तेहरान, ईरान के अन्य हिस्सों की तरह 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल के लगभग रोजाना हो रहे हवाई हमलों से हिल चुका है. जैसे-जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को दी गई डेडलाइन नजदीक आती जा रही है, ईरानियों की सबसे बड़ी चिंता बिजली बन गई है.
उत्तरी तेहरान के एक अस्पताल में असगर हाशमी नाम का मरीज जो हफ्ते में तीन बार डायलिसिस करवाता है, उसे डर है कि अगर बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है, तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है. कई ईरानियों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता बिजली की आपूर्ति बन गई है.
वहीं, मंगलवार को तेहरान के लोग बोतलबंद पानी जमा करने और अपने मोबाइल फोन, टॉर्च और पोर्टेबल पावर बैंक चार्ज करने के लिए दौड़ पड़े, क्योंकि ट्रंप द्वारा दी गई समय-सीमा तेजी से खत्म हो रही थी.
इस डेडलाइन में ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग की गई है, नहीं तो बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की चेतावनी दी गई है.
खतरों और अपनी सेहत को लेकर चिंता के बावजूद, 56 वर्षीय हाशमी, जो तेहरान सबवे अथॉरिटी में काम करते हैं, वो बताते हैं कि वे उन अन्य ईरानियों से अलग नहीं हैं जो पिछले पांच हफ्तों से हमलों के बीच जी रहे हैं.
अस्पताल में इलाज के दौरान अपने बिस्तर पर लेटे हुए हाशमी ने कहा, “मैं चिंतित हूं, लेकिन मुझे अपने साथियों की ज्यादा चिंता है. जो भी होगा, हम अंत तक डटे रहेंगे."
जैसे ही ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन समयानुसार रात 8 बजे की उनकी डेडलाइन अंतिम है, कुछ ईरानियों ने कहा कि वे बेहद डरे हुए हैं. कुछ ने हार मान ली, जबकि हाशमी जैसे कुछ लोग अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं.
हाशमी ने कहा, “मैं बंदूक उठाने और दुश्मन के खिलाफ लड़ाई शुरू करने के लिए तैयार हूं.”
वहीं, 23 वर्षीय Mahan Qayoumi, जो एक हस्तशिल्प दुकान में काम करते हैं, उन्होंने भी बिजली संकट को लेकर चिंता जताई. Qayoumi ने कहा, “जब बिजली नहीं होगी, तो पानी नहीं होगा, साफ-सफाई नहीं होगी, कुछ भी नहीं बचेगा” उन्होंने बताया कि बिजली कटने पर उनका काम पूरी तरह रुक जाएगा.
aajtak.in