इंटरनेट की पहुंच आज घर-घर तक है. लगभग हर घर में इंटरनेट की पहुंच ने
जहां लोगों को दुनिया से जोड़ा है वहीं बच्चों के लिए ये एक खतरनाक जरिया
बनकर उभरा है.
एक ओर जहां भारत जैसे रूढ़िवादी देश में सेक्स के बारे में बात करना तो दूर की बात, इसके बारे में सोचना भी गुनाह माना जाता है. वहीं टेक्नोलॉजी के आने के बाद छोटे बच्चों तक ऐसे अश्लील कंटेंट की पहुंच आसान हो जाने की वजह से इस पर घर में खुलकर बात करने की जरुरत बढ़ गई है.
एक्सपर्ट की राय मानें तो बच्चों से घर में इस बारे में बात जरुर होनी चाहिए. दिक्कत ये है कि चाहे हम फोन, लैपटॉप या किसी अन्य उपकरण कितने भी फिल्टर लगा लें, लेकिन फिर भी बच्चों को इससे दूर रखना अब नामुमकिन सा हो गया है.
एक रिसर्च के मुताबिक सेक्सुअल कंटेट से बच्चों का पहला सामना 13 साल की उम्र में हो जाता है. उम्र का ये पड़ाव बच्चे के जीवन में सबसे नाजुक मोड़ पर होते हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे में कुछ बच्चे इस तरह की तस्वीर को देखकर उत्साहित हो सकते हैं. फिर इसके बारे में और ज्यादा जानने और इसे और एन्जॉय करने की ललक इन्हें हो सकती है, जिस कारण वो गलत संगत में भी फंस सकते हैं.
इसका एक आसान तरीका ये है कि माता-पिता बच्चों को बताएं कि सेक्स का मतलब रिलेशनशिप होता है, सेक्स के पहले लोगों को एक-दूसरे इज्जत करनी चाहिए, सेक्स वैसा बिल्कुल नहीं होता जैसा पोर्न साइट्स में दिखाते हैं आदि-आदि.
खासकर उग्र या हिंसक पोर्न वीडियो सबसे ज्यादा चिंता का विषय हैं. क्योंकि इनकी तस्वीरें और वीडियो वीभत्स, परेशान करने वाले हो सकते हैं. ये भी मुमकिन है कि अक्सर पोर्न देखने वाले सेक्सुअल हिंसा जैसा घृणित काम भी कर सकते हैं. इन्ही में से कुछ रेपिस्ट भी निकल सकते हैं.
दिक्कत ये है कि न तो इंटरनेट को अब जिंदगी से दूर किया जा सकता है न ही बच्चों पर ज्यादा सख्ती की जा सकती है.
इसलिए इस मुद्दे को सावधानी और प्यार से हैंडिल करने की जरुरत होती है. साथ ही जितना ज्यादा हो सके बच्चों को वर्चुअल स्पेस की जगह निजी जिंदगी में बिजी रखा जाए.
जितना ज्यादा बच्चे इंटरनेट से दूर होंगे, उतना ही ज्यादा वो असल जीवन में रिश्तों के महत्व को समझेंगे.