अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक समेत कई स्तरों पर प्रयास जारी है. बताया जा रहा है कि मंगलवार को जिनेवा में दोनों देशों के तेहरान परमाणु कार्यक्रम पर दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में शामिल होंगे.
इसी बीच जानकारी आ रही है कि इस वार्ता में शामिल होने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार तेहरान से जिनेवा के लिए रवाना हो गए हैं. ईरानी राज्य मीडिया आईआरएनए ने इसकी पुष्टि की है. ओमान इन वार्ताओं का मध्यस्थता कर रहा है, जैसा कि पिछले सप्ताह ओमान में पहले दौर में हुआ था.
IAEA महानिदेशक से भी करेंगे मुलाकात
ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, अराघची एक राजनयिक और तकनीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. जिनेवा में वे स्विट्जरलैंड और ओमान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे. साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से भी चर्चा करेंगे.
दोनों देशों के बीच होने वाली ये वार्ता ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित है. ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन वह 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धित कर रहा है जो हथियारों के ग्रेड के बेहद करीब है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान को किसी भी कीमत पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है.
ट्रंप के धमकी
उधर, वार्ता के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत 'USS जेराल्ड आर. फोर्ड' कैरिबियन से मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी.
खाड़ी देशों की चेतावनी
ट्रंप की धमकियों के बीच खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई भी हमला एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है. क्योंकि ईरान ने पहले ही धमकी दी है कि यदि हमला हुआ तो वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा. जून में कतर के अल उदेद एयर बेस पर हुआ हमला इसी तनाव का हिस्सा था.
दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अभी-भी कूटनीतिक समाधान में रुचि रखता है और हालिया सैन्य तैनाती केवल अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए एक सुरक्षात्मक कदम है.
वहीं, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात कर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने और हमास व हिजबुल्ला जैसे समूहों की फंडिंग रोकने की मांग की है. हालांकि, ईरान ने कहा है कि वार्ता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी.
आपको बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों का युद्ध हुआ था, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी. इसके बाद ईरान ने अमेरिका साथ हुए परमाणु समझौते को तोड़ दिया. ईरान ने कतर में अल उदैद एयर बेस पर हमला किया था. हालांकि, कोई अमेरिकी या कतरी नागरिक घायल नहीं हुआ.
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