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुट गई है तो गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाकर दलित समाज को भी संदेश दे दिया है.