EU या रूस… यूक्रेन जैसा रास्ता चुनने पर इस देश को पुतिन की कड़ी चेतावनी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अर्मेनिया को साफ संदेश दिया है कि वह एक साथ EU और रूस के आर्थिक ब्लॉक में नहीं रह सकता. यूक्रेन जैसे हालात का संकेत देते इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. अर्मेनिया अब पश्चिम और रूस के बीच संतुलन बनाने की चुनौती में फंस गया है.

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राष्ट्रपति पुतिन ने अर्मेनिया पर कड़ा रुख अपनाया है. (Photo: AFP) राष्ट्रपति पुतिन ने अर्मेनिया पर कड़ा रुख अपनाया है. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

दुनिया की राजनीति में एक बार फिर वही पुराना सवाल उभर रहा है, पश्चिम या रूस? और इस बार यह सवाल अर्मेनिया के सामने खड़ा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अर्मेनिया को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वह एक साथ दो नावों पर सवार नहीं रह सकता. या तो यूरोप का रास्ता चुनना होगा या फिर रूस के साथ बने रहना होगा.

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मॉस्को में अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान के साथ बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि अर्मेनिया अगर यूरोपीय यूनियन में शामिल होने की कोशिश करता है, तो वह रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन का हिस्सा नहीं रह सकता. उन्होंने साफ कहा कि दोनों आर्थिक व्यवस्थाएं अलग-अलग नियमों पर चलती हैं और दोनों के बीच संतुलन बनाना संभव नहीं है.

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पुतिन का यह बयान सिर्फ एक आर्थिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है. कुछ हद तक यह स्थिति यूक्रेन जैसी दिखती है, जहां पश्चिम के करीब जाने की कोशिश ने बड़े युद्ध का रूप ले लिया. हालांकि, अर्मेनिया की भौगोलिक स्थिति और परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन रूस का सख्त रुख साफ संकेत देता है कि वह अपने प्रभाव क्षेत्र को कमजोर नहीं होने देना चाहता.

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अर्मेनिया-रूस के रिश्ते में आई खटास

पिछले कुछ सालों में अर्मेनिया ने धीरे-धीरे पश्चिम के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश की है. 2023 में नागोर्नो-कारबाख पर अजरबैजान के कब्जे के बाद अर्मेनिया और रूस के रिश्तों में खटास आ गई. अर्मेनिया का आरोप था कि वहां तैनात रूसी शांति सैनिक उसकी रक्षा नहीं कर पाए. वहीं, रूस का कहना था कि उसके पास हस्तक्षेप करने का स्पष्ट अधिकार नहीं था.

इस घटनाक्रम के बाद अर्मेनिया ने रूस के नेतृत्व वाले सुरक्षा संगठन कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन से दूरी बनानी शुरू कर दी और अमेरिका व यूरोप के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दिया. प्रधानमंत्री पशिनयान ने तो खुलकर EU में शामिल होने की इच्छा भी जताई है.

यूरोपीय बाजार की तुलना में रूसी तेल सस्ता

पुतिन ने बातचीत के दौरान यह भी याद दिलाया कि अर्मेनिया को रूस से सस्ती गैस मिल रही है, जो यूरोपीय बाजार की तुलना में काफी कम कीमत पर मिल रही है. यानी रूस यह संकेत दे रहा है कि अगर अर्मेनिया पश्चिम की ओर बढ़ता है, तो उसे आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है.

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पशिनयान ने भी माना कि दोनों ब्लॉक्स में एक साथ रहना संभव नहीं है, लेकिन फिलहाल उनका देश रूस के साथ अपने पुराने रिश्ते बनाए रखते हुए यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने कहा कि रूस के साथ संबंध "गहरे और महत्वपूर्ण" हैं.

इस बीच, रूस ने अर्मेनिया की आंतरिक राजनीति पर भी नजर बनाए रखी है. पुतिन ने उम्मीद जताई कि जून में होने वाले चुनाव में प्रोरूसी ताकतों को खुलकर हिस्सा लेने दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब रूसी-अर्मेनियाई बिजनेसमैन सैमवेल करापेटियन जैसे नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर विवाद चल रहा है.

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