ईरान के खिलाफ जंग बनी ट्रंप के गले की फांस! करीबी छोड़ रहे साथ, NATO भी नहीं थाम रहा हाथ

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट का असर अब अमेरिका पर साफ दिख रहा है. डोनाल्ड ट्रंप के बयान और नाटो सहयोगियों से टकराव ने हालात को और जटिल बना दिया है. ईरान की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है. अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है. (Photo: AP) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है. अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है. (Photo: AP)

आजतक ब्यूरो

  • वॉशिंगटन,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध का असर अब सीधे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर दिखने लगा है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही रोकने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है. इसके चलते अमेरिका में डीजल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई है, जिसके चलते महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है. यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि इसका असर आगामी चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है.

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हालांकि, अमेरिका सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बहुत अधिक तेल आयात नहीं करता, लेकिन यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  ईरान और ओमान के बीच स्थित है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया का लगभग 20-22% कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है. दुनिया का करीब 20-25% लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) भी यहीं से होकर जाता है. 

इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, जिसका असर अमेरिका समेत पूरी दुनिया पर पड़ता है. यही वजह है कि होर्मुज संकट ट्रंप के लिए गले की फांस बन गया है. ट्रंप अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में हैं. उन्होंने हाल ही में कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरान इस तरह से पलटवार करेगा. उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और इंटरनेशनल रिपोर्ट्स में पहले ही ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर चेतावनी दी गई थी.

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ईरान युद्ध ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर किया

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पहले से ही मिसाइलें तैनात कर रखी थीं और अपने ऊपर हमला होने की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी. दरअसल, जब अमेरिका ने शुरुआती हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया, तो यह माना जा रहा था कि ईरान कमजोर पड़ जाएगा. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में ईरान ने जिस तरह से जवाबी कार्रवाई की, उसने हालात को और जटिल बना दिया है. कतर, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है.

इस बीच ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर भी तीखा हमला बोला है. उन्होंने नाटो को 'एकतरफा व्यवस्था' बताते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे साथ नहीं देते. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है और वह अकेले ही हालात संभाल सकता है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है और उसके पास न तो प्रभावी वायुसेना बची है और न ही नौसेना. हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है, क्योंकि ईरान लगातार हमले करने में सक्षम दिख रहा है.

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नाटो सहयोगियों का साथ न मिलने से चिढ़े ट्रंप

ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस समेत अन्य नाटो सहयोगियों से अपील की थी कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए क्षेत्र में अपने युद्धपोतों और नौसैनिकों की तैनाती करें. लेकिन ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने ईरान युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अमेरिका और ईरान को तनाव कम करने के लिए कूटनीति और बातचीत का रास्ता अख्तियार करने की सलाह दी है. नाटो सहयोगियों का साथ नहीं मिलने पर ट्रंप बुरी तरह चिढ़ गए हैं और उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं. 

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डोनाल्ड ट्रंप के करीबी जो केंट ने दिया इस्तीफा

उन्होंने मध्य पूर्व के देशों- कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन से मिले समर्थन की सराहना की. नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट के इस्तीफे पर भी ट्रंप ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अच्छा हुआ. ट्रंप की कोर टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल केंट ने मंगलवार को यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था. उन्होंने ईरान पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि ट्रंप ने इजरायल के दबाव में आकर यह फैसला लिया था. वहीं, ट्रंप ने यह साफ किया कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है.

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चीन को लेकर ट्रंप ने नरम रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि चीन के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध हैं और आर्थिक रूप से यह अमेरिका के लिए फायदेमंद रहा है. कुल मिलाकर, होर्मुज संकट ने जहां वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है, वहीं अमेरिका के भीतर भी इसके राजनीतिक और आर्थिक असर साफ दिखने लगे हैं. ट्रंप के बदलते बयानों और जमीनी हालात के बीच अंतर ने इस पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना दिया है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है.

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