UAE ने होर्मुज को किया बायपास! अब दोगुनी तेजी से बेचेगा तेल, भारत को कितना फायदा

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों की तेल और गैस सप्लाई में भारी रुकावट आई है. यूएई ने इस संकट से निपटने के लिए फुजैराह के रास्ते एक नई तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य 2027 तक निर्यात क्षमता दोगुनी करना है.

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यूएई ने होर्मुज को बायपास करने की कोशिशें तेज कर दी हैं (Photo: Reuters/AI) यूएई ने होर्मुज को बायपास करने की कोशिशें तेज कर दी हैं (Photo: Reuters/AI)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:43 PM IST

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से संयुक्त अरब अमीरात समेत सभी खाड़ी देशों की तेल-गैस सप्लाई को भारी नुकसान पहुंचा है. इस संकट से निकलने के लिए खाड़ी देश होर्मुज का विकल्प तलाशने में जुटे हैं और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक नई तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने का फैसला किया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यूएई ने होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने की अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए एक नए तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करेगा. सरकार के अबू धाबी मीडिया ऑफिस (ADMO) ने शुक्रवार को बताया कि इस नई पाइपलाइन के जरिए 2027 तक फुजैराह के रास्ते तेल निर्यात क्षमता दोगुनी की जाएगी.

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अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद ने एक कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) को वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया. ADMO के मुताबिक, पाइपलाइन का निर्माण जारी है और इसके 2027 में चालू होने की उम्मीद है.

हालांकि, सरकार ने यह नहीं बताया कि इस प्रोजेक्ट की मूल समयसीमा क्या थी.

पाइपलाइन से तेल भेजने की क्षमता बढ़ा रहा यूएई

यूएई की मौजूदा अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन (ADCOP), जिसे हबशन-फुजैराह पाइपलाइन भी कहा जाता है, प्रतिदिन 18 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है. यह पाइपलाइन इसलिए बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि इसके जरिए यूएई ओमान की खाड़ी के तट से सीधे तेल निर्यात कर सकता है.

यूएई और सऊदी अरब ही खाड़ी क्षेत्र के ऐसे तेल उत्पादक देश हैं जिनके पास ऐसी पाइपलाइनें हैं जो होर्मुज स्ट्रेट से बाहर कच्चे तेल का निर्यात कर सकती हैं. वहीं, ओमान के पास ओमान की खाड़ी के किनारे लंबा समुद्री तट है.

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ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट को ईरान ने 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में बंद कर दिया था. इस समुद्री रास्ते से सामान्य तौर पर दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति एशिया और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचती है.

कुवैत, इराक, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देश तेल निर्यात के लिए लगभग पूरी तरह इसी स्ट्रेट पर निर्भर हैं.

ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट आने से तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. कई सरकारों को ईंधन की राशनिंग करनी पड़ रही है और बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक मंदी का खतरा भी बढ़ गया है.

भारत को कितना फायदा होगा?

यूएई भारत का अहम बिजनेस पार्टनर है जिसके साथ भारत अपने संबंधों को लगातार बढ़ा रहा है. भारत-यूएई का द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर से ऊपर जा चुका है. दोनों देशों ने अपने गैर तेल व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टार्गेट रखा है.

यूएई भारत के शीर्ष तेल सप्लायर्स में शामिल है. रूस, इराक, सऊदी के बाद सबसे अधिक तेल यूएई से ही आता है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद भी अप्रैल के महीने में प्रतिदिन तकरीबन 6 लाख बैरल तेल यूएई ने भारत को भेजा है.

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अब यूएई होर्मुज को बायपास करने की तैयारी में है और इससे भारत को भी बहुत फायदा होगा. यूएई की नई पाइपलाइन 2027 तक शुरू होने के बाद फुजैराह के जरिए यूएई दोगुना तेल भेज पाएगा.

इससे रिस्क प्रीमियम भी कम होगा, जहाजों के इंश्योरेंस का झंझट कम होगा और शिपिंग की खर्चा भी घटेगा. इससे यूएई का तेल भारत को अपेक्षाकृत सस्ता पड़ सकता है जिससे तेल इम्पोर्ट बिल कम होगा.

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