आप छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं, तो मोदी सरकार जल्द एक खुशी की खबर लाने वाली है. सरकार पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसी अन्य कई छोटी बचत योजनाओं में मैच्योरिटी से पहले विद्ड्रॉ करने की सुविधा दे सकती है.
केंद्र सरकार ने बजट में ही इसके लिए रास्ता तैयार कर लिया था. इसमें प्रावधान किया गया था कि सभी छोटी बचत योजनाओं को एक कानून के तहत ला दिया जाएगा. गर्वनमेंट सेविंग्स प्रमोशन एक्ट पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक्ट,1968 की जगह लेगा. इसके साथ ही गवर्नमेंट सेविंग्स बैंक एक्ट, 1873 को निरस्त किया जा सकता है.
यह नया कानून फाइनेंशियल इमरजेंसी में सब्सक्राइबर को आसानी से बाहर निकलने का मौका देगा. मौजूदा समय में पीपीएफ में जहां 15 साल का लॉक इन पीरियड है, तो दूसरी स्कीम्स में भी इसी तरह का लॉक इन रखा गया है.
छोटी बचत योजनाओं से विद्ड्रॉ करने में काफी ज्यादा वक्त लगता है. यही वजह है कि ज्यादातर लोग इन स्कीम्स में निवेश से बचते हैं. अब सरकार लॉक इन पीरियड की बाध्यत से राहत दे सकती है और मैच्योरिटी से पहले विद्ड्रॉअल के लिए रास्ता तैयार कर सकती है.
नया कानून गार्जियन को यह अधिकार देगा कि वह नाबालिग के लिए उसके फंड का संरक्षण करे. इसके अलावा नाबालिगों के पास भी यह अधिकार रहेगा कि वह अपना नॉमिनी खुद चुन सकें.
इसके अलावा छोटी बचत योजनाओं को लेकर उठने वाले विवाद का निपटारा करने की खातिर लोकपाल की व्यवस्था भी की जा सकती है. ताकि विवादों का पारदर्शी तरीके से निपटारा हो सके.
इस कानून में ही एक प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें यह सरकार को अधिकार देता है कि वह समय-समय पर प्री-मैच्योरिटी को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर सके.