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जुर्म

क्या है पत्थलगड़ी? क्यों मचा है इसे लेकर झारखंड में बवाल?

क्या है पत्थलगड़ी? क्यों मचा है इसे लेकर झारखंड में बवाल?
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झारखंड में राज्य सरकार और पत्थलगड़ी समर्थकों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. दो रातें बीत जाने के बाद भी खूंटी के अड़की इलाके में बीजेपी सांसद कड़िया मुंडा के घर से अगवा तीन सुरक्षाकर्मियों का पुलिस अबतक कोई सुराग हासिल नहीं कर पाई है. इन्हें छुड़ाने के लिए आज भी सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. मालूम हो कि अब तक पत्थलगड़ी का मामला शांतिपूर्ण तरीके से चलता आ रहा था, लेकिन इसके अचानक तूल पकड़ने के पीछे खूंटी की वह घटना है जिसमें पांच आदिवासी युवतियों के साथ बलात्कार हुआ. आइए जानते हैं क्या है पत्थलगड़ी और क्यों मचा है इस पर बवाल...
क्या है पत्थलगड़ी? क्यों मचा है इसे लेकर झारखंड में बवाल?
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दरअसल, यह बवाल कूचांग गांव में पांच आदिवासी युवतियों के साथ हुए बलात्कार की घटना के बाद शुरू हुआ है. पुलिस का आरोप है कि बलात्कार की घटना के पीछे पत्थलगड़ी समर्थक हैं. इसी बीच घाघरा इलाके के कुछ गावों में पत्थलगड़ी की घोषणा ने आग में घी डालने का काम किया. 
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अबतक पत्थलगड़ी को रोकने में संयम बरत रही पुलिस ने इस बार पत्थलगड़ी नहीं करने की चेतावनी दी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच भिडंत हो गई. भीड़ को हटाने के लिए किये गए लाठीचार्ज के बाद स्थिति बिगड़ गई और भीड़ ने बीजेपी सांसद करिया मुंडा के घर हमला बोल दिया. साथ ही तीन हाउस गार्ड को किडनैप कर अपने साथ ले गए. जिसके बाद से ही पुरे इलाके में जबरदस्त तनाव है.
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बता दें कि झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों एक खतरनाक साजिश का ताना - बाना बुना जा रहा है. ग्रामीण आदिवासी इलाके में कुछ देशविरोधी तत्व आदिवासियों को बहला-फुसलाकर समानांतर सरकार की साजिश रच रहे हैं. बताया जाता है कि इनका एक फुलप्रूफ प्लान भी है.
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जिसके तहत ये तत्व वैसे इलाके के आदिवासियों को ज्यादा भड़का रहे हैं, जहां अफीम की खेती का बड़ा स्कोप है. आदिवासी हित और कथित स्वायत्तता की बातों के पीछे अफीम के काले धंधे को बेरोकटोक चलाने की मंशा है. इसके लिए वो पत्थलगड़ी आदिवासी परंपरा को जरिया बनाए हुए हैं.

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अब बात पत्थलगड़ी की करें तो यह आदिवासियों की एक प्राचीन परंपरा है. इसमें मौजा, सीमाना, ग्रामसभा और अधिकार की जानकारी रहती है. इसके अलावा वंशावली, पुरखे तथा मृत व्यक्ति की याद संजोए रखने के लिए भी पत्थलगड़ी की जाती है. कई जगहों पर अंग्रेजों–दुश्मनों के खिलाफ लड़कर शहीद होने वाले वीर सूपतों के सम्मान में भी पत्थलगड़ी की जाती रही है.
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लेकिन, अब इसी परंपरा का सहारा ले कुछ देशविरोधी आपराधिक तत्व अपना मंसूबा साधने में जुटे है. जिन पत्थरों को गाड़ा जा रहा है उन पर आदिवासियों के स्वशासन व नियंत्रण क्षेत्र में गैररूढ़ि प्रथा के व्यक्तियों के मौलिक अधिकार लागू नहीं होने की बात लिखी है.
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इसके अलावा इसमें यह भी लिखा है कि पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में संसद या विधानमंडल का कोई भी सामान्य कानून लागू नहीं है. साथ ही अनुच्छेद 15 (पारा 1-5) के तहत ऐसे लोग जिनके गांव में आने से यहां की सुशासन शक्ति भंग होने की संभावना है, तो उनका आना-जाना, घूमना-फिरना वर्जित है.
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पत्थलगड़ी में वोटर कार्ड और आधार कार्ड को आदिवासी विरोधी दस्तावेज बताया है. इसके अनुसार, आदिवासी लोग भारत देश के मालिक हैं, आम आदमी या नागरिक नहीं. संविधान के अनुच्छेद 13 (3) क के तहत रूढ़ि और प्रथा ही विधि का बल यानी संविधान की शक्ति है.
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वहीं, पत्थलगड़ी के समर्थक कहते हैं कि सरकार पत्थलगड़ी को गलत ठहराने में जुटी है. वो सामान्य कानून को आदिवासी क्षेत्रों में लाकर हमारे हितों की अनदेखी कर रही है. जबकि आदिवासी ग्राम सभा के जरिए स्वशासन चाहते हैं.