मध्य पूर्व में छिड़े महायुद्ध को रोकने के लिए पर्दे के पीछे से दुनिया की बड़ी ताकतें सक्रिय हो गई हैं. एक वरिष्ठ राजनयिक के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रंप की हालिया शांति घोषणा से ठीक पहले ओमान और तुर्की के जरिए सबसे सक्रिय बैकचैनल वार्ताएं आयोजित की गईं.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ऐतिहासिक रूप से मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला ओमान एक बार फिर दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को मेज पर लाने का जरिया बना है. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि केवल तुर्की और ओमान ही नहीं, बल्कि भारत, सऊदी अरब (रियाद) और मिस्र (काहिरा) के जरिए भी लगातार कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान होता रहा.
भारत के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ बेहतर संबंध हैं, जिसे देखते हुए नई दिल्ली ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद की. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन गुप्त वार्ताओं का ट्रंप के '5-दिवसीय युद्ध विराम के ऐलान' के फैसले पर कितना सीधा प्रभाव पड़ा, लेकिन कूटनीतिज्ञों का मानना है कि इन देशों के दबाव और मध्यस्थता ने युद्ध को फैलने से रोकने में 'सिक्योरिटी वाल्व' का काम किया है.
मौजूदा हालात में एक तरफ क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कई देश पर्दे के पीछे बातचीत के जरिए टकराव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह पहली बार है जब युद्ध के चौथे सप्ताह में इतने सारे देश एक साथ मिलकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रहे हैं. इससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में कूटनीतिक समाधान की कोशिशें और तेज हो सकती हैं.
इससे पहले खबर आई थी कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्त्र पर्दे के पीछे रहकर दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल हो सकते हैं.
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रोहित शर्मा