'जिनपिंग महान नेता, मेरा ये कहना कुछ लोगों को पसंद नहीं', ट्रंप की चापलूसी से दुनिया हैरान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बीजिंग में चीन और जिनपिंग की तारीफ से लोगों को हैरान कर दिया है. ज्यादा समय नहीं हुए जब ट्रंप चीन को टैरिफ की धमकियां देते थे, और कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस कहा करते थे. अब बीजिंग में ट्रंप ने कहा है कि जिनपिंग एक महान देश के महान नेता हैं.

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ट्रंप की डिक्शनरी में My friend, Great Leader जैसे शब्द आम हैं. (Photo: ITG) ट्रंप की डिक्शनरी में My friend, Great Leader जैसे शब्द आम हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

चीन दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रेसिडेंट जिनपिंग की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं. जिनपिंग की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं. ट्रंप ने शी जिनपिंग को 'दोस्त' कहा है. ट्रंप ने जिनपिंग की तरफ से घोषणा की है कि चीनी राष्ट्रपति 24 सितंबर को व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे. 

बीजिंग में ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ओपनिंग रिमार्क्स के दौरान ट्रंप ने जिनपिंग की तारीफ में एक से एक बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आपके साथ होना सम्मान की बात है. आपका दोस्त होना सम्मान की बात है, और चीन और अमेरिका के बीच संबंध पहले से कहीं बेहतर होने वाले हैं.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि, "आप एक महान नेता हैं. मैं सबको कहता हूं कि आप महान नेता हैं. जब मैं यह कहता हूं तो कुछ लोग पसंद नहीं करते, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं क्योंकि यह सच है."

अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिनपिंग को एक महान देश का महान नेता बताया. उन्होंने ट्रंप ने स्वागत समारोह की भी तारीफ की. राष्ट्रपति ट्रंप ने बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम और चीन की सेना की व्यवस्था को 'असाधारण' और 'बेमिसाल' बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें चीन के लिए बहुत सम्मान है. 

राष्ट्रपति शी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान यहां दिए गए भाषण में ट्रंप ने कहा, "इस शानदार स्वागत के लिए एक बार फिर धन्यवाद राष्ट्रपति शी. आज रात मुझे आपको और मैडम पेंग को इस 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में हमारे यहां आने का निमंत्रण देते हुए गर्व महसूस हो रहा है. हम इस दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अब मैं अपना ग्लास उठाकर अमेरिकी और चीनी लोगों के बीच के समृद्ध और मज़बूत रिश्तों के सम्मान में एक टोस्ट पेश करना चाहूंगा."

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ट्रंप ने कहा, "यह एक बहुत ही खास रिश्ता है और मैं एक बार फिर आपका धन्यवाद करना चाहता हूं. यह समय बहुत ही शानदार रहा है."

तारीफ टपकते शब्दों से हैरानी 

ट्रंप की यह तारीफ मुख्य रूप से कूटनीतिक रणनीति है, न कि सच्ची दोस्ती या चीन की तारीफ. ट्रंप हमेशा से 'पर्सनल केमिस्ट्री' और चापलूसी का इस्तेमाल करके दूसरे नेताओं से बेहतर डील निकालने की कोशिश करते हैं. 

गौरतलब है कि पिछले एक साल में ट्रंप ने चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कई मौकों पर तीखे हमले किए. इस टकराव का मुख्य मुद्दा टैरिफ और फेंटेनाइल संकट रहा. ट्रंप ने चीन को अमेरिका में नशीली दवाओं के रसायनों की आपूर्ति का जिम्मेदार ठहराया. 

फरवरी 2025 में ट्रंप ने फेंटेनाइल से जुड़े 10% टैरिफ लगाए, जिन्हें बाद में 20% तक बढ़ा दिया.  उन्होंने कहा कि चीन जानबूझकर अमेरिकियों को 'नशीली दवाओं' के ट्रैप में धकेल रहा है. जिससे रोज सैकड़ों मौतें हो रही हैं. 

ट्रंप ने चीन को 'अनुचित व्यापार' करने वाला, समझौतों का उल्लंघन करने वाला और अमेरिकी टेक्नोलॉजी चुराने वाला देश बताया.  उन्होंने शी जिनपिंग को 'बहुत कठिन' और 'सौदा करने में मुश्किल' नेता बताया. 

कभी चाइना वायरस कहकर चिढ़ाते थे ट्रंप

2020 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार चीन को कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने वायरस को 'चाइना वायरस' या 'वुहान वायरस' नाम दिया और कहा कि यह चीन से आया है. 

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कहने का मतलब है ट्रंप चीन को लगातार अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी मानते हैं. इसलिए ट्रंप के तारीफ टपकते शब्दों से हैरानी लाजिमी है. 

हालांकि ट्रंप की सियासी डिक्शनरी में तारीफ वाले कई शब्द होते हैं.  ट्रंप पहले भी शी जिनपिंग को 'ग्रेट लीडर', 'ब्रिलिएंट', 'माई फ्रेंड' कह चुके हैं. ट्रंप पहले नेताओं की तारीफ करते हैं फिर उनके साथ हार्ड बारगेनिंग करते हैं. 

पिछले साल ट्रंप ने कहा था, "मुझे राष्ट्रपति शी पसंद हैं, लेकिन वे बहुत सख़्त हैं, और उनके साथ कोई सौदा करना बेहद मुश्किल है"

वर्तमान में ट्रंप चीन से कृषि उत्पादों की खरीदारी, फेंटेनाइल पर सख्ती, rare earths का निर्यात और ईरान युद्ध में हॉर्मुज स्ट्रेट खुला रखने जैसी चीजें चाहते हैं. 

MAGA का क्या होगा?

ट्रंप के कुछ MAGA समर्थक और कमेंटेटर्स चीन की इस ताबड़तोड़ से हैरान हैं कि चीन अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है और इतनी नरमी गलत है. लेकिन ट्रंप और उनके समर्थक इसे 'अमेरिका फर्स्ट' की रणनीति बता रहे हैं. वे कहते हैं कि तारीफ सिर्फ दिखावे की है, असल में दबाव बनाकर अमेरिका के हित साधे जा रहे हैं. 

गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी कहा कि MAGA और चीन का विकास साथ-साथ चल सकते हैं. शी जिनपिंग ने राजकीय भोज से पहले दिए गए अपने शुरुआती भाषण में चीन और अमेरिका से अपील की कि वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार के तौर पर काम करें. 

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शी ने कहा, "हम दोनों का मानना ​​है कि चीन और अमेरिका के बीच का रिश्ता दुनिया का सबसे अहम द्विपक्षीय रिश्ता है. हमें इसे हर हाल में सफल बनाना होगा और इसे कभी बिगड़ने नहीं देना चाहिए."

शी ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि यह अमेरिकी आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ है.

उन्होंने कहा, "चीनी राष्ट्र का महान पुनरुद्धार करना और 'अमेरिका को फिर से महान बनाना' ये दोनों लक्ष्य एक साथ हासिल किए जा सकते हैं." उन्होंने आगे कहा, "सहयोग करने से चीन और अमेरिका दोनों को ही फ़ायदा होगा, जबकि टकराव से दोनों का ही नुकसान होगा; इसलिए उन्हें एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनना चाहिए."

होर्मुज खोलने पर हुई बात 

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष इस बात पर सहमत थे कि दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाना चाहिए. 

शी ने इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टोल लगाने का भी विरोध किया. 

व्हाइट हाउस अधिकारी के अनुसार शी ने खाड़ी देशों के तेल पर चीन की भविष्य की निर्भरता को कम करने के लिए अमेरिका से और अधिक तेल खरीदने में चीन की रुचि व्यक्त की. 

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ताइवान का मसला

व्हाइट हाउस और चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच गुरुवार सुबह करीब दो घंटे वार्ता चली. हालांकि ईरान युद्ध, व्यापार, टेक्नोलॉजी और ताइवान जैसे विवादित मुद्दों पर किसी बड़ी सफलता की उम्मीद कम ही है.

ट्रंप को उम्मीद है कि वह शिखर वार्ता में व्यापार और चीन द्वारा ज़्यादा कृषि प्रोडक्ट और यात्री विमान खरीदने के सौदों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, साथ ही अपने मतभेदों को सुलझाने और पिछले साल ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद शुरू हुए ट्रेड वॉर को फिर से दोहराने के लिए एक बोर्ड का गठन करेंगे. 

ताइवान के मसले पर बंद दरवाज़ों के पीछे हुई बैठक में शी ने ट्रंप से कहा कि अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से संभाला गया, तो अमेरिका-चीन संबंधों में कुल मिलाकर स्थिरता बनी रहेगी. चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार शी ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो दोनों देशों के बीच "टकराव और यहां तक कि संघर्ष का भी खतरा रहेगा जिससे पूरे संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे. 
 

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