जिनपिंग का 'फैमिली कार्ड', ताइवान के नेता से मुलाकात कर बोले- आजादी चाहने वालों को नहीं करेंगे बर्दाश्त

बीजिंग में हुई यह मुलाकात चीन-ताइवान संबंधों में संवाद की संभावनाओं को रेखांकित करती है. जहां चीन एकीकरण पर जोर दे रहा है, वहीं ताइवान की आंतरिक राजनीति और अमेरिका की भूमिका इस मुद्दे को और जटिल बनाती है.

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जिनपिंगने बीजिंग में KMT नेता से मुलाकात की. (Photo- Reuters) जिनपिंगने बीजिंग में KMT नेता से मुलाकात की. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:54 PM IST

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन से मुलाकात की. इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने भावुक और कूटनीतिक लहजे में कहा कि ताइवान स्ट्रैट के दोनों ओर रहने वाले लोग 'एक ही चीनी परिवार' के सदस्य हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि रिश्तों का भविष्य चीनी लोगों के हाथों में है और 'ताइवान की आजादी' शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है.

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शी जिनपिंग ने 'वन चाइना' (एक चीन) नीति को दोहराते हुए कहा कि जब परिवार में सद्भाव होता है, तो सब कुछ समृद्ध होता है. उन्होंने चेतावनी दी कि चीन ताइवान की आजादी को लेकर किसी भी प्रकार की नरमी या सहनशीलता नहीं दिखाएगा. 

शी ने केएमटी और कम्युनिस्ट पार्टी से आपसी राजनीतिक विश्वास को मजबूत करने और 'मातृभूमि के पुनर्मिलन' और 'राष्ट्रीय पुनरुत्थान' के भविष्य के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया.

चेंग ली-वुन ने इस यात्रा को एक 'शांति मिशन' करार दिया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ताइवान जलडमरूमध्य बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप के लिए 'शतरंज की बिसात' नहीं बनेगा. 

यह भी पढ़ें: चीन के बढ़ते घेरे से डरे ताइवान के लोग, सिंगापुर और तुर्की की नागरिकता ले रहे, आखिर क्या है ये ट्रेंड

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दूसरी ओर, ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) ने इस यात्रा की कड़ी आलोचना की है. डीपीपी के महासचिव ह्सू कुओ-युंग ने सवाल उठाया कि क्या केएमटी, शी जिनपिंग को कोई 'भव्य उपहार' देने की कोशिश कर रही है, जबकि वे देश के रक्षा बजट में बाधा डाल रहे हैं.

आपको बता दें कि 1949 में चीनी गृहयुद्ध के बाद कुओमिन्तांग सरकार ताइवान चली गई थी और तभी से चीन-ताइवान के बीच तनाव बना हुआ है. तब से दोनों पक्षों के बीच न तो कोई शांति संधि हुई है और न ही एक-दूसरे को औपचारिक मान्यता मिली है. चीन ताइवान के वर्तमान राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को 'अलगाववादी' मानते हुए उनसे बातचीत से इनकार करता रहा है.

ऐसे में विपक्षी नेता की यह यात्रा बीजिंग के साथ संवाद का एक वैकल्पिक रास्ता खोलने की कोशिश मानी जा रही है. इस बीच, अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिसे लेकर बीजिंग लगातार आपत्ति जताता रहा है.

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