दुनियाभर का ध्यान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर है. इस बीच एक अहम बयान सामने आया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को साफ-साफ कह दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बरसों से जो अविश्वास और नफरत चली आ रही है, उसे रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता. वेंस का कहना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी ही शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है.
आसान भाषा में समझें तो दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कोई भी एक-दूसरे पर यकीन करने को तैयार नहीं है. हाल ही में पाकिस्तान में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. हालांकि, जेडी वेंस ने एक सकारात्मक बात यह कही है कि ईरानी बातचीत करने वाले भी डील चाहते हैं और कूटनीति के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं. उन्होंने मौजूदा स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि समाधान आसान नहीं है.
अब चर्चा इस बात की है कि क्या अगले दो दिनों के भीतर पाकिस्तान में एक बार फिर दोनों देशों की मुलाकात हो सकती है? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए पाकिस्तान में फिर से बातचीत शुरू हो सकती है. पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम कड़ी बना हुआ है, जहां पर्दे के पीछे वाली कूटनीति तेजी से चल रही है. पिछले दौर की बातचीत में भी जेडी वेंस खुद अमेरिकी दल का नेतृत्व कर रहे थे, जो दशकों बाद दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी आमने-सामने की मुलाकात थी.
आखिर क्यों नहीं बन रही बात?
अब सवाल उठता है कि आखिर 21 घंटे की बातचीत में ऐसी क्या बात हुई कि डील फाइनल नहीं हो सकी? दरअसल, सबसे बड़ा झगड़ा परमाणु कार्यक्रम को लेकर फंसा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन पर कम से कम 20 साल तक रोक लगा दे, जबकि ईरान सिर्फ 5 साल की रोक पर अड़ा है. यह 15 साल का फासला ही दोनों के बीच की सबसे बड़ी खाई बन गया है. इसके अलावा, एक-दूसरे की शर्तों को कैसे परखा जाए और भविष्य की गारंटी क्या होगी, इन बातों पर भी सहमति नहीं बन पाई है.
बातचीत फेल होने का असर अब समंदर में भी दिखने लगा है. पाकिस्तान में वार्ता नाकाम होने के तुरंत बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज के जरिए ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर दी है. अमेरिका चाहता है कि वह अपनी सैन्य ताकत और आर्थिक दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर कर दे. इस नाकेबंदी से पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई पर भी संकट गहराने का डर पैदा हो गया है.
फिलहाल, दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एक तरफ बातचीत की उम्मीद है और दूसरी तरफ युद्ध के और ज्यादा भड़कने का खतरा. अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या अमेरिका और ईरान अपने अविश्वास को पीछे छोड़कर किसी बड़े समझौते पर पहुंच पाएंगे, या फिर यह नफरत एक बार फिर जंग की आग को तेज कर देगी. कूटनीति की इस शतरंज में पाकिस्तान अब भी एक अहम मैदान बना हुआ है.
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