scorecardresearch
 

क्या है कोल्ड वॉर, US-चीन तनाव को लेकर हो रही जिसकी चर्चा, सालों बंटी रही दुनिया

कोल्ड वॉर अस्त्र-शस्त्रों का युद्ध न होकर धमकियों तक सीमित युद्ध है जिसमें परोक्ष रूप से दो विरोधी लड़ते हैं. शीत युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ एवं उसके आश्रित देशों (पूर्वी यूरोपीय देश) और संयुक्त राज्य अमेरिका एवं उसके सहयोगी देशों (पश्चिमी यूरोपीय देश) के बीच भू-राजनीतिक तनाव की अवधि (1945-1991) के दौरान हुआ.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

US-चीन तनाव के बीच शीत युद्ध की चर्चा हो रही है. कोल्ड वॉर के कारण 45 साल तक दुनिया दो गुटों में बंटी रही. बता दें कि कोल्ड वॉर अस्त्र-शस्त्रों का युद्ध न होकर धमकियों तक ही सीमित युद्ध है. इस युद्ध में कोई वास्तविक युद्ध जमीन पर नहीं लड़ा गया. इस युद्ध में दोनों महाशक्तियों ने अपने वैचारिक मतभेद ही प्रमुख रखे यह एक प्रकार का कूटनीतिक युद्ध था. शीत (Cold) शब्द का उपयोग पहली बार अंग्रेजी लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने 1945 में प्रकाशित अपने एक लेख में किया था.

शीत युद्ध एक ऐसा वाक युद्ध था जो कागज के गोलों, पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो और प्रचार साधनों तक ही लड़ा गया. इस युद्ध में न तो कोई गोली चली और न कोई घायल हुआ. दोनों महाशक्तियों ने अपना सर्वस्व कायम रखने के लिए विश्व के अधिकांश हिस्सों में परोक्ष युद्ध लड़े. युद्ध को शस्त्रयुद्ध में बदलने से रोकने के सभी उपायों का भी प्रयोग किया गया, यह केवल कूटनीतिक उपायों द्वारा लड़ा जाने वाला युद्ध था जिसमें दोनों महाशक्तियां एक दूसरे को नीचा दिखाने के सभी उपायों का सहारा लेती रही.

इस युद्ध का उद्देश्य अपने-अपने गुटों में मित्र राष्ट्रों को शामिल करके अपनी स्थिति मजबूत बनाना था, ताकि भविष्य में प्रत्येक अपने अपने विरोधी गुट की चालों को आसानी से काट सके। यह युद्ध द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के मध्य पैदा हुआ अविश्वास व शंका की अन्तिम परिणति था।

के.पी.एस. मैनन के अनुसार शीत युद्ध दो विरोधी विचारधाराओं पूंजीवाद और साम्राज्यवाद (Capitalism and Communism), दो व्यवस्थाओं बुर्जुआ लोकतन्त्र तथा सर्वहारा तानाशाही (Bourgeoise Democracy and Proletarian Dictatorship), दो गुटों - नाटो और वार्सा समझौता, दो राज्यों अमेरिका और सोवियत संघ तथा दो नेताओं - जॉन फॉस्टर इल्लास तथा स्टालिन के बीच युद्ध था जिसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ा.

शीत युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ एवं उसके आश्रित देशों (पूर्वी यूरोपीय देश) और संयुक्त राज्य अमेरिका एवं उसके सहयोगी देशों (पश्चिमी यूरोपीय देश) के बीच भू-राजनीतिक तनाव की अवधि (1945-1991) को कहा जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व दो महाशक्तियों सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्चस्व वाले दो शक्ति समूहों में विभाजित हो गया था. यह पूंजीवादी संयुक्त राज्य अमेरिका और साम्यवादी सोवियत संघ के बीच वैचारिक युद्ध था जिसमें दोनों महाशक्तियां अपने-अपने समूह के देशों के साथ संलग्न थीं.

शीतयुद्ध से जुड़े कुछ तथ्य

1. सोवियत संघ ने 24 जून 1948 से वेस्‍टर्न अलायज सेनाओं का रेलवे, सड़क और कनाल का रास्‍ता रोक दिया. इस वजह से वेस्‍टर्न नियंत्रण वाली बर्लिन तक पहुंच मुश्किल हो गई.

2. ये ब्‍लॉकेड खत्‍म हो गया जिससे शीत युद्ध की नींव पड़ी. हालांकि, डर के कारण उड़ानें जारी रहीं.

3. उस दौर में वेस्‍ट बर्लिनवासियों तक 8893 टन सप्‍लाई पहुंचाने के लिए हर साल दो लाख से ज्‍यादा उड़ाने भरी जाती थीं.

4. 30 साल तक बर्लिन की दीवार शीत युद्ध का प्रतीक बनी रही, जिससे परिवार जुदा हो गए और वेस्‍ट में नौकरियों तक पहुंच खो गई. दीवार हटी, तब जर्मनी के दो हिस्‍से मिले.

5. 12 मई को सोवियत संघ ने माना कि ये ब्‍लॉकेड नाकाम साबित हुआ, जिसके बाद सरहद दोबारा खोल दी गई.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें