ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के अपने फैसले को पलट दिया है. शनिवार को इस अहम जलमार्ग पर प्रतिबंध दोबारा लगा दिए गए हैं, क्योंकि अमेरिका ने कहा था कि इस कदम से उसकी नाकाबंदी समाप्त नहीं होगी. बता दें, ईरान ने इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का ऐलान किया था.
इजरायल और अमेरिका के 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमले के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही बाधित रही. पहले ईरान ने घोषणा की थी कि यह मार्ग खुला रहेगा, लेकिन अब उसने इसे फिर से बंद करने का फैसला लिया है.
ईरान के संयुक्त सैन्य कमांड ने शनिवार को कहा कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण पहले जैसी स्थिति में वापस आ गया है और अब यह सशस्त्र बलों की सख्त निगरानी और नियंत्रण में है."
साथ ही चेतावनी दी कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखेगा, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों का आवागमन रोका जाएगा.
ईरान की ओर से यह घोषणा उस बयान के बाद आई है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी नाकाबंदी पूरी तरह जारी रहेगी, जब तक तेहरान अमेरिका के साथ, खासकर अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं कर लेता.
होर्मुज खोलने की घोषणा के बाद भी थी समस्या
ईरान ने भले ही इससे पहले यह घोषणा कर दी थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुला है, लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को कई भारतीय तेल टैंकरों को पर्शियन गल्फ से यू-टर्न लेना पड़ा.
जानकारी के अनुसार, भारतीय टैंकर सन्मार हेराल्ड, देश गरिमा, देश वैभव और देश विभोर दुबई से होर्मुज की ओर जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते से ही लौट गए. फिलहाल इनमें से अधिकतर जहाज ईरान के क़ेश्म आइलैंड के आसपास देखे गए हैं.
चार भारतीय और दो ग्रीक जहाज इस अहम समुद्री रास्ते से नहीं गुजर पाए, जबकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया था कि सीजफायर.के बाकी समय के लिए यह रास्ता पूरी तरह खुला है.
हालांकि, यह साफ नहीं है कि जहाज़ों ने अपना सफर क्यों रोका और वापस क्यों मुड़े. अराघची के बयान के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई, तो यह जलमार्ग फिर से बंद रह सकता है, और इस बीच अब ईरान ने फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखने का फैसला लिया है.
अब तक भारत के 8 टैंकर, जो कच्चा तेल और एलपीजी लेकर चल रहे थे, होर्मुज पार कर भारत के अलग-अलग बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं. ईरान ने इससे पहले भारत, पाकिस्तान, इराक, रूस और चीन जैसे मित्र देशों के जहाज़ों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी.
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